कानपुर में इंदिरा गांधी प्रतिमा के सामने निर्माण पर आपत्ति, विधायक अमिताभ बाजपेई ने डीएम से रखी यह मांग
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अमिताभ बाजपेई ने माल रोड स्थित नयागंज मेट्रो स्टेशन के निकट भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी की प्रतिमा के सामने चल रहे निर्माण कार्य पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी कानपुर नगर को पत्र भेजकर निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रुकवाने तथा यदि निर्माण कार्य शुरू हो चुका है तो उसे हटवाने की मांग की है। विधायक का कहना है कि प्रतिमा के सामने स्थायी निर्माण होने से उसकी दृश्यता प्रभावित होगी, जिससे ऐतिहासिक एवं सार्वजनिक महत्व वाले इस स्थल की गरिमा पर असर पड़ सकता है।
प्रतिमा स्थल की गरिमा बनाए रखने की उठाई मांग
विधायक अमिताभ बाजपेई ने अपने पत्र में कहा कि माल रोड स्थित इंदिरा गांधी की प्रतिमा केवल एक स्मारक भर नहीं है, बल्कि यह शहर के महत्वपूर्ण सार्वजनिक और ऐतिहासिक स्थलों में शामिल है। प्रतिमा के सामने किसी भी प्रकार का स्थायी निर्माण होने से उसकी स्पष्ट दृश्यता प्रभावित होगी। परिणामस्वरूप प्रतिमा की गरिमा कम होने के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री के सम्मान पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि ऐसे किसी भी निर्माण कार्य की अनुमति देने से पहले जनभावनाओं और स्थल के ऐतिहासिक महत्व का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए।
निर्माण के उद्देश्य को लेकर उठाए सवाल
विधायक ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि उन्होंने इस विषय में संबंधित मेट्रो परियोजना के अधिकारियों से जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया। हालांकि, उनके अनुसार निर्माण कार्य की आवश्यकता, उद्देश्य अथवा तकनीकी कारणों के संबंध में कोई स्पष्ट और संतोषजनक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
उन्होंने कहा कि यदि किसी सार्वजनिक स्थल पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, तो उसकी उपयोगिता और उद्देश्य को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाना चाहिए। इससे नागरिकों में पारदर्शिता बनी रहती है और अनावश्यक भ्रम की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
पूर्व में भी उठ चुका है प्रतिमा से जुड़ा मामला
अमिताभ बाजपेई ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि पहले भी इंदिरा गांधी प्रतिमा से जुड़े कुछ मामलों में मेट्रो प्रशासन का रवैया सहयोगपूर्ण नहीं रहा था। उनके अनुसार, उस समय भी क्षेत्रीय नागरिकों ने अपनी चिंता व्यक्त की थी, जिसके कारण स्थानीय स्तर पर असंतोष का वातावरण बना था।
उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
डीएम से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
विधायक ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि पूरे मामले का तत्काल संज्ञान लिया जाए और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने मांग की कि यदि प्रतिमा के सामने निर्माण कार्य चल रहा है तो उसे तत्काल रोका जाए। साथ ही यदि कोई स्थायी निर्माण किया जा चुका है, तो उसकी समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रतिमा की दृश्यता और उसके आसपास का स्वरूप पूर्ववत बना रहे, जिससे ऐतिहासिक महत्व वाले इस स्थल की पहचान और गरिमा सुरक्षित रह सके।
जनभावनाओं के सम्मान पर दिया जोर
विधायक अमिताभ बाजपेई का कहना है कि महापुरुषों और राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमाएं केवल स्मारक नहीं होतीं, बल्कि वे समाज को इतिहास और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी होती हैं। इसलिए ऐसे स्थलों की गरिमा बनाए रखना शासन और प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना को लागू करते समय स्थानीय नागरिकों की भावनाओं, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक महत्व का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। इससे विकास कार्य और विरासत संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखा जा सकता है।
शहरी विकास के साथ विरासत संरक्षण भी जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में मेट्रो, सड़क और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं विकास के लिए आवश्यक हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान ऐतिहासिक स्थलों, स्मारकों और सार्वजनिक महत्व की प्रतिमाओं की सुरक्षा एवं दृश्यता का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
योजनाबद्ध विकास के तहत यदि निर्माण कार्य इस प्रकार किया जाए कि विरासत स्थलों की पहचान प्रभावित न हो, तो विकास और संरक्षण दोनों उद्देश्यों को एक साथ पूरा किया जा सकता है।
प्रशासनिक निर्णय पर रहेगी नजर
अब इस मामले में जिलाधिकारी और संबंधित विभागों की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की नजर बनी हुई है। यदि प्रशासन मामले की समीक्षा करता है, तो निर्माण कार्य की आवश्यकता, तकनीकी पहलुओं और प्रतिमा स्थल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लिया जा सकता है।
कानपुर के माल रोड स्थित इंदिरा गांधी प्रतिमा के सामने प्रस्तावित या जारी निर्माण कार्य को लेकर विधायक अमिताभ बाजपेई द्वारा उठाई गई आपत्ति ने सार्वजनिक स्थलों के संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। विधायक ने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए प्रतिमा स्थल की गरिमा और दृश्यता बनाए रखने पर जोर दिया है। अब प्रशासनिक जांच और आगामी निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला केवल एक निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक स्मारकों के संरक्षण, नागरिक भावनाओं के सम्मान और विकास कार्यों में पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण विषयों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए प्रशासन के आगामी कदम पर सभी की निगाहें बनी रहेंगी।

