घाटमपुर की वैभव फ्लोर मिल पर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई, अनियमितताओं पर 4,300 किलो आटा सीज
रिपोर्ट – शुभम साहू
कानपुर: खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित खाद्य सामग्री पहुंचाने के उद्देश्य से खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) द्वारा लगातार निरीक्षण अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र में स्थित एक फ्लोर मिल पर विभागीय टीम ने विस्तृत जांच की। निरीक्षण के दौरान पैकेजिंग, भंडारण और अभिलेखों से संबंधित कई अनियमितताएं सामने आने पर अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए आटे के तीन नमूने जांच के लिए संग्रहित किए और बड़ी मात्रा में तैयार आटा सीज कर दिया।
विभाग का कहना है कि नमूनों की प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है, तो संबंधित फर्म के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
गुणवत्ता जांच अभियान के तहत की गई कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा जिले में समय-समय पर खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया जाता है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध खाद्य सामग्री गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो।
इसी क्रम में विभाग की टीम ने जहानाबाद रोड स्थित गोपालपुर में संचालित वैभव फ्लोर मिल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मिल परिसर में पैकेजिंग, भंडारण व्यवस्था, रिकॉर्ड प्रबंधन तथा तैयार उत्पादों की स्थिति का बारीकी से परीक्षण किया।
पैकेजिंग में मिली महत्वपूर्ण कमियां
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि मिल में 50 किलोग्राम, 10 किलोग्राम और 5 किलोग्राम क्षमता वाले विभिन्न ब्रांडों के आटे के पैकेट तैयार रखे गए थे।
जांच में यह सामने आया कि पैकेटों पर वजन तथा “बेस्ट बिफोर” संबंधी जानकारी अंकित थी, लेकिन कई पैकेटों पर बैच नंबर और निर्माण तिथि (Manufacturing Date) का उल्लेख नहीं किया गया था।
खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी भी पैकेज्ड खाद्य उत्पाद पर बैच नंबर, निर्माण तिथि, पैकिंग विवरण और अन्य आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित होना आवश्यक होता है। इससे उत्पाद की पहचान और ट्रेसिंग में सुविधा रहती है। ऐसे में इन जानकारियों का अभाव विभाग की नजर में एक महत्वपूर्ण अनियमितता माना गया।
अभिलेख और स्टॉक रजिस्टर प्रस्तुत नहीं कर सके संचालक
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मिल संचालक से कच्चे माल, तैयार उत्पाद और स्टॉक से संबंधित दस्तावेज भी मांगे।
हालांकि जांच के समय मिल प्रबंधन आवश्यक अभिलेख और स्टॉक रजिस्टर प्रस्तुत नहीं कर सका। अधिकारियों के अनुसार खाद्य निर्माण इकाइयों में रिकॉर्ड का व्यवस्थित रख-रखाव अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि इससे उत्पाद की खरीद, उत्पादन और वितरण की जानकारी का सत्यापन किया जा सकता है।
इसके अतिरिक्त अभिलेखों की अनुपलब्धता से निरीक्षण प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
भंडारण व्यवस्था पर भी उठे सवाल
निरीक्षण के दौरान एक अन्य महत्वपूर्ण कमी तैयार आटे के भंडारण में सामने आई।
अधिकारियों ने पाया कि तैयार आटे के पैकेट सीधे जमीन पर दीवार से सटाकर रखे गए थे। विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार का भंडारण खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं माना जाता।
दरअसल, जमीन से सीधे संपर्क में रखे गए खाद्य उत्पादों में नमी आने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा स्वच्छता संबंधी जोखिम भी उत्पन्न हो सकते हैं। यही कारण है कि खाद्य पदार्थों को निर्धारित मानकों के अनुसार प्लेटफॉर्म या पैलेट पर सुरक्षित तरीके से रखने की सलाह दी जाती है।
तीन नमूने जांच के लिए किए गए संग्रहित
निरीक्षण के दौरान गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने आटे के तीन नमूने संग्रहित किए।
इन नमूनों को आगे की वैज्ञानिक जांच के लिए अधिकृत प्रयोगशाला भेजा जाएगा। प्रयोगशाला में उत्पाद की गुणवत्ता, शुद्धता तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होने की विस्तृत जांच की जाएगी।
रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उत्पाद निर्धारित मानकों पर खरा उतरता है या नहीं।
4,300 किलोग्राम तैयार आटा किया गया सीज
निरीक्षण के दौरान विभाग ने बड़ी मात्रा में तैयार आटा भी सीज किया।
अधिकारियों के अनुसार सीज किए गए स्टॉक में—
- लगभग 3,000 किलोग्राम (50 किलोग्राम वाले पैक)
अनुमानित मूल्य: ₹90,000 - लगभग 750 किलोग्राम (10 किलोग्राम वाले पैक)
अनुमानित मूल्य: ₹22,500 - लगभग 550 किलोग्राम (5 किलोग्राम वाले पैक)
अनुमानित मूल्य: ₹16,500
इस प्रकार कुल लगभग 4,300 किलोग्राम तैयार आटा, जिसकी अनुमानित कीमत 1.29 लाख रुपये से अधिक है, विभाग द्वारा सीज किया गया।
जांच रिपोर्ट के बाद होगी आगे की कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह कार्रवाई निरीक्षण के दौरान पाई गई अनियमितताओं और गुणवत्ता संबंधी संदेह के आधार पर की गई है।
अब संग्रहित नमूनों की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित की जाएगी। यदि प्रयोगशाला रिपोर्ट में उत्पाद निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो संबंधित फर्म के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत विधिक कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि विभाग का उद्देश्य व्यापारियों को अनावश्यक परेशानी देना नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं तक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना है।
इसी कारण समय-समय पर खाद्य प्रतिष्ठानों, निर्माण इकाइयों, गोदामों और विक्रेताओं का निरीक्षण किया जाता है। इससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सकता है।
नियमों के पालन से बढ़ेगा उपभोक्ताओं का विश्वास
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य उद्योग से जुड़े सभी प्रतिष्ठानों को पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और रिकॉर्ड प्रबंधन संबंधी नियमों का पूरी तरह पालन करना चाहिए।
सही जानकारी वाले पैकेट, स्वच्छ भंडारण व्यवस्था और व्यवस्थित अभिलेख न केवल कानूनी आवश्यकताएं हैं, बल्कि इससे उपभोक्ताओं का विश्वास भी मजबूत होता है। साथ ही किसी भी उत्पाद की गुणवत्ता संबंधी शिकायत आने पर उसकी जांच और ट्रेसिंग भी आसानी से की जा सकती है।
घाटमपुर स्थित वैभव फ्लोर मिल पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई खाद्य गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। निरीक्षण के दौरान पैकेजिंग, भंडारण और अभिलेखों में मिली अनियमितताओं के आधार पर विभाग ने तीन नमूने जांच के लिए संग्रहित किए और लगभग 4,300 किलोग्राम तैयार आटा सीज कर दिया। अब सभी की नजर प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट पर रहेगी, जिसके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई तय की जाएगी। इस प्रकार की नियमित जांच से खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित होने के साथ-साथ उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत होगा।

