तरुण तेजपाल रेप केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया, 10 साल की सजा-ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: पत्रकारिता जगत से जुड़े बहुचर्चित तरुण तेजपाल रेप केस में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तहलका मैगजीन के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है और दो सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वर्ष 2021 में गोवा की ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए तेजपाल को बरी कर दिया था। हालांकि, गोवा सरकार ने उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद अब उच्च न्यायालय ने निचली अदालत का निर्णय पलट दिया।
यह मामला वर्ष 2013 में सामने आया था और तब से लगातार न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बना रहा। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।
2013 में सामने आया था मामला
यह पूरा मामला नवंबर 2013 का है। आरोपों के अनुसार, गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तहलका की एक महिला पत्रकार ने शिकायत की थी कि 7 और 8 नवंबर की रात होटल की लिफ्ट में तरुण तेजपाल ने उनके साथ दो अलग-अलग मौकों पर यौन उत्पीड़न किया।
घटना के बाद महिला पत्रकार ने सबसे पहले संस्थान की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को ई-मेल के माध्यम से शिकायत भेजी। शिकायत में उन्होंने लिखित माफी, पूरे स्टाफ के सामने घटना स्वीकार करने और संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) गठित करने जैसी मांगें रखी थीं।
हालांकि, मामला सार्वजनिक होने के बाद गोवा पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में जुटाए गए कई महत्वपूर्ण साक्ष्य
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच की। इस दौरान होटल के सीसीटीवी फुटेज, ई-मेल संवाद, गवाहों के बयान और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को एकत्र किया गया।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया और तरुण तेजपाल की गिरफ्तारी भी हुई। इसके बाद मामला गोवा की ट्रायल कोर्ट में चला, जहां कई वर्षों तक सुनवाई हुई।
2021 में ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी
करीब साढ़े सात वर्षों तक चली सुनवाई के बाद 21 मई 2021 को गोवा की ट्रायल कोर्ट ने तरुण तेजपाल को सभी आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत का कहना था कि अभियोजन पक्ष अपराध को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका।
इस फैसले के बाद गोवा सरकार ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। राज्य सरकार का तर्क था कि ट्रायल कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन नहीं किया और पीड़िता की गवाही को सही कानूनी दृष्टिकोण से नहीं परखा।
हाईकोर्ट ने क्यों पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने अपने निर्णय में कहा कि ट्रायल कोर्ट ने मामले में उपलब्ध महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अपेक्षा घटना के बाद शिकायतकर्ता के व्यवहार पर अधिक जोर दिया। अदालत ने यह भी माना कि मामले से जुड़े कुछ अहम दस्तावेजों, विशेष रूप से माफी से संबंधित ई-मेल, को अपेक्षित महत्व नहीं दिया गया।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को निरस्त करते हुए तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
हालांकि, फैसले की विस्तृत प्रति अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हुई है। इसलिए अदालत की विस्तृत कानूनी दलीलों की प्रतीक्षा की जा रही है।
किन धाराओं में दोषी ठहराया गया
हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी माना है।
ये धाराएं गंभीर यौन अपराधों तथा महिला की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े अपराधों से संबंधित हैं। विस्तृत निर्णय उपलब्ध होने के बाद प्रत्येक धारा के संबंध में अदालत की कानूनी व्याख्या और स्पष्ट हो सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
फैसले के बाद तरुण तेजपाल ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और वे इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से वे इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और ट्रायल कोर्ट ने उन्हें पहले बरी किया था। उन्होंने यह भी कहा कि वे सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष और उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनकी आयु 62 वर्ष है और उनके विरुद्ध कोई अन्य आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
पत्रकारिता जगत में अहम पहचान
तरुण तेजपाल भारतीय पत्रकारिता के चर्चित नामों में रहे हैं। उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक पत्रकारिता और प्रकाशन के क्षेत्र में काम किया।
उन्होंने अपनी प्रकाशन कंपनी इंडिया इंक की स्थापना की थी। इसी कंपनी ने वर्ष 1998 में अरुंधति रॉय के चर्चित उपन्यास The God of Small Things का भारतीय संस्करण प्रकाशित किया था, जिसे बाद में बुकर पुरस्कार मिला।
इसके अतिरिक्त उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकार अनिरुद्ध बहल के साथ मिलकर ऑनलाइन खोजी समाचार मंच तहलका डॉट कॉम की शुरुआत की। बाद में इसे टैब्लॉयड और फिर समाचार पत्रिका के रूप में विकसित किया गया। एक समय तहलका खोजी पत्रकारिता के लिए व्यापक रूप से चर्चित रहा।
फैसले का व्यापक महत्व
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी उदाहरण है कि अपीलीय अदालतें निचली अदालतों के फैसलों की समीक्षा करते हुए उपलब्ध साक्ष्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन कर सकती हैं।
साथ ही, यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में अपील व्यवस्था के महत्व को भी रेखांकित करता है। हालांकि, भारतीय न्याय प्रणाली के अनुसार किसी भी आरोपी को सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार प्राप्त है। इसलिए इस मामले की अंतिम कानूनी स्थिति सुप्रीम कोर्ट की आगामी कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यदि इस अवधि के दौरान उन्हें सर्वोच्च न्यायालय से कोई अंतरिम राहत नहीं मिलती, तो उन्हें सजा का पालन करना होगा।
दूसरी ओर, यदि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर सुनवाई के दौरान कोई अंतरिम आदेश जारी करता है, तो आगे की प्रक्रिया उसी के अनुरूप तय होगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले की न्यायिक कार्यवाही पर देशभर की नजर बनी रहेगी।

