2019 से 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए, प्रत्यर्पण अभियान को मिला मिशन मोड का स्वरूप
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दावा किया है कि वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है।
सरकार के अनुसार, यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में संचालित एक व्यापक रणनीति का परिणाम है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक तकनीक और विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों के समन्वित प्रयासों को प्रमुख आधार बनाया गया।
प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, सरकार ने भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण को राष्ट्रीय प्राथमिकता मानते हुए कानूनी, तकनीकी और कूटनीतिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण पहल की हैं।
इन प्रयासों का उद्देश्य आर्थिक अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध तथा अन्य गंभीर मामलों में वांछित आरोपियों को भारत लाना और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करना है।
प्रत्यर्पण को बनाया गया मिशन मोड अभियान
सरकार का कहना है कि वर्ष 2020 के बाद भगोड़े अपराधियों को वापस लाने की प्रक्रिया को ‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ाया गया। इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों, जांच एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के बीच समन्वय को मजबूत किया गया।
PIB के अनुसार, सरकार ने इस दिशा में तीन प्रमुख स्तंभों पर विशेष जोर दिया—
- वैश्विक स्तर पर सक्रिय अभियान
- विभिन्न एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय
- प्रभावी एवं व्यावहारिक कूटनीतिक सहयोग
सरकार का कहना है कि इन पहलों के माध्यम से प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अधिक तेज, व्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनाया गया।
भगोड़े अपराधियों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा
जारी जानकारी में कहा गया है कि भगोड़े अपराधियों का मुद्दा केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है।
इसी दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कानूनों और संस्थागत व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया, ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कानूनी प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके।
नए कानूनों से मिली कानूनी मजबूती
सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण कानूनी सुधार किए गए।
इनमें प्रमुख रूप से—
- भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (Fugitive Economic Offenders Act) का प्रभावी उपयोग
- NIA संशोधन अधिनियम, 2019
- UAPA संशोधन अधिनियम, 2019
- वर्ष 2024 से लागू नए आपराधिक कानून
शामिल हैं।
इसके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 में पहली बार Trial in Absentia (आरोपी की अनुपस्थिति में सुनवाई) का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे विदेश में रह रहे भगोड़े आरोपियों के मामलों में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ाना आसान होगा।
INTERPOL और BHARATPOL से बढ़ा सहयोग
सरकार ने अंतरराष्ट्रीय पुलिस संगठन INTERPOL के साथ सहयोग को भी मजबूत किया है।
वर्ष 2022 में भारत ने 90वीं इंटरपोल महासभा की मेजबानी की। इसके बाद जनवरी 2025 में BHARATPOL प्लेटफॉर्म शुरू किया गया।
सरकार के अनुसार, BHARATPOL के माध्यम से—
- CBI
- राज्य पुलिस
- जिला पुलिस
- अन्य केंद्रीय एजेंसियों
की 1,400 से अधिक इकाइयों को एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा गया है।
इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का समय पहले की तुलना में काफी कम हुआ है। कई मामलों में जानकारी अब 3 से 10 दिन के भीतर उपलब्ध हो रही है।
रेड कॉर्नर नोटिस में बढ़ोतरी
PIB के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में INTERPOL के माध्यम से जारी रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार—
- 2022 – 40
- 2023 – 100
- 2024 – 107
- 2025 – 112
- 2026 (अब तक) – 182
जबकि पिछले तीन वर्षों में कुल 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए।
इन नोटिसों के माध्यम से विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर वांछित आरोपियों का पता लगाने में सहायता मिली।
ऑपरेशन त्रिशूल में तकनीक का उपयोग
सरकार ने भगोड़े अपराधियों की पहचान और लोकेशन ट्रैक करने के लिए ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ का भी उल्लेख किया है।
PIB के अनुसार, इस अभियान के तहत—
- सैटेलाइट आधारित निगरानी
- डिजिटल फुटप्रिंट विश्लेषण
- प्रोफाइल मैपिंग
- जियो-लोकेशन तकनीक
का उपयोग किया गया।
सरकार का दावा है कि कई मामलों में विदेशों में नाम या पहचान बदलने के बावजूद तकनीकी विश्लेषण के आधार पर वांछित आरोपियों का पता लगाया गया।
PMLA के तहत संपत्ति जब्ती
सरकार के अनुसार, धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत वर्ष 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों से जुड़ी 17,874 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं।
इसके अलावा इसी अवधि में 18,762 करोड़ रुपये की राशि सफलतापूर्वक संबंधित पक्षों को वापस (Restitution) दिलाई गई, जिसमें आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों की संपत्तियां भी शामिल हैं।
किन मामलों के आरोपी वापस लाए गए?
PIB द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से जुलाई 2026 तक भारत वापस लाए गए 274 भगोड़े विभिन्न प्रकार के मामलों में वांछित थे।
इनमें प्रमुख श्रेणियां शामिल हैं—
- हत्या एवं अन्य गंभीर आपराधिक मामले
- संगठित अपराध
- आर्थिक एवं वित्तीय अपराध
- आतंकवाद एवं राष्ट्र-विरोधी गतिविधियां
- मादक पदार्थ तस्करी
- मानव तस्करी
- साइबर अपराध
- यौन अपराध
- अपहरण
- अन्य गंभीर अपराध
सरकार का कहना है कि इन मामलों में प्रत्यर्पण से न्यायिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायता मिली है।
एजेंसियों के समन्वय पर जोर
सरकार के अनुसार, इस अभियान की सफलता विभिन्न एजेंसियों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
इनमें—
- इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB)
- केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
- राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA)
- प्रवर्तन निदेशालय (ED)
- विदेश मंत्रालय (MEA)
- नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)
- DGGI
- राज्य पुलिस
का समन्वित सहयोग शामिल रहा।
जनवरी 2026 में मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन भी किया गया, जिसका उद्देश्य विभिन्न राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा प्रत्यर्पण मामलों के समन्वय को मजबूत करना है।
PIB द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में भगोड़े अपराधियों के प्रत्यर्पण, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, डिजिटल निगरानी, कानूनी सुधार और एजेंसियों के समन्वय को मजबूत करने के लिए कई पहलें की हैं। सरकार का दावा है कि 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है तथा INTERPOL, BHARATPOL, ऑपरेशन त्रिशूल और PMLA जैसे तंत्रों के माध्यम से इस प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया गया है। यह विवरण सरकार द्वारा साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों और दावों पर आधारित है।

