सोनभद्र में रॉबर्ट्सगंज-खलियारी मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था बदहाल, अंधे मोड़ और गायब संकेतक बढ़ा रहे परेशानी

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रिपोर्ट – ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी 

सोनभद्र: रॉबर्ट्सगंज-खलियारी मार्ग पर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ रही है। करीब 40 किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर कई स्थानों पर अंधे मोड़ हैं, लेकिन इन जगहों पर पर्याप्त सांकेतिक चिन्ह और प्रकाश व्यवस्था नहीं होने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं की कमी के कारण वाहन चालकों को विशेष रूप से रात के समय परेशानी का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, मार्ग के कई हिस्सों में सड़क किनारे लगाए गए सांकेतिक चिन्ह घास-फूस और झाड़ियों के बीच छिप गए हैं। वहीं, कुछ स्थानों पर संकेतक दिखाई ही नहीं देते। ऐसे में वाहन चालकों को मोड़, सड़क की दिशा और आगे मौजूद संभावित जोखिम की जानकारी समय रहते नहीं मिल पाती।

40 किलोमीटर के मार्ग पर कई अंधे मोड़

रॉबर्ट्सगंज-खलियारी मार्ग सोनभद्र के महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है और इस पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में छोटे-बड़े वाहन आवागमन करते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, करीब 40 किलोमीटर के हिस्से में कई ऐसे मोड़ हैं, जहां सामने से आने वाले वाहनों की जानकारी दूर से नहीं मिल पाती।

दिन के समय स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट रहती है, लेकिन रात में पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण वाहन चालकों के सामने चुनौती बढ़ जाती है। विशेष रूप से नए वाहन चालकों के लिए बिना पर्याप्त संकेतकों वाले अंधे मोड़ परेशानी का कारण बन सकते हैं।

लोगों का कहना है कि ऐसे स्थानों पर स्पष्ट दिशा संकेत, चेतावनी बोर्ड और जरूरत के अनुसार रिफ्लेक्टर लगाए जाने चाहिए, ताकि वाहन चालक पहले से सावधान हो सकें।

घास-फूस के बीच छिपे हैं कई सांकेतिक चिन्ह

स्थानीय लोगों ने बताया कि सड़क किनारे लगाए गए कई सांकेतिक चिन्ह लंबे समय से घास-फूस और झाड़ियों के बीच छिपे हुए हैं। इसके कारण वाहन चालकों को इन संकेतकों को देखने में परेशानी होती है।

सड़क सुरक्षा के लिहाज से किसी भी संकेतक का स्पष्ट रूप से दिखाई देना जरूरी होता है। यदि संकेतक झाड़ियों या अन्य वनस्पतियों से ढक जाएं तो उनका उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए स्थानीय लोगों ने समय-समय पर सड़क किनारे उगी घास-फूस की सफाई कराने की मांग की है।

इसके अलावा, कुछ जगहों पर संकेतक पूरी तरह गायब होने की बात भी सामने आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ संकेतकों को असामाजिक तत्वों द्वारा उखाड़कर ले जाने की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

रात में बढ़ जाती है वाहन चालकों की परेशानी

इस मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौती रात के समय दिखाई देती है। कई हिस्सों में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने के कारण सड़क पर अंधेरा रहता है। ऐसे में अंधे मोड़ पर वाहन चालक को आगे की दिशा का अनुमान लगाने में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क के किनारे कुछ स्थानों पर गिट्टी, बालू और अन्य निर्माण सामग्री भी रखी रहती है। यदि ऐसी सामग्री सड़क के किनारे पर्याप्त दूरी और सुरक्षा व्यवस्था के बिना पड़ी हो तो रात में उसे देखना मुश्किल हो सकता है।

मझिगांव मिश्र निवासी विनय मिश्रा ने बताया कि रॉबर्ट्सगंज-खलियारी मार्ग पर लगातार हादसों की स्थिति सामने आती रही है। उनके मुताबिक, अंधे मोड़, सड़क किनारे पड़ी निर्माण सामग्री और रात के समय अंधेरा मिलकर वाहन चालकों के लिए परेशानी बढ़ा देते हैं।

सड़क सुरक्षा संकेतकों की स्थिति सुधारने की मांग

स्थानीय लोगों ने संबंधित विभाग से मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निरीक्षण के दौरान पूरे मार्ग पर मौजूद अंधे मोड़ों और अन्य संवेदनशील स्थानों की पहचान की जानी चाहिए।

इसके साथ ही जहां सांकेतिक चिन्ह गायब हैं, वहां नए संकेतक लगाए जाएं और जो संकेतक घास-फूस में छिपे हैं, उन्हें साफ कर स्पष्ट रूप से दिखाई देने योग्य बनाया जाए।

लोगों ने यह भी मांग की है कि रात के समय वाहन चालकों को पर्याप्त जानकारी देने के लिए आवश्यक स्थानों पर रिफ्लेक्टिव संकेतक और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। इससे दूर से आने वाले वाहन चालकों को सड़क की स्थिति और मोड़ के बारे में पहले से जानकारी मिल सकती है।

प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी उठी मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर अंधे मोड़ हैं और जहां रात में दृश्यता कम रहती है, वहां आवश्यकता के अनुसार प्रकाश व्यवस्था की जानी चाहिए। खासतौर पर अधिक आवागमन वाले संवेदनशील हिस्सों में पर्याप्त रोशनी होने से वाहन चालकों को सड़क समझने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, पूरे मार्ग पर प्रकाश व्यवस्था कराना व्यावहारिक है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित विभाग के तकनीकी निरीक्षण के बाद किया जा सकता है। इसके बावजूद स्थानीय लोग चाहते हैं कि दुर्घटना संभावित स्थानों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित किया जाए।

निर्माण सामग्री हटाने की भी मांग

सड़क किनारे गिट्टी, बालू और अन्य निर्माण सामग्री पड़े होने की शिकायत भी स्थानीय लोगों ने की है। उनका कहना है कि निर्माण सामग्री को सड़क की सीमा से पर्याप्त दूरी पर सुरक्षित तरीके से रखा जाना चाहिए, ताकि वाहन चालकों के आवागमन में बाधा न हो।

यदि निर्माण कार्य चल रहा है तो वहां उचित चेतावनी संकेत और सुरक्षा व्यवस्था भी होनी चाहिए। इससे वाहन चालकों को पहले से जानकारी मिल सकती है और वे अपनी गति एवं दिशा के अनुसार सावधानी बरत सकते हैं।

स्थलीय निरीक्षण से सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति

स्थानीय लोगों की मांग है कि संबंधित विभाग रॉबर्ट्सगंज-खलियारी मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर सड़क सुरक्षा से जुड़ी कमियों का आकलन करे। निरीक्षण के दौरान अंधे मोड़, गायब सांकेतिक चिन्ह, झाड़ियों से ढके संकेतक, प्रकाश व्यवस्था और सड़क किनारे रखी निर्माण सामग्री जैसे बिंदुओं को देखा जा सकता है।

इसके बाद जरूरत के अनुसार संकेतक लगाने, पुराने संकेतकों की मरम्मत, घास-फूस की सफाई और संवेदनशील स्थानों पर अन्य सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।

फिलहाल, रॉबर्ट्सगंज-खलियारी मार्ग पर सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय लोगों की मांग सामने आई है। लोगों का कहना है कि समय रहते जरूरी सुधार किए जाएं, ताकि वाहन चालकों को मार्ग पर सुरक्षित आवागमन में सुविधा मिल सके।

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