कानपुर शिवाला में 166वीं श्रीमद्भागवत कथा शुरू, आचार्य योगेश जी महाराज ने बताए भक्ति और संस्कार के महत्व

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: शहर के ऐतिहासिक शिवाला स्थित महाराज प्रयाग नारायण मंदिर में परंपरागत रूप से आयोजित होने वाली 166वीं श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण के बीच हुआ। दक्षिण भारतीय शैली में स्थापित यह प्राचीन मंदिर लंबे समय से धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजनों का केंद्र रहा है।

कथा प्रारंभ होने से पहले श्रीमद्भागवत व्यासपीठ एवं विराजमान कथावाचक आचार्य योगेश जी महाराज का विधिवत पूजन और आरती मंदिर के संरक्षक विजया नारायण तिवारी ‘मुकुल’, अध्यक्ष अभिनव तिवारी एवं प्रबंधक राघव नारायण तिवारी द्वारा किया गया। इसके बाद भक्तों ने श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण किया।

श्रीमद्भागवत कथा जीवन को दिशा देने वाला मार्गदर्शक: आचार्य योगेश

कथा के प्रथम दिवस आचार्य योगेश जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्व का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत कथा केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को सही दिशा देने वाला आध्यात्मिक मार्गदर्शन है।

उन्होंने कहा कि भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा, भक्ति और समर्पण से मनुष्य अपने जीवन में आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त कर सकता है। श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान, वैराग्य और भक्ति को मजबूत करने का माध्यम है।

आचार्य जी ने कहा कि वर्तमान कलियुग में भगवान के नाम का स्मरण और सत्संग मनुष्य के जीवन को पवित्र बनाने के सरल साधन हैं। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा सभी लोगों के लिए समान रूप से सुलभ है और इसका लाभ हर वर्ग का व्यक्ति प्राप्त कर सकता है।

आत्मदेव ब्राह्मण की कथा का किया वर्णन

प्रथम दिवस की कथा में आचार्य योगेश जी महाराज ने आत्मदेव ब्राह्मण के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि आत्मदेव ब्राह्मण विद्वान और धार्मिक प्रवृत्ति के व्यक्ति थे, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

उन्होंने इस प्रसंग के माध्यम से संस्कारों के महत्व को समझाते हुए कहा कि परिवार में अच्छे संस्कारों का होना बेहद आवश्यक है। माता-पिता के संस्कार बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आचार्य जी ने कहा कि संस्कारवान संतति ही समाज और राष्ट्र के निर्माण में सकारात्मक योगदान देती है। इसलिए परिवारों में नैतिक मूल्यों, धर्म और अच्छे आचरण को बढ़ावा देना चाहिए।

राजा परीक्षित और शुकदेव जी के प्रसंग से दिया संदेश

कथा के दौरान आचार्य योगेश जी महाराज ने राजा परीक्षित और श्री शुकदेव जी के संवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान की शरण में जाने से मनुष्य के अंदर का भय समाप्त होता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं को सत्य, प्रेम, करुणा, सेवा और सद्गुणों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी। उनके अनुसार, आध्यात्मिक मार्ग पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को अधिक सार्थक और शांतिपूर्ण बना सकता है।

द्वितीय दिवस में भक्ति और सत्संग के महत्व पर प्रकाश

श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस भी मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया।

आचार्य योगेश जी महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन के वास्तविक उद्देश्य का ज्ञान कराती है। उन्होंने कहा कि भक्ति, सत्संग और अच्छे कर्मों के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।

उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य को कुछ समय भगवान के स्मरण, कथा श्रवण और सत्संग के लिए अवश्य निकालना चाहिए। इससे मानसिक शांति के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

कुंती माता के प्रसंग से समझाया भगवान के प्रति समर्पण

द्वितीय दिवस की कथा में आचार्य योगेश जी महाराज ने कुंती माता के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि कुंती माता भगवान के प्रति पूर्ण समर्पण और अटूट विश्वास का उदाहरण हैं।

आचार्य जी ने कहा कि सामान्य रूप से मनुष्य सुख की कामना करता है, लेकिन कुंती माता ने भगवान का निरंतर स्मरण बनाए रखने के लिए कठिन परिस्थितियों को भी स्वीकार किया।

उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, भगवान के प्रति विश्वास और सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए। कठिन समय भी मनुष्य को आत्मिक रूप से मजबूत बनाने का अवसर देता है।

परिवार में एकता और संस्कारों पर दिया जोर

कथा के दौरान आचार्य योगेश जी महाराज ने पारिवारिक जीवन को बेहतर बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश दिए।

उन्होंने कहा कि परिवार में आपसी सहयोग, प्रेम और सम्मान का वातावरण होना चाहिए। छोटी-छोटी बातों को प्रतिष्ठा का विषय बनाकर विवाद करने से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संगठित परिवार ही मजबूत समाज और राष्ट्र की नींव रखते हैं। इसलिए परिवार के प्रत्येक सदस्य को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए मिल-जुलकर रहना चाहिए।

आचार्य जी ने युवाओं और परिवारों से नैतिक मूल्यों को अपनाने तथा जीवन में सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

श्रद्धालुओं में दिखा उत्साह और भक्ति भाव

महाराज प्रयाग नारायण मंदिर शिवाला परिसर में आयोजित कथा में श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कथा के दौरान भक्ति गीतों और आध्यात्मिक संदेशों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

आयोजकों ने बताया कि आने वाले दिनों में भी श्रीमद्भागवत कथा के विभिन्न प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया जाएगा। भक्तों से नियमित रूप से कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने की अपील की गई।

प्रमुख रूप से रहे उपस्थित

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. पवन तिवारी, मनोज त्रिवेदी, राजेश त्रिवेदी, ओमप्रकाश गुप्ता, राजेंद्र शुक्ला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

166 वर्षों से चली आ रही यह धार्मिक परंपरा आज भी कानपुर में आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है।

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