शेरशाह सूरी की ग्रैंड ट्रंक रोड से NH-19 तक: जानिए कैसे ऐतिहासिक मार्ग बना आधुनिक भारत की विकास धारा

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

नई दिल्ली/कानपुर: भारत की सड़क विरासत में ग्रैंड ट्रंक रोड (Grand Trunk Road – GT Road) का नाम विशेष महत्व रखता है। लगभग 500 वर्ष पहले शेरशाह सूरी द्वारा विकसित यह ऐतिहासिक मार्ग उस समय व्यापार, प्रशासन, सैन्य आवागमन और सांस्कृतिक संपर्क का प्रमुख माध्यम था। समय के साथ यह सड़क बदलते भारत की जरूरतों के अनुरूप विकसित होती रही। आज इसका बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय राजमार्ग-19 (NH-19) के रूप में देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक कॉरिडोरों में शामिल है।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा इस मार्ग का निरंतर आधुनिकीकरण किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक, बेहतर सड़क सुरक्षा, चौड़ी लेन, फ्लाईओवर, अंडरपास और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन जैसी सुविधाओं ने इस ऐतिहासिक मार्ग को देश की आर्थिक प्रगति की महत्वपूर्ण धुरी बना दिया है। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश का कानपुर–प्रयागराज–वाराणसी कॉरिडोर इस विकास यात्रा का प्रमुख उदाहरण बनकर उभरा है।

शेरशाह सूरी ने रखी थी मजबूत आधारशिला

इतिहासकारों के अनुसार, 16वीं शताब्दी में शेरशाह सूरी ने प्रशासनिक दक्षता और व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्रैंड ट्रंक रोड का व्यापक विकास कराया था। इस सड़क का उद्देश्य केवल एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचना नहीं था, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों को आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से जोड़ना भी था।

उस समय सड़क के किनारे सराय, कुएं और विश्राम स्थलों की व्यवस्था भी कराई गई थी, ताकि व्यापारी, यात्री और सरकारी अधिकारी आसानी से लंबी यात्राएं कर सकें। इस दूरदर्शी सोच ने ग्रैंड ट्रंक रोड को अपने समय की सबसे महत्वपूर्ण सड़कों में शामिल कर दिया।

अंग्रेजी शासन में हुआ और विस्तार

बाद में ब्रिटिश शासन के दौरान इस ऐतिहासिक सड़क का और अधिक विस्तार किया गया। अंग्रेजों ने इसे प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत करने, सेना की तेज आवाजाही और माल परिवहन के लिए विकसित किया।

रेलवे के विस्तार से पहले ग्रैंड ट्रंक रोड उत्तर भारत की सबसे महत्वपूर्ण परिवहन धुरी मानी जाती थी। इसके माध्यम से विभिन्न प्रांतों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को गति मिली और प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूती मिली।

आजादी के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में शामिल

स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने देश के प्रमुख ऐतिहासिक मार्गों को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने का निर्णय लिया। इसी क्रम में ग्रैंड ट्रंक रोड के बड़े हिस्से को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में शामिल किया गया।

आज इसका प्रमुख भाग नेशनल हाईवे-19 (NH-19) के रूप में विकसित हो चुका है। यह राजमार्ग उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों को जोड़ता है। इसके माध्यम से पूर्वी भारत और उत्तर भारत के बीच बेहतर संपर्क स्थापित हुआ है।

NH-19 बना आर्थिक विकास का प्रमुख कॉरिडोर

वर्तमान समय में NH-19 केवल एक राष्ट्रीय राजमार्ग नहीं, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक गलियारों में से एक माना जाता है। उत्तर प्रदेश में कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी को जोड़ने वाला यह मार्ग औद्योगिक, कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा यह राजमार्ग आगे बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक पहुंचता है, जिससे पूर्वी भारत के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत सड़क नेटवर्क किसी भी क्षेत्र के आर्थिक विकास की आधारशिला होता है और NH-19 इस भूमिका को प्रभावी ढंग से निभा रहा है।

NHAI ने आधुनिक सुविधाओं से किया सुसज्जित

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने पिछले कुछ वर्षों में इस कॉरिडोर के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया है।

इसके अंतर्गत कई स्थानों पर सड़क को फोर लेन और सिक्स लेन में विकसित किया गया है। साथ ही फ्लाईओवर, अंडरपास, सर्विस रोड, आधुनिक टोल प्लाजा, हाई मास्ट लाइट, रिफ्लेक्टर, क्रैश बैरियर और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं।

इसके अतिरिक्त सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संकेतक बोर्ड, लेन मार्किंग, आपातकालीन सहायता प्रणाली और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था भी बनाई गई है। इन सुधारों के कारण यात्रा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक हुई है।

यात्रा समय में आई कमी

आधुनिक सड़क निर्माण और यातायात प्रबंधन के कारण कानपुर से प्रयागराज तथा प्रयागराज से वाराणसी के बीच यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम हुई है।

बेहतर सड़क गुणवत्ता और चौड़ी लेनों के कारण वाहनों की औसत गति में सुधार हुआ है। साथ ही जाम की समस्या भी कई स्थानों पर कम हुई है। इसका सीधा लाभ यात्रियों, व्यावसायिक वाहनों और सार्वजनिक परिवहन को मिला है।

किसानों और व्यापारियों को मिला लाभ

NH-19 के विकास का सबसे बड़ा लाभ किसानों और व्यापारियों को मिला है। पहले जहां कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाने में अधिक समय लगता था, वहीं अब परिवहन तेज और अपेक्षाकृत आसान हो गया है।

फल, सब्जियां, अनाज और अन्य कृषि उत्पाद कम समय में बाजार तक पहुंच रहे हैं, जिससे किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध हो रहा है। इसी प्रकार उद्योगों की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) भी मजबूत हुई है।

विशेष रूप से कानपुर, प्रयागराज और वाराणसी के औद्योगिक एवं व्यापारिक क्षेत्रों को इस कॉरिडोर से बेहतर कनेक्टिविटी प्राप्त हुई है।

क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिली नई गति

बेहतर सड़क संपर्क का सकारात्मक प्रभाव पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और निवेश पर भी देखने को मिला है। कई नए औद्योगिक और व्यावसायिक अवसर विकसित हुए हैं, जिससे स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिला है।

इसके अलावा सड़क किनारे होटल, रेस्टोरेंट, लॉजिस्टिक पार्क, वेयरहाउस और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि हुई है। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है।

विरासत और विकास का अनूठा संगम

ग्रैंड ट्रंक रोड केवल एक ऐतिहासिक सड़क नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। शेरशाह सूरी द्वारा शुरू की गई यह यात्रा आज आधुनिक भारत के बुनियादी ढांचे का अभिन्न अंग बन चुकी है।

NHAI द्वारा किए जा रहे आधुनिकीकरण ने इस ऐतिहासिक मार्ग को नई पहचान दी है। यह मार्ग आज “विरासत से विकास” की उस अवधारणा को साकार करता है, जिसमें इतिहास और आधुनिक तकनीक साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।

जानकारों का मानना है कि मजबूत सड़क नेटवर्क विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऐसे में NH-19 जैसे आधुनिक कॉरिडोर न केवल आर्थिक विकास को गति दे रहे हैं, बल्कि देश की कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं।

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