एटा में ट्रॉली पर रखे ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से 10 वर्षीय बालक की मौत, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
रिपोर्ट – नन्द कुमार
एटा: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक अत्यंत दुखद हादसे ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। कोतवाली नगर क्षेत्र के सुनहरी नगर में ट्रॉली पर रखे अस्थायी विद्युत ट्रांसफार्मर में करंट आने से 10 वर्षीय बालक की जान चली गई। यह घटना उस समय हुई जब मासूम अपने छोटे भाई को ट्यूशन छोड़कर घर लौट रहा था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्थायी ट्रांसफार्मर लंबे समय से उसी स्थान पर रखा था और इसकी जानकारी कई बार संबंधित विभाग को दी गई थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई।
घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। वहीं स्थानीय नागरिकों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
घर लौटते समय हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, सुनहरी नगर निवासी 10 वर्षीय आरुष, पुत्र राजीव यादव, मंगलवार को अपने छोटे भाई रिहांश को ट्यूशन छोड़ने गया था। भाई को ट्यूशन छोड़ने के बाद वह अकेले घर लौट रहा था। इसी दौरान पार्क के पास सड़क किनारे ट्रॉली पर रखे अस्थायी ट्रांसफार्मर के संपर्क में आने से वह करंट की चपेट में आ गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रांसफार्मर से जुड़े ढांचे में करंट प्रवाहित हो रहा था। जैसे ही बालक का संपर्क उससे हुआ, वह वहीं फंस गया। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों ने स्थिति को समझने का प्रयास किया, लेकिन विद्युत प्रवाह होने के कारण तत्काल बचाव संभव नहीं हो सका।
बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद शुरू हुआ राहत कार्य
स्थानीय लोगों ने तुरंत विद्युत विभाग को सूचना देकर बिजली आपूर्ति बंद कराने का प्रयास किया। बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद लोगों ने बालक को सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल वीरांगना अवंती बाई मेडिकल कॉलेज, एटा की इमरजेंसी में पहुंचाया।
हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस खबर के बाद परिवार और मोहल्ले में शोक की लहर दौड़ गई।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
बालक की मृत्यु की सूचना मिलते ही परिवार का माहौल गमगीन हो गया। माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों के अनुसार, आरुष परिवार का होनहार और जिम्मेदार बच्चा था, जो प्रतिदिन अपने छोटे भाई को ट्यूशन छोड़ने और लाने में मदद करता था।
पड़ोसियों ने बताया कि परिवार साधारण जीवन व्यतीत करता है। बालक के पिता राजीव यादव एक निजी कूरियर कंपनी में कार्यरत हैं। घटना के बाद रिश्तेदार और आसपास के लोग परिवार को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने विभागीय लापरवाही का लगाया आरोप
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। लोगों का कहना है कि करीब चार महीने पहले क्षेत्र का स्थायी ट्रांसफार्मर खराब हो गया था। इसके बाद विभाग ने अस्थायी व्यवस्था के तहत ट्रॉली पर ट्रांसफार्मर रख दिया, लेकिन बाद में इसे स्थायी रूप से हटाने या सुरक्षित स्थान पर स्थापित करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय लोगों का दावा है कि इस संबंध में कई बार शिकायत भी की गई, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कार्रवाई होती तो यह दुर्घटना टाली जा सकती थी।
सभासद ने भी उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
वार्ड के सभासद माधव यादव ने बताया कि लगभग डेढ़ महीने पहले ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद विभाग ने ट्रॉली पर अस्थायी ट्रांसफार्मर लगाया था। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया था।
उन्होंने कहा कि सड़क का एक बड़ा हिस्सा ट्रॉली पर रखे ट्रांसफार्मर ने घेर रखा था, जिससे लोगों को आवागमन में भी परेशानी होती थी। इसके बावजूद स्थायी समाधान नहीं किया गया।
प्रत्यक्षदर्शी ने बताया पूरा घटनाक्रम
घटना के समय मौके पर पहुंचे पड़ोसी गौरव गुप्ता ने बताया कि वह रास्ते से गुजर रहे थे, तभी उन्होंने देखा कि बालक ट्रांसफार्मर के पास अचेत अवस्था में पड़ा है। स्थिति को देखते हुए उन्होंने तत्काल विद्युत विभाग को फोन कर बिजली आपूर्ति बंद करवाई।
इसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से बच्चे को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे बचाया नहीं जा सका। गौरव ने बताया कि जिस स्थान पर ट्रांसफार्मर रखा गया था, वहां पर्याप्त सुरक्षा घेरा भी नहीं था।
सुरक्षा मानकों पर फिर उठे प्रश्न
यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित विद्युत उपकरणों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अस्थायी विद्युत व्यवस्थाओं के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन आवश्यक होता है। यदि ट्रांसफार्मर या अन्य विद्युत उपकरण खुले स्थान पर लगाए जाएं तो उनके चारों ओर पर्याप्त सुरक्षा बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और नियमित निरीक्षण अनिवार्य होना चाहिए।
विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि मानसून के दौरान विद्युत उपकरणों के आसपास अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है, क्योंकि नमी और जलभराव जैसी परिस्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी मांग उठी है कि जिले में ऐसे सभी अस्थायी ट्रांसफार्मरों और विद्युत व्यवस्थाओं का तत्काल निरीक्षण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी दुखद स्थिति का सामना न करना पड़े।
लोगों का कहना है कि सार्वजनिक सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक लापरवाही से बचने के लिए नियमित निगरानी आवश्यक है।
सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता
यह घटना केवल एक परिवार का व्यक्तिगत दुख नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता भी दर्शाती है। समय पर निरीक्षण, शिकायतों का त्वरित निस्तारण और सुरक्षा मानकों का पालन ऐसी घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्थानीय लोग अब प्रशासन और संबंधित विभागों से अपेक्षा कर रहे हैं कि इस घटना की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

