एनएचआरसी की ऑनलाइन इंटर्नशिप शुरू: 2,036 आवेदनों में से 100 छात्रों का चयन, मानवाधिकार जागरूकता पर रहेगा फोकस

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देशभर के विश्वविद्यालय स्तर के छात्रों के लिए दो सप्ताह का ऑनलाइन शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप (OSTI) कार्यक्रम शुरू किया है।

इस पहल का उद्देश्य युवाओं में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना तथा उन्हें समाज के प्रति अधिक संवेदनशील बनाना है। कार्यक्रम का उद्घाटन नई दिल्ली स्थित मानव अधिकार भवन में एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने किया।

इस अवसर पर आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी, महासचिव पीयूष गोयल, संयुक्त सचिव समीर कुमार, श्रीमती सैदिंगपुई छकछुक तथा निदेशक सुश्री सतोविशा समाजदार भी उपस्थित रहे।

2,036 आवेदनों में से चुने गए 100 छात्र

एनएचआरसी के अनुसार इस वर्ष देशभर के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से कुल 2,036 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से विभिन्न विषयों और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के 100 विद्यार्थियों का चयन किया गया है।

यह चयन प्रक्रिया विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों, मानवाधिकार विषय में रुचि तथा अन्य निर्धारित मानकों के आधार पर पूरी की गई। चयनित प्रतिभागी आगामी दो सप्ताह तक ऑनलाइन माध्यम से मानवाधिकारों के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेंगे और विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे।

युवाओं को मिलेगा मानवाधिकारों का व्यावहारिक ज्ञान

इंटर्नशिप कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को मानवाधिकार संरक्षण, भारतीय संविधान, न्यायिक व्यवस्था, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल अधिकार, अल्पसंख्यक अधिकार, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिकार, पर्यावरणीय अधिकार तथा समकालीन मानवाधिकार चुनौतियों जैसे विषयों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

इसके अलावा देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ, न्यायविद, शिक्षाविद और प्रशासनिक अधिकारी विभिन्न सत्रों के माध्यम से छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और समसामयिक मुद्दों की जानकारी भी देंगे।

दुनिया गंभीर मानवीय चुनौतियों का सामना कर रही है

कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर एनएचआरसी अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के युवा अपेक्षाकृत सौभाग्यशाली हैं क्योंकि उन्हें भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आश्रय जैसे बुनियादी मानवाधिकार उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में आज भी लाखों लोग युद्ध, हिंसा, विस्थापन और मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में युवाओं का मानवाधिकारों के प्रति जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है।

ग्लोबल पीस इंडेक्स 2025 का किया उल्लेख

न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस द्वारा जारी ग्लोबल पीस इंडेक्स 2025 का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान समय में दुनिया लगभग 130 सशस्त्र संघर्षों का सामना कर रही है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे गंभीर स्थिति मानी जा रही है।

उन्होंने बताया कि—

  • लगभग 98 देश किसी न किसी बाहरी संघर्ष से प्रभावित हैं।
  • 12 करोड़ से अधिक लोग जबरन विस्थापित हो चुके हैं।
  • इन संघर्षों से वैश्विक अर्थव्यवस्था को लगभग 20 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान पहुंचा है।

उन्होंने कहा कि ये आंकड़े बताते हैं कि विश्व स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।

युवाओं को बनाया जाएगा मानवाधिकारों का ब्रांड एंबेसडर

एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा कि आयोग का यह इंटर्नशिप कार्यक्रम केवल शैक्षणिक गतिविधि नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य युवाओं को मानवाधिकारों का ब्रांड एंबेसडर बनाना भी है।

उन्होंने कहा कि यदि इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों में अपने साथी नागरिकों के प्रति सहानुभूति, करुणा और संवेदनशीलता की भावना और अधिक मजबूत होती है, तो यही इसकी सबसे बड़ी सफलता होगी।

उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस अवसर का पूरा लाभ उठाएं और यहां प्राप्त ज्ञान को समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए उपयोग करें।

गरिमापूर्ण जीवन हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि इंटर्नशिप को इस प्रकार तैयार किया गया है ताकि छात्रों को मानवाधिकारों के विभिन्न आयामों की व्यापक जानकारी मिल सके।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों को व्यवहारिक और विधिक दोनों प्रकार का ज्ञान प्राप्त होगा।

उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार प्राप्त है और यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण मौलिक अधिकारों में से एक है।

समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपील

न्यायमूर्ति सारंगी ने छात्रों से कहा कि वे इस कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा और जागरूकता बढ़ाने में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।

उन्होंने कहा कि शिक्षित युवाओं की जिम्मेदारी केवल करियर बनाना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों को समाज तक पहुंचाना भी है।

दो सप्ताह तक चलने वाले इस ऑनलाइन कार्यक्रम में प्रतिभागियों को देश के प्रतिष्ठित न्यायविदों, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों, मानवाधिकार विशेषज्ञों और विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी वक्ताओं से सीधे संवाद का अवसर मिलेगा।

इसके माध्यम से छात्र न केवल सैद्धांतिक जानकारी प्राप्त करेंगे, बल्कि मानवाधिकारों से जुड़े व्यावहारिक मामलों और चुनौतियों को भी बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

मानवाधिकार शिक्षा को मिलेगा नया आयाम

ऐसे इंटर्नशिप कार्यक्रम युवाओं में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक सोच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसके अलावा, डिजिटल माध्यम से आयोजित होने के कारण देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिभागी एक ही मंच पर जुड़कर अपने अनुभव साझा कर सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर विचारों का आदान-प्रदान भी संभव होता है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा शुरू किया गया दो सप्ताह का ऑनलाइन शॉर्ट टर्म इंटर्नशिप कार्यक्रम युवाओं को मानवाधिकारों, संविधान और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 2,036 आवेदनों में से चयनित 100 विद्यार्थियों को विशेषज्ञों से सीखने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

यह कार्यक्रम न केवल मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि युवाओं में सहानुभूति, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को भी मजबूत करेगा। भविष्य में ऐसे कार्यक्रम लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने और मानवाधिकार संरक्षण की संस्कृति को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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