बांदा में बिजली उपभोक्ताओं के बढ़े लोड का विरोध, मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर राहत की मांग
रिपोर्ट- पंकज त्रिपाठी
बांदा। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा कथित रूप से लाखों बिजली उपभोक्ताओं का स्वीकृत विद्युत लोड बिना पूर्व अनुमति बढ़ाए जाने के विरोध में बांदा में सद्भावना विकास मंच ने आवाज बुलंद की है। संगठन के जिलाध्यक्ष प्रमोद राजा के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपते हुए इस निर्णय को आम उपभोक्ताओं के हितों के विरुद्ध बताया। साथ ही, बढ़ाए गए लोड को तत्काल निरस्त करने तथा प्रदेशभर के प्रभावित उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने की मांग की गई।
संगठन का कहना है कि यदि किसी उपभोक्ता के बिजली कनेक्शन से संबंधित लोड में बदलाव किया जाना था, तो इसके लिए पहले उसकी सहमति लेना आवश्यक था। बिना सूचना और अनुमति लोड बढ़ाने से न केवल उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी हुई है, बल्कि उन्हें अतिरिक्त फिक्स चार्ज का भी भुगतान करना पड़ रहा है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
बिजली बिलों में बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता
ज्ञापन में कहा गया कि हाल के समय में अनेक उपभोक्ताओं ने अपने बिजली बिलों में अप्रत्याशित वृद्धि की शिकायत की है। संगठन के अनुसार, इसकी एक प्रमुख वजह स्वीकृत विद्युत लोड में किया गया बदलाव है। लोड बढ़ने के कारण मासिक फिक्स चार्ज स्वतः बढ़ गया, जिसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है।
इसके अतिरिक्त, संगठन का दावा है कि जिन परिवारों को पहले बिजली सब्सिडी का लाभ मिल रहा था, उनमें से कई अब बढ़े हुए लोड के कारण निर्धारित पात्रता से बाहर हो गए हैं। परिणामस्वरूप, ऐसे उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ रहा है।
गरीब और मध्यम वर्ग पर बढ़ा आर्थिक दबाव
सद्भावना विकास मंच का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच बिजली का अतिरिक्त आर्थिक बोझ आम नागरिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। विशेष रूप से गरीब, निम्न आय वर्ग और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बिजली का बढ़ा हुआ खर्च घरेलू बजट को प्रभावित कर रहा है।
संगठन का मानना है कि सरकार और बिजली विभाग को ऐसे निर्णय लेने से पहले उपभोक्ताओं के हितों, उनकी आर्थिक स्थिति तथा संभावित प्रभावों का समुचित आकलन करना चाहिए। यदि किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से लोड संशोधित करना आवश्यक हो, तो इसकी स्पष्ट जानकारी उपभोक्ताओं को पहले दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन
जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की गई कि प्रदेशभर में जिन बिजली उपभोक्ताओं का स्वीकृत लोड बिना अनुमति बढ़ाया गया है, उसकी जांच कराई जाए। साथ ही, यदि उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ऐसा किया गया है तो बढ़ाया गया लोड तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
संगठन ने यह भी मांग रखी कि जिन उपभोक्ताओं को इस प्रक्रिया के कारण अतिरिक्त बिजली बिल या फिक्स चार्ज का भुगतान करना पड़ा है, उन्हें उचित राहत प्रदान की जाए। इसके अलावा, भविष्य में इस प्रकार की कार्रवाई करने से पहले उपभोक्ताओं की लिखित सहमति सुनिश्चित करने की व्यवस्था लागू की जाए।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उपभोक्ताओं को उनके कनेक्शन, लोड, बिलिंग और शुल्क से संबंधित प्रत्येक बदलाव की समय पर जानकारी मिलनी चाहिए। इससे अनावश्यक विवादों और शिकायतों से बचा जा सकता है।
संगठन के अनुसार, डिजिटल युग में बिजली विभाग के पास उपभोक्ताओं को एसएमएस, ई-मेल अथवा मोबाइल एप के माध्यम से सूचना देने की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में किसी भी परिवर्तन की जानकारी पहले से देना विभाग की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उपभोक्ता हितों की रक्षा की मांग
सद्भावना विकास मंच ने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा करना सरकार और संबंधित विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि बिना अनुमति लोड बढ़ाने जैसी शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो इससे उपभोक्ताओं का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
संगठन ने प्रदेश सरकार से अपील की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, ऐसी नीति बनाई जाए जिससे भविष्य में किसी भी उपभोक्ता के विद्युत कनेक्शन में बदलाव उसकी जानकारी और सहमति के बिना न किया जा सके।
प्रशासन से सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद
ज्ञापन सौंपने के बाद संगठन के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार तक पहुंचाएगा। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित निर्णय लिया जाता है, तो लाखों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के वैध अधिकारों की रक्षा और जनहित के मुद्दे को सरकार तक पहुंचाना है। यदि आवश्यक हुआ तो भविष्य में भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को उठाया जाएगा।
बिजली उपभोक्ताओं से जुड़े इस मुद्दे ने प्रदेश में उपभोक्ता अधिकारों और बिजली बिलों की पारदर्शिता पर नई चर्चा शुरू कर दी है। यदि बिना अनुमति स्वीकृत लोड बढ़ाने के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह लाखों उपभोक्ताओं के आर्थिक हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। फिलहाल, सद्भावना विकास मंच ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर बढ़ाया गया लोड निरस्त करने, अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम करने तथा प्रभावित उपभोक्ताओं को राहत देने की मांग की है। अब सभी की निगाहें सरकार और बिजली विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

