कानपुर के जच्चा-बच्चा अस्पताल में सुविधाओं की कमी, नई विभागाध्यक्ष ने सुधार का तैयार किया रोडमैप
रिपोर्ट- हरिशंकर शर्मा
कानपुरः जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज मेटरनिटी हॉस्पिटल (जच्चा-बच्चा अस्पताल) की व्यवस्थाओं में आने वाले दिनों में बदलाव देखने को मिल सकता है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की नवनियुक्त विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी ने अस्पताल की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने, मरीजों और तीमारदारों की समस्याओं को कम करने तथा अस्पताल की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में पहल शुरू की है। उन्होंने पदभार संभालने के बाद अस्पताल की मौजूदा व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए कई प्राथमिकताएं तय की हैं।
डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने 1 अगस्त 2026 को विभागाध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। इसके बाद से उनका मुख्य उद्देश्य अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे मरीजों को इलाज के लिए अनावश्यक रूप से एक विभाग से दूसरे विभाग तक भटकना न पड़े। इसके लिए उन्होंने जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन प्रो. डॉ. संजय काला को प्रस्ताव भेजकर आवश्यक सुधारों की दिशा में कार्रवाई का अनुरोध किया है।
अस्पताल की व्यवस्थाओं में बदलाव की तैयारी
डॉ. सीमा द्विवेदी के मुताबिक, अस्पताल में आने वाले मरीजों को बेहतर और व्यवस्थित माहौल उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पताल में आने वाले मरीजों को भी साफ-सुथरा, व्यवस्थित और सुविधाजनक वातावरण मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से अस्पताल के सुंदरीकरण के साथ-साथ आंतरिक व्यवस्थाओं में सुधार पर भी ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केवल अस्पताल की बाहरी व्यवस्था को बेहतर बनाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ ही वार्ड, मरीजों की सुविधाओं, तीमारदारों के बैठने और विश्राम की व्यवस्था तथा कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में भी सुधार जरूरी है। इसलिए सुधार की योजना में अस्पताल के अंदर की व्यवस्थाओं को प्रमुखता दी जा रही है।
मरीजों की सहायता के लिए बनेगा हेल्प डेस्क
अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को सबसे बड़ी परेशानी कई बार सही जानकारी हासिल करने में होती है। मरीज को यह पता नहीं होता कि उसे किस विभाग में जाना है, किस काउंटर पर कौन-सी प्रक्रिया पूरी करनी है या किस चिकित्सक से संपर्क करना है। इस समस्या को देखते हुए अस्पताल में हेल्प डेस्क बनाने की योजना तैयार की गई है।
हेल्प डेस्क पर एक सहायक की व्यवस्था की जाएगी, जो मरीजों और तीमारदारों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के साथ उन्हें संबंधित विभाग तक पहुंचने में मदद करेगा। इससे मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, इससे अस्पताल में मरीजों की आवाजाही को भी व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। विशेष रूप से प्रसूति एवं महिला मरीजों के अस्पताल होने के कारण यहां व्यवस्था और मार्गदर्शन की जरूरत और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
तीमारदारों के लिए अलग व्यवस्था की तैयारी
जच्चा-बच्चा अस्पताल में मरीजों के साथ बड़ी संख्या में तीमारदार भी आते हैं। वर्तमान में कई तीमारदार वार्ड की गैलरी में ही बिस्तर लगाकर आराम करते हैं। इससे एक ओर जहां मरीजों को परेशानी होती है, वहीं दूसरी ओर डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के आवागमन में भी दिक्कत आती है।
डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि तीमारदारों के लिए अलग से व्यवस्था कराने की योजना है। इसका उद्देश्य यह है कि वार्ड के अंदर अनावश्यक भीड़ न हो और चिकित्सकों को मरीजों की जांच एवं उपचार में परेशानी का सामना न करना पड़े।
इसके साथ ही तीमारदारों को भी सम्मानजनक और सुविधाजनक स्थान मिल सकेगा। अलग व्यवस्था होने से वार्ड का वातावरण अधिक व्यवस्थित रहने की उम्मीद है।
तीन बेड पर एक पंखे से गर्मी में परेशानी
अस्पताल की मौजूदा व्यवस्थाओं में सबसे अहम समस्या वार्डों में पर्याप्त सुविधाओं की कमी से जुड़ी है। अस्पताल के कुछ वार्डों में तीन बेड पर एक पंखे की व्यवस्था होने की बात सामने आई है। गर्मी के मौसम में ऐसी स्थिति मरीजों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
