राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में नया अपडेट: आरोपी के पेंशन खाते में 12.39 लाख जमा, अदालत में उठे नए सवाल

e1314a62-57d4-46c0-b028-5b7fb758244a

Digital Up News Desk

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक नया तथ्य सामने आया है। मामले के आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन बैंक खाते में फरवरी और मार्च 2026 के दौरान करीब 12.39 लाख रुपये जमा होने का विवरण अदालत में प्रस्तुत किया गया है। जांच अधिकारी (विवेचक) ने इस आधार पर आरोपी के बैंक खाते से निकासी पर लगी रोक हटाने के न्यायालय के पूर्व आदेश पर आपत्ति दर्ज कराई है। इस मामले में अब अदालत ने 5 अगस्त को सुनवाई की तिथि निर्धारित की है।

यह मामला पहले से ही न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। ऐसे में अदालत में प्रस्तुत किए गए नए तथ्यों के बाद जांच और कानूनी प्रक्रिया दोनों पर सभी की नजर बनी हुई है।

क्या है पूरा मामला?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के बैंक खाते की जांच के दौरान विवेचना अधिकारी को कुछ ऐसे वित्तीय लेन-देन मिले, जिन पर उन्होंने अदालत का ध्यान आकर्षित किया है।

जांच के अनुसार आरोपी के पेंशन खाते में सामान्य रूप से करीब 45 हजार रुपये की राशि आती थी। हालांकि, फरवरी और मार्च 2026 के दौरान इसी खाते में 12.39 लाख रुपये जमा हुए। विवेचक का कहना है कि इन जमा राशियों की प्रकृति और स्रोत की जांच आवश्यक है।

अदालत के पूर्व आदेश के बाद दाखिल हुई आपत्ति

जानकारी के अनुसार, विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा की अदालत ने 27 जुलाई को पारित आदेश में आरोपी के पेंशन बैंक खाते से 26 जून के बाद की जमा और निकासी पर लगी रोक हटाने का आदेश दिया था।

इसके बाद विवेचक ने अदालत में आपत्ति दाखिल करते हुए नए वित्तीय विवरण प्रस्तुत किए। उनका कहना है कि खाते में जमा हुई बड़ी राशि की जांच पूरी होने तक खाते से निकासी की अनुमति दिए जाने पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

खाते में कब-कब जमा हुई राशि?

अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार आरोपी के बैंक खाते में निम्नलिखित जमा राशि दर्ज की गई—

  • 2 फरवरी 2026 – 5,00,000 रुपये
  • 6 मार्च 2026 – 5,00,000 रुपये
  • 8 मार्च 2026 – 1,00,000 रुपये
  • 24 मार्च 2026 – 86,760 रुपये
  • 24 मार्च 2026 – 1,53,000 रुपये

इन सभी लेन-देन को विवेचना का हिस्सा बनाया गया है। जांच अधिकारी का कहना है कि इन जमा राशियों के स्रोत और उद्देश्य की पुष्टि की जा रही है।

विवेचना में वित्तीय पहलुओं पर विशेष ध्यान

जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण भी करती हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध आर्थिक गतिविधि की जांच की जा सके।

इसी क्रम में विवेचक ने अदालत को बताया कि सामान्य पेंशन प्राप्त करने वाले खाते में अचानक बड़ी राशि जमा होना जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। हालांकि, इन जमा राशियों का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

5 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

विशेष न्यायाधीश रजत वर्मा ने विवेचक की आपत्ति स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान अदालत विवेचक द्वारा प्रस्तुत तथ्यों, बैंक खाते के विवरण तथा दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करेगी। इसके बाद न्यायालय आवश्यक आदेश पारित करेगा।

न्यायिक प्रक्रिया जारी

यह मामला वर्तमान में न्यायालय के विचाराधीन है। इसलिए मामले से जुड़े सभी तथ्यों का अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर होगा।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मानी जाती है। इसलिए मामले में सभी पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।

वित्तीय जांच का महत्व

कानून विशेषज्ञों के अनुसार आर्थिक अपराधों या वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में बैंक खातों का विश्लेषण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बैंकिंग रिकॉर्ड, लेन-देन का समय, धनराशि का स्रोत और संबंधित दस्तावेज जांच एजेंसियों के लिए अहम साक्ष्य बन सकते हैं।

हालांकि, किसी भी वित्तीय लेन-देन को संदिग्ध मानने या उसके संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालने का अधिकार केवल सक्षम जांच एजेंसी और न्यायालय के पास होता है।

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पेंशन खाते में फरवरी और मार्च के दौरान 12.39 लाख रुपये जमा होने का विवरण अदालत में प्रस्तुत किए जाने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। विवेचक ने खाते से निकासी पर लगी रोक हटाने के आदेश पर आपत्ति दर्ज कराई है और अदालत ने इस पर सुनवाई के लिए 5 अगस्त की तारीख तय की है।

फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में आगे की दिशा अदालत की सुनवाई, जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी। सभी पक्षों के तर्कों और तथ्यों पर विचार करने के बाद न्यायालय अंतिम निर्णय देगा।

You may have missed