बिधनू के सपई में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्र की छत हुई क्षतिग्रस्त, जांच के बाद दोबारा निर्माण के निर्देश
रिपोर्ट – सर्वेश सोनू शर्मा
कानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार बच्चों के पोषण, प्रारंभिक शिक्षा और समग्र विकास को मजबूत बनाने के लिए प्रदेशभर में आधुनिक सुविधाओं से युक्त आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण करा रही है। इन केंद्रों का उद्देश्य बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। हालांकि, कानपुर के बिधनू ब्लॉक की ग्राम पंचायत सपई में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्र से सामने आए एक मामले ने निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य पूरा होने से पहले ही भवन की छत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। इसके साथ ही स्लैब से पानी टपकने और दूसरे हिस्से में सरिया दिखाई देने की शिकायतें भी सामने आईं। मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने जांच कराई, जिसमें निर्माण गुणवत्ता को लेकर अनियमितताएं मिलने पर संबंधित स्लैब को हटाकर दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्माण पूरा होने से पहले सामने आई तकनीकी खामी
सपई ग्राम पंचायत में आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि भवन की छत में दरार आने और स्लैब का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बारिश के दौरान स्लैब से पानी टपकने लगा। इसके अलावा निर्माणाधीन दूसरे कक्ष में भी कई स्थानों पर सरिया बाहर दिखाई देने लगी। इस स्थिति ने ग्रामीणों के बीच निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी।
चूंकि भवन अभी उपयोग के लिए शुरू नहीं किया गया था, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। इसके बावजूद ग्रामीणों ने समय रहते कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल
गांव के लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि यदि निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाता, तो इतनी जल्दी भवन में तकनीकी खामियां सामने नहीं आतीं।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सार्वजनिक उपयोग के भवनों का निर्माण पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ होना चाहिए, क्योंकि इनका उपयोग छोटे बच्चों और महिलाओं द्वारा किया जाना है।
हालांकि, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का अंतिम आकलन संबंधित विभागीय जांच के आधार पर ही किया जाएगा।
अधिकारियों ने कराया निरीक्षण
मामले की जानकारी मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कराया। जांच में निर्माणाधीन स्लैब निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
इसके बाद संबंधित हिस्से को तत्काल हटाने तथा दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों का कहना है कि पुनर्निर्माण के दौरान सभी तकनीकी मानकों का पूर्ण रूप से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
ग्राम प्रधान ने क्या कहा?
ग्राम प्रधान अनुज कुमार ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र के निर्माण का कार्य ठेकेदार अजीत यादव को दिया गया था।
उन्होंने बताया कि छत में दरार आने की जानकारी मिलने के बाद संबंधित स्लैब को हटवा दिया गया है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक ठेकेदार को निर्माण कार्य का कोई भुगतान नहीं किया गया है।
ग्राम प्रधान के अनुसार, अब निर्माण कार्य गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही पूरा कराया जाएगा।
बीडीओ ने दी जांच की जानकारी
खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) आशीष मिश्रा ने बताया कि मामले की जांच कनिष्ठ अभियंता (जेई) से कराई गई।
जांच रिपोर्ट में निर्माणाधीन कक्ष की स्लैब निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। अधिकारियों के अनुसार, मानकों के विपरीत सामग्री या निर्माण प्रक्रिया के कारण छत में दरार आई।
उन्होंने बताया कि संबंधित स्लैब को तत्काल हटाने और नए सिरे से गुणवत्तापूर्ण निर्माण कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं निर्माण संबंधी मामले
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला अवसर नहीं है जब बिधनू ब्लॉक में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हों।
इससे पहले रामखेड़ा स्थित आरआरसी सेंटर के निर्माण में भी अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। ऐसे मामलों के दोबारा सामने आने से निगरानी व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां अलग हो सकती हैं, इसलिए संबंधित विभाग प्रत्येक शिकायत की अलग-अलग जांच कर रहा है।
गुणवत्ता नियंत्रण क्यों है आवश्यक?
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी भवनों का निर्माण केवल समय पर पूरा करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
विशेष रूप से आंगनबाड़ी केंद्र जैसे भवनों में छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का नियमित आवागमन रहता है। इसलिए निर्माण सामग्री, डिजाइन, तकनीकी मानकों और सुरक्षा संबंधी सभी नियमों का पालन आवश्यक माना जाता है।
समय-समय पर निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण से संभावित कमियों की पहचान प्रारंभिक चरण में ही की जा सकती है।
समय पर निरीक्षण से बढ़ेगी पारदर्शिता
निर्माण विशेषज्ञों के अनुसार यदि निर्माण कार्य के प्रत्येक चरण का नियमित निरीक्षण किया जाए, तो अधिकांश तकनीकी कमियों को समय रहते दूर किया जा सकता है।
इसके अलावा कार्य पूर्ण होने से पहले गुणवत्ता परीक्षण, सामग्री की जांच और तकनीकी सत्यापन जैसी प्रक्रियाएं सार्वजनिक परियोजनाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रशासन ने गुणवत्तापूर्ण निर्माण का दिया आश्वासन
प्रशासन का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जा रही है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भवन पूरी गुणवत्ता के साथ तैयार हो।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने से पहले सभी आवश्यक तकनीकी मानकों का पुनः परीक्षण कराया जाएगा, ताकि भवन सुरक्षित और उपयोग योग्य हो।
बिधनू ब्लॉक के सपई गांव में निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्र की छत में आई तकनीकी खामी ने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि समय रहते समस्या सामने आने के कारण प्रशासन ने संबंधित स्लैब को हटाकर दोबारा निर्माण कराने के निर्देश दे दिए हैं। ग्राम प्रधान और बीडीओ दोनों ने गुणवत्तापूर्ण निर्माण का भरोसा दिलाया है।
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि पुनर्निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार पूरा हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। नियमित निरीक्षण, पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण से ही सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य सफलतापूर्वक पूरा किया जा सकता है।

