बिजनौर में नहटौर पुलिस की सराहनीय कार्य: जत्थे से बिछड़ी 12 वर्षीय कांवड़िया बालिका को एक घंटे में परिजनों से मिलाया
रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा
बिजनौर: उत्तर प्रदेश में सावन मास के दौरान कांवड़ यात्रा श्रद्धा, आस्था और अनुशासन का प्रतीक मानी जाती है। लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थलों से पवित्र गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ जाती है। इसी क्रम में बिजनौर जिले के नहटौर क्षेत्र से मानवता और संवेदनशील पुलिसिंग का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां पुलिस की त्वरित कार्रवाई से जत्थे से बिछड़ी एक 12 वर्षीय कांवड़िया बालिका को सुरक्षित उसके परिजनों से मिला दिया गया।
इस सराहनीय कार्य के बाद न केवल बालिका के परिजनों ने राहत की सांस ली, बल्कि कांवड़ यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने भी नहटौर पुलिस की तत्परता और जिम्मेदारी की खुले दिल से प्रशंसा की।
हरिद्वार से लौटते समय जत्थे से बिछड़ गई थी बालिका
जानकारी के अनुसार, संभल जनपद की रहने वाली 12 वर्षीय बालिका अपने परिजनों और कांवड़ियों के जत्थे के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर वापस लौट रही थी। यात्रा के दौरान किसी कारणवश वह अपने जत्थे से अलग हो गई।
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होने के कारण बालिका अपने परिवार का पता नहीं लगा सकी। स्वाभाविक रूप से वह घबरा गई, लेकिन सौभाग्य से उसे नहटौर-हल्दौर चौराहे पर स्थापित पुलिस सहायता केंद्र दिखाई दिया, जहां तैनात पुलिसकर्मियों ने तुरंत उसकी सहायता की।
पुलिस सहायता केंद्र पर शुरू हुई त्वरित कार्रवाई
जैसे ही पुलिसकर्मियों को बालिका के अकेले होने की जानकारी मिली, उन्होंने बिना समय गंवाए उससे बातचीत कर आवश्यक जानकारी जुटाई। ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक (एसआई) दीपक और अन्य पुलिसकर्मियों ने पूरी संवेदनशीलता के साथ बालिका को सुरक्षित स्थान पर बैठाया और उसे भरोसा दिलाया कि जल्द ही उसे उसके परिजनों से मिला दिया जाएगा।
इसके बाद पुलिस टीम ने बालिका द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर उसके परिवार और संबंधित कांवड़ जत्थे से संपर्क स्थापित करने का प्रयास शुरू किया।
एक घंटे के भीतर परिजनों से कराया मिलन
नहटौर पुलिस की सक्रियता का सकारात्मक परिणाम जल्द ही सामने आया। लगातार प्रयासों के बाद पुलिस ने बालिका के परिजनों से संपर्क स्थापित कर लिया। इसके बाद परिजनों को पुलिस सहायता केंद्र बुलाया गया।
करीब एक घंटे के भीतर बालिका को सुरक्षित उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। जैसे ही परिजनों ने अपनी बच्ची को सुरक्षित देखा, उनके चेहरे पर खुशी और राहत साफ दिखाई दी। उन्होंने पुलिस टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर मिली सहायता उनके लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं थी।
एसआई दीपक की भूमिका रही महत्वपूर्ण
पूरे घटनाक्रम में उपनिरीक्षक दीपक की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। उन्होंने न केवल तत्काल स्थिति को समझा, बल्कि बिना किसी देरी के आवश्यक कदम उठाते हुए बालिका की सुरक्षा सुनिश्चित की।
इसके साथ ही ड्यूटी पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने भी समन्वय के साथ कार्य किया। उनकी सजगता और संवेदनशील व्यवहार के कारण बालिका को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
कांवड़ियों और स्थानीय लोगों ने की प्रशंसा
बालिका के सुरक्षित परिजनों से मिलने के बाद वहां मौजूद कांवड़ियों और स्थानीय नागरिकों ने नहटौर पुलिस की कार्यशैली की सराहना की। लोगों का कहना था कि कांवड़ यात्रा जैसे विशाल आयोजन में पुलिस केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए भी पूरी तत्परता से कार्य करती है।
श्रद्धालुओं ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं पुलिस और आम नागरिकों के बीच विश्वास को और मजबूत बनाती हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस की विशेष व्यवस्था
सावन माह में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है। प्रमुख मार्गों, चौराहों और विश्राम स्थलों पर पुलिस सहायता केंद्र स्थापित किए जाते हैं, ताकि किसी भी श्रद्धालु को आवश्यकता पड़ने पर तत्काल मदद मिल सके।
इसके अतिरिक्त पुलिस लगातार गश्त करती है, यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखती है तथा लाउडस्पीकर और सूचना केंद्रों के माध्यम से आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराती है।
सहायता केंद्र निभा रहे महत्वपूर्ण भूमिका
नहटौर-हल्दौर चौराहे पर स्थापित पुलिस सहायता केंद्र ने इस घटना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे सहायता केंद्रों का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को हर संभव सहायता उपलब्ध कराना भी है।
यदि कोई व्यक्ति अपने परिजनों से बिछड़ जाए, स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो या किसी अन्य प्रकार की सहायता की आवश्यकता पड़े, तो पुलिस सहायता केंद्र तत्काल कार्रवाई करते हैं। इस घटना ने इन केंद्रों की उपयोगिता को एक बार फिर साबित किया है।
सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण
पुलिस की भूमिका केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं होती। समाज में विश्वास कायम करना, नागरिकों की सहायता करना और कठिन परिस्थितियों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
नहटौर पुलिस ने जिस प्रकार त्वरित कार्रवाई करते हुए एक नाबालिग बालिका को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाया, वह सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय दृष्टिकोण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
बिजनौर के नहटौर क्षेत्र में पुलिस द्वारा किया गया यह कार्य संवेदनशील और जनहितकारी पुलिसिंग की मिसाल है। हरिद्वार से लौट रही संभल निवासी 12 वर्षीय कांवड़िया बालिका के जत्थे से बिछड़ने के बाद नहटौर पुलिस ने तत्परता, धैर्य और मानवीय व्यवहार का परिचय देते हुए उसे मात्र एक घंटे के भीतर उसके परिजनों से सुरक्षित मिला दिया। इस सराहनीय पहल से न केवल एक परिवार को राहत मिली, बल्कि कांवड़ यात्रा में शामिल हजारों श्रद्धालुओं के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विश्वास भी मजबूत हुआ। भविष्य में भी इस प्रकार की संवेदनशील और जिम्मेदार पुलिसिंग समाज के लिए प्रेरणादायक बनी रहेगी।

