बरेली में ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने जारी किया ‘मुस्लिम एजेंडा 2027’, पैगंबर इस्लाम पर कानून सहित कई प्रस्ताव

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Digital UP News Desk

बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली में आयोजित उर्स-ए-आला हजरत के अवसर पर ऑल इंडिया मुस्लिम जमात की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने की। इस दौरान संगठन ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए ‘मुस्लिम एजेंडा 2027’ जारी किया। इस एजेंडे में धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक और सामुदायिक मुद्दों से जुड़े कई प्रस्ताव शामिल किए गए।

बैठक में देश और विदेश से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। संगठन ने विशेष रूप से पैगंबर इस्लाम के सम्मान से जुड़े मामलों में कानून बनाने की मांग उठाई। इसके अलावा वक्फ संपत्तियों, शिक्षा, सामाजिक सुधार, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और मुस्लिम समाज के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

‘मुस्लिम एजेंडा 2027’ में क्या हैं प्रमुख मांगें

बैठक में जारी एजेंडे के अनुसार, संगठन ने पैगंबर इस्लाम के सम्मान से जुड़े मामलों में विशेष कानून बनाने की मांग को प्राथमिकता दी। मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा कि संगठन इस विषय को महत्वपूर्ण मानता है और आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की अपील करेगा।

उन्होंने कहा कि संगठन चाहता है कि इस विषय पर स्पष्ट कानूनी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान उम्मीदवारों से इस संबंध में समर्थन का आश्वासन लेने का प्रयास किया जाएगा।

2027 विधानसभा चुनाव के संदर्भ में रणनीति

बैठक में आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा हुई। संगठन का कहना है कि मुस्लिम समाज से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया जाएगा।

इसी क्रम में संगठन ने कहा कि चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों से उनके रुख के बारे में जानकारी ली जाएगी और समुदाय के महत्वपूर्ण मुद्दों पर समर्थन की अपेक्षा की जाएगी।

हालांकि, संगठन ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से अपनी बात रखने की बात भी दोहराई।

वक्फ संपत्तियों की जांच की मांग

बैठक में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन ने आरोप लगाया कि वक्फ की कई संपत्तियों के प्रबंधन और आय को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।

मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने मांग की कि यदि कहीं भी वित्तीय अनियमितताओं या घोटालों के आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों से प्राप्त आय का उपयोग गरीब और जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए।

मस्जिदों से जुड़े मामलों पर भी रखी राय

बैठक में ज्ञानवापी, मथुरा स्थित शाही ईदगाह और संभल की जामा मस्जिद से जुड़े न्यायालयों में लंबित मामलों का भी उल्लेख किया गया।

संगठन ने इन मामलों पर अपना पक्ष रखते हुए संबंधित पक्षों से न्यायिक प्रक्रिया और आपसी संवाद के माध्यम से समाधान तलाशने की अपील की। साथ ही यह भी कहा कि सभी पक्षों को कानून और संविधान के दायरे में रहकर आगे बढ़ना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी पारित हुए प्रस्ताव

राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर भी चर्चा की गई। संगठन ने ईरान से जुड़े हालिया घटनाक्रम पर चिंता व्यक्त की तथा पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

इसके साथ ही मस्जिद-ए-अक्सा के संरक्षण और क्षेत्रीय शांति बनाए रखने के लिए मुस्लिम देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की अपील भी की गई। संगठन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से होना चाहिए।

शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर

बैठक में केवल धार्मिक और राजनीतिक विषयों पर ही नहीं बल्कि सामाजिक विकास के मुद्दों पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

संगठन ने मुस्लिम समाज से आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, स्वरोजगार और व्यापार को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की प्रगति शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता से ही संभव है।

इसके अलावा युवाओं को कौशल विकास कार्यक्रमों से जोड़ने और रोजगार के नए अवसर तलाशने पर भी बल दिया गया।

सामाजिक सुधारों को बताया समय की जरूरत

बैठक के दौरान सामाजिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए।

संगठन ने शादियों में होने वाली फिजूलखर्ची कम करने, दहेज प्रथा को समाप्त करने और सादगीपूर्ण विवाह को बढ़ावा देने की अपील की।

साथ ही अभिभावकों से आग्रह किया गया कि वे अपने बच्चों को नशे, जुए और अन्य सामाजिक बुराइयों से दूर रखें तथा उनके नैतिक और शैक्षणिक विकास पर विशेष ध्यान दें।

समाज में भाईचारे और संवाद का संदेश

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि समाज में आपसी सौहार्द, भाईचारा और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सभी समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने और सामाजिक समरसता बनाए रखने पर जोर दिया।

संगठन का कहना है कि देश के विकास में सभी समुदायों की समान भागीदारी जरूरी है और सामाजिक सद्भाव लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का आधार है।

आगे की रणनीति पर नजर

‘मुस्लिम एजेंडा 2027’ जारी होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दल और उम्मीदवार इन मुद्दों पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल यह एजेंडा संगठन की ओर से प्रस्तुत प्रस्तावों और मांगों का दस्तावेज है।

वहीं, जिन मुद्दों पर न्यायालयों में मामले लंबित हैं या जिनके लिए विधायी प्रक्रिया की आवश्यकता होगी, उन पर आगे की कार्रवाई संविधान, कानून और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुसार ही संभव होगी।

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