आजमगढ़ मुठभेड़: सिधारी पुलिस ने अन्तर्राज्यीय ठगी गैंग के सरगना समेत 5 बदमाश दबोचे, नकली दवा से करते थे ठगी
रिपोर्ट – पितेश्वर कुमार
आज़मगढ़: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में अपराध नियंत्रण अभियान के तहत सिधारी थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सोमवार तड़के पुलिस ने एक अन्तर्राज्यीय ठगी गिरोह के सरगना सहित पांच आरोपियों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान आत्मरक्षा में की गई जवाबी फायरिंग में गैंग का सरगना घायल हो गया, जिसे तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अवैध हथियार, नकदी, विजिटिंग कार्ड, पहचान पत्र और एक मारुति 800 कार भी बरामद की है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में सक्रिय था तथा नकली दवाओं के नाम पर लोगों को झांसा देकर ठगी करता था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सदस्यों ने हाल ही में चोरी की एक वारदात को भी अंजाम दिया था।
मुखबिर की सूचना पर बनाई गई रणनीति
पुलिस के अनुसार प्रभारी निरीक्षक विनय कुमार सिंह के नेतृत्व में थाना सिधारी की टीम सोमवार सुबह लगभग 5:45 बजे छतवारा चौराहे पर नियमित वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि दवा बेचने की आड़ में लोगों को ठगने वाला गिरोह मारुति 800 कार से खेमऊपुर-इटौरा मार्ग होते हुए आजमगढ़ की ओर आने वाला है।
सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल खेमऊपुर नहर पुलिया के पास घेराबंदी की। कुछ ही देर बाद संदिग्ध वाहन दिखाई दिया। पुलिस ने वाहन रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक ने वाहन मोड़कर भागने की कोशिश की। इसी दौरान वाहन में सवार एक आरोपी ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी।
आत्मरक्षा में पुलिस ने की जवाबी कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक पुलिस टीम ने आत्मरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान गिरोह का सरगना ध्यान सिंह पुत्र अतर सिंह, निवासी वाकरपुर अटायन, थाना भोजपुर, जनपद मुरादाबाद, के दाहिने पैर में गोली लगी। घायल होने के बाद उसे मौके पर ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया और प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेज दिया।
इसके साथ ही पुलिस ने मौके से चार अन्य आरोपियों को भी बिना किसी अतिरिक्त घटना के गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर तलाशी अभियान चलाया, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गिरोह का कोई अन्य सदस्य फरार न हो।
पूछताछ में सामने आया ठगी का तरीका
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। आरोपियों ने बताया कि वे गांव और कस्बों में घूम-घूमकर लोगों से संपर्क करते थे। इसके बाद यौन रोग, कमजोरी तथा अन्य निजी स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज का दावा करते हुए कथित दवाएं बेचते थे।
पुलिस के अनुसार आरोपी लोगों की झिझक और बीमारी से जुड़ी गोपनीयता का फायदा उठाकर उन्हें महंगी कीमत पर नकली दवाएं बेचते थे। कई मामलों में लोगों से हजारों रुपये वसूले जाते थे। इस तरह गिरोह लंबे समय से संगठित तरीके से ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहा था।
चोरी की वारदात का भी खुलासा
पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह ने 2 अगस्त को पवई क्षेत्र की एक दुकान से लगभग 5,000 रुपये की चोरी की थी। पुलिस अब इस मामले में भी साक्ष्य जुटा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य घटनाओं का भी सत्यापन किया जा रहा है, ताकि यदि किसी अन्य जिले में भी इनकी संलिप्तता रही हो तो संबंधित पुलिस इकाइयों को सूचना दी जा सके।
बरामद हुआ यह सामान
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। इनमें शामिल हैं—
- एक अवैध तमंचा
- दो जिंदा कारतूस
- एक खोखा कारतूस
- 3,000 रुपये नकद
- एक आधार कार्ड
- 12 दवाखानों के विजिटिंग कार्ड
- एक मारुति 800 कार
पुलिस का मानना है कि बरामद विजिटिंग कार्ड और अन्य दस्तावेज गिरोह के नेटवर्क की जानकारी जुटाने में मदद करेंगे।
गिरफ्तार किए गए आरोपी
पुलिस ने जिन पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें—
- ध्यान सिंह पुत्र अतर सिंह, निवासी मुरादाबाद (गिरोह का सरगना)
- छत्रपाल पुत्र गोपाली, निवासी उधम सिंह नगर, उत्तराखंड
- कुलदीप पुत्र चुन्ना, निवासी मुरादाबाद
- राजा पुत्र सुनील, निवासी मुरादाबाद
- सरिता सिंह पत्नी ध्यान सिंह, निवासी मुरादाबाद
शामिल हैं।
पहले से दर्ज हैं कई मुकदमे
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गिरोह के सरगना ध्यान सिंह के खिलाफ पहले से ही लखनऊ, आजमगढ़ और पवई सहित विभिन्न स्थानों पर धोखाधड़ी और ठगी के मामले दर्ज हैं। पुलिस अब उसके आपराधिक इतिहास का विस्तृत सत्यापन कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह किन-किन राज्यों और जिलों में सक्रिय रहा है।
अन्तर्राज्यीय नेटवर्क की जांच जारी
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह केवल एक जिले तक सीमित नहीं था। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सक्रिय इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और सहयोगियों की तलाश भी की जा रही है। पुलिस मोबाइल फोन, दस्तावेजों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कर रही है ताकि गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा बिना वैध लाइसेंस या चिकित्सकीय प्रमाण के दवाएं बेचने के दावों पर भरोसा न करें।
यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति इलाज या चमत्कारी दवा के नाम पर पैसे मांगता है, तो इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित स्वास्थ्य विभाग को दें। जागरूकता और सतर्कता से ऐसी ठगी की घटनाओं को रोका जा सकता है।
सिधारी थाना पुलिस की इस कार्रवाई को अन्तर्राज्यीय ठगी गिरोह के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
समय पर मिली सूचना, त्वरित घेराबंदी और समन्वित कार्रवाई के कारण पुलिस न केवल गिरोह के सरगना सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफल रही, बल्कि ठगी में प्रयुक्त सामग्री भी बरामद कर ली।
पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है और जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