मरीजों के लिए पर्याप्त हवा और आरामदायक वातावरण इलाज की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में वार्डों में पंखों की पर्याप्त व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करना जरूरी है।
अस्पताल की व्यवस्थाओं में लंबे समय से सुधार की जरूरत महसूस की जा रही थी। अब नई विभागाध्यक्ष ने इन बुनियादी समस्याओं को प्राथमिकता में शामिल किया है। इससे मरीजों को आने वाले समय में राहत मिलने की उम्मीद है।
रात के समय मरीजों की निगरानी भी चुनौती
अस्पताल में रात के समय मरीजों को तत्काल सहायता मिलने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। दी गई जानकारी के अनुसार, कुछ वार्डों में देर रात ड्यूटी के दौरान स्टाफ की उपलब्धता को लेकर मरीजों और तीमारदारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ऐसी स्थिति में यदि किसी मरीज को अचानक सहायता की जरूरत पड़ती है तो उसे संबंधित कर्मचारी तक पहुंचने में समय लग सकता है। मरीजों की सुरक्षा और समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना अस्पताल की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
इस संबंध में डॉ. सीमा द्विवेदी ने कहा कि पहले से चली आ रही व्यवस्थाओं में अब सुधार किया जाएगा। उन्होंने कर्मचारियों की कार्यशैली और मरीजों के साथ उनके व्यवहार को भी सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
उनका कहना है कि अस्पताल में काम करने वाले प्रत्येक कर्मचारी का मरीजों के प्रति व्यवहार संवेदनशील और सहयोगात्मक होना चाहिए। आने वाले समय में इस दिशा में भी बदलाव देखने को मिलेगा।
वर्षों से कबाड़ की स्थिति में पड़े हैं बेड
अस्पताल की बुनियादी व्यवस्थाओं का एक दूसरा पहलू भी सामने आता है। अस्पताल परिसर में सभागार और ओल्ड सिफा की ओर वार्ड तथा उसके बाहर कई बेड लंबे समय से अनुपयोगी स्थिति में पड़े बताए जा रहे हैं। इन बेडों की स्थिति देखकर अस्पताल की संसाधन प्रबंधन व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।
एक तरफ मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाओं की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर उपलब्ध संसाधनों का उचित उपयोग भी जरूरी है। यदि पुराने बेड मरम्मत के बाद उपयोग में लाए जा सकते हैं तो उन्हें दुरुस्त किया जा सकता है और यदि वे पूरी तरह अनुपयोगी हैं तो उन्हें व्यवस्थित तरीके से हटाने की जरूरत होगी।
इस दिशा में भी अस्पताल प्रशासन से कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।
प्राचार्य को भेजा गया प्रस्ताव
डॉ. सीमा द्विवेदी ने बताया कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं डीन प्रो. डॉ. संजय काला को प्रस्ताव भेजा गया है। अस्पताल में आवश्यक सुधार कराने के साथ-साथ इसके लिए फंड की व्यवस्था कराने को लेकर भी पत्राचार किया जा रहा है।
उनके अनुसार, अस्पताल में सुधार केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए प्रशासन, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ समन्वय आवश्यक है। इसलिए बुनियादी ढांचे से लेकर मरीजों की सुविधा तक सभी पहलुओं पर क्रमबद्ध तरीके से काम करने की योजना है।
मरीजों को बेहतर सुविधा देना लक्ष्य
जच्चा-बच्चा अस्पताल में आने वाली महिलाओं और उनके नवजात बच्चों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसके लिए अस्पताल की व्यवस्थाओं को आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाना जरूरी है।
वर्तमान में पंखे, बेड, तीमारदारों के लिए स्थान, हेल्प डेस्क और रात के समय मरीजों की सहायता जैसी समस्याएं सामने हैं। यदि इन बिंदुओं पर प्रभावी तरीके से काम किया जाता है तो अस्पताल की कार्यप्रणाली में बड़ा सुधार हो सकता है।
फिलहाल नई विभागाध्यक्ष की पहल के बाद मरीजों और तीमारदारों को अस्पताल की व्यवस्थाओं में बदलाव की उम्मीद जगी है। अब देखना होगा कि प्रस्तावित योजनाओं को धरातल पर कितनी तेजी से लागू किया जाता है और मरीजों को इनका लाभ कब तक मिल पाता है।
कुल मिलाकर, जच्चा-बच्चा अस्पताल में सुधार की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। नई विभागाध्यक्ष डॉ. सीमा द्विवेदी ने पदभार संभालने के बाद बुनियादी सुविधाओं, मरीजों की सहायता, तीमारदारों की व्यवस्था और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। यदि प्रस्तावित सुधारों के लिए आवश्यक संसाधन और प्रशासनिक सहयोग समय पर उपलब्ध होता है, तो अस्पताल में मरीजों के लिए अधिक व्यवस्थित और सुविधाजनक माहौल तैयार किया जा सकता है।

