घर बैठे पहचानें मिलावटी खाद्य पदार्थ: कानपुर में फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स ने सिखाए आसान परीक्षण

19

रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी

कानपुरः आज के समय में खाद्य पदार्थों में मिलावट एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। दूध, घी, मसाले, शहद और मिठाइयों जैसी रोजमर्रा की खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावट न केवल उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालती है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकती है। ऐसे में यदि आम नागरिक स्वयं शुरुआती स्तर पर मिलावट की पहचान कर सकें, तो यह खाद्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा। इसी उद्देश्य को लेकर शुक्रवार को कानपुर के मोतीझील में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स मोबाइल प्रयोगशाला द्वारा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने लाइव डेमो के माध्यम से लोगों को बताया कि घर पर उपलब्ध सामान्य संसाधनों की मदद से कई खाद्य पदार्थों में होने वाली संभावित मिलावट की प्रारंभिक पहचान कैसे की जा सकती है। हालांकि अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ये परीक्षण केवल शुरुआती जांच के लिए हैं। किसी भी खाद्य पदार्थ की अंतिम पुष्टि केवल विभागीय प्रयोगशाला में वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही की जाती है।

जिलाधिकारी ने देखा लाइव प्रदर्शन

कार्यक्रम में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने मोबाइल प्रयोगशाला का निरीक्षण किया और विभिन्न परीक्षणों का प्रदर्शन देखा। इस दौरान सहायक आयुक्त (खाद्य) संजय प्रताप सिंह, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी धर्मेंद्र द्विवेदी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी अनिल कुमार, नरेंद्र शर्मा, बृजमोहन गुप्ता, उपासना शाह तथा मोबाइल प्रयोगशाला पर तैनात विश्लेषक भी मौजूद रहे।

अधिकारियों ने बताया कि विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक बनाना भी है ताकि उपभोक्ता स्वयं सतर्क रहकर मिलावटी खाद्य पदार्थों की खरीद से बच सकें।

कई खाद्य पदार्थों की जांच का किया गया प्रदर्शन

मोबाइल प्रयोगशाला में दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मसाले, खाद्य तेल, शहद, चायपत्ती, आटा, गुड़, चीनी तथा अन्य खाद्य पदार्थों में होने वाली सामान्य मिलावट की पहचान का प्रदर्शन किया गया। विशेषज्ञों ने मौके पर दूध में डिटर्जेंट और स्टार्च, घी में स्टार्च, हल्दी एवं लाल मिर्च में कृत्रिम रंग, काली मिर्च में पपीते के बीज तथा चांदी के वर्क में एल्युमिनियम जैसी संभावित मिलावट की पहचान करके दिखाई।

इसके अलावा लोगों को यह भी बताया गया कि घरेलू स्तर पर किए जाने वाले परीक्षण केवल प्राथमिक संकेत देते हैं। यदि किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट की आशंका हो तो उसका नमूना विभागीय प्रयोगशाला में भेजकर वैज्ञानिक जांच करानी चाहिए।

जिलाधिकारी ने लोगों से की जागरूक बनने की अपील

जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मिलावट के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार जागरूक उपभोक्ता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग खाद्य पदार्थ खरीदते समय सावधानी बरतेंगे और गुणवत्ता पर ध्यान देंगे तो मिलावट करने वालों पर स्वतः अंकुश लगेगा।

उन्होंने नागरिकों से अपील की कि हमेशा स्वच्छ और विश्वसनीय प्रतिष्ठानों से ही खाद्य सामग्री खरीदें। यदि कहीं भी गंभीर मिलावट की जानकारी मिले तो तत्काल खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को सूचित करें ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

ऐसे करें मिलावटी खाद्य पदार्थों की प्रारंभिक पहचान

1. दूध में स्टार्च की जांच

दूध, पनीर, खोया या छेना में आयोडीन (टिंचर ऑफ आयोडीन) की दो से तीन बूंद डालें। यदि मिश्रण नीला हो जाए तो स्टार्च की मिलावट की संभावना हो सकती है।

2. दूध में डिटर्जेंट

दूध में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं। यदि अधिक मात्रा में गाढ़ा झाग बने तो डिटर्जेंट की मिलावट की आशंका हो सकती है। सामान्य दूध में केवल हल्की झाग बनती है।

3. घी और मक्खन

घी या मक्खन में आयोडीन की कुछ बूंद डालने पर यदि रंग नीला हो जाए तो उसमें स्टार्चयुक्त पदार्थ मिलाए जाने की संभावना हो सकती है।

4. काली मिर्च

काली मिर्च को पानी में डालें। असली दाने नीचे बैठ जाते हैं जबकि पपीते के बीज ऊपर तैरने लगते हैं। दोनों की बनावट भी अलग होती है।

5. लाल मिर्च पाउडर

पानी में लाल मिर्च डालने पर यदि तुरंत लाल रंग की धारियां निकलने लगें तो कृत्रिम रंग की मिलावट की आशंका हो सकती है।

6. हल्दी

एक गिलास पानी में हल्दी डालें। शुद्ध हल्दी धीरे-धीरे नीचे बैठती है और हल्का रंग छोड़ती है, जबकि मिलावटी हल्दी पानी को गहरा पीला कर सकती है।

7. दालचीनी

असली दालचीनी की परतें बहुत पतली होती हैं, जबकि कैसिया की छाल मोटी और अधिक परतों वाली दिखाई देती है।

8. हींग

थोड़ी हींग जलाने पर यदि वह कपूर की तरह जले और पानी में घोलने पर दूधिया सफेद घोल बने तो उसे अपेक्षाकृत शुद्ध माना जाता है।

9. शहद

शहद की एक बूंद पानी में डालने पर यदि वह तुरंत घुल जाए तो उसमें मिलावट की संभावना हो सकती है। शुद्ध शहद अपेक्षाकृत धीरे घुलता है।

10. चांदी का वर्क

शुद्ध चांदी का वर्क उंगलियों से मसलने पर चूर्ण जैसा बिखर जाता है, जबकि एल्युमिनियम छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटता है।

11. लौंग

अच्छी गुणवत्ता वाली लौंग पानी में नीचे बैठ जाती है जबकि इस्तेमाल की जा चुकी या हल्की लौंग ऊपर तैर सकती है।

12. सरसों

सरसों के बीज चिकने होते हैं। वहीं सत्यानाशी (आरगेमोन) के बीज खुरदरे और अंदर से सफेद दिखाई देते हैं।

13. चायपत्ती

सफेद कागज या फिल्टर पेपर पर पानी डालकर चायपत्ती रखने पर यदि कृत्रिम रंग फैलता दिखाई दे तो मिलावट की आशंका हो सकती है।

14. हरी मटर

हरी मटर को लगभग आधे घंटे तक पानी में भिगोकर रखें। यदि पानी का रंग बदलने लगे तो कृत्रिम रंग मिलाया गया हो सकता है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य पदार्थ खरीदते समय गुणवत्ता, पैकेजिंग, निर्माण तिथि और विश्वसनीय ब्रांड पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही, किसी भी संदिग्ध खाद्य पदार्थ की शिकायत संबंधित विभाग में अवश्य करनी चाहिए। जागरूक उपभोक्ता न केवल स्वयं सुरक्षित रहता है बल्कि समाज को भी मिलावट के खतरे से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग का यह अभियान लोगों को मिलावट के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। यदि ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाएं तो उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ेगी और मिलावटखोरों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।