बदायूं गोशालाओं में गोवंशों की मौत पर पशु चिकित्सा संघ ने खोला मोर्चा, अधिकारियों पर कार्रवाई की रखी यह मांग

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रिपोर्ट – विपिन यादव 

बदायूं: जिले की गोशालाओं में गोवंशों की मौत और व्यवस्थाओं को लेकर अब मामला प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर पशु चिकित्सा संघ तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ ने गोशालाओं की व्यवस्थाओं और गोवंशों की मौत के मामलों को लेकर पशुधन मंत्री को शिकायत भेजी है। संघ ने पूरे प्रकरण में जिम्मेदारी तय करने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

संघ की ओर से जिलाधिकारी अवनीश राय, मुख्य विकास अधिकारी गामिनी सिंगला और संबंधित खंड विकास अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है। संघ अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने गोशालाओं के संचालन और निगरानी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि गोवंशों की देखरेख के लिए उपलब्ध व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति की जांच जरूरी है।

गोशालाओं की व्यवस्थाओं को लेकर उठे सवाल

दरअसल, बदायूं जिले में लगातार बारिश के बाद कई गोशालाओं में गोवंशों की मौत की जानकारी सामने आई थी। अभिगांव की अस्थायी गोशाला का मामला विशेष रूप से चर्चा में रहा। पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, 26 सितंबर को अभिगांव गोशाला में 428 गोवंश मौजूद थे। इसके बाद बारिश के दौरान 20 गोवंशों की मौत की पुष्टि प्रशासन की ओर से की गई। वहीं, कुछ स्थानीय संगठनों और पशु प्रेमियों ने मृत गोवंशों की संख्या इससे अधिक होने का दावा किया था।

मामले में पुलिस ने गोशाला संचालक प्रियंक कौशिक और केयरटेकर दानवीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। शिकायत में गोवंशों की उचित देखभाल नहीं करने, चारा-पानी की व्यवस्था में कमी और सरकारी धन के कथित दुरुपयोग जैसे आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पशु चिकित्सा संघ ने मांगी जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई

अब उत्तर प्रदेश पशु चिकित्सा संघ ने भी इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए पशुधन मंत्री को शिकायत भेजी है। संघ का कहना है कि गोशालाओं में यदि व्यवस्थाओं की कमी के कारण गोवंशों को परेशानी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी केवल गोशाला संचालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि निगरानी और निरीक्षण की जिम्मेदारी निभाने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

संघ अध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार ने गोशालाओं में चारा, पानी और देखरेख की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कई स्थानों पर गोवंशों की देखभाल से जुड़ी व्यवस्थाएं कागजी रिकॉर्ड तक सीमित रह जाती हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मानकों के अनुरूप गोशाला निर्माण का मुद्दा

शिकायत में गोशाला निर्माण और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। संघ की ओर से आरोप लगाया गया है कि कुछ स्थानों पर गोशालाओं का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हुआ और बारिश के दौरान जलभराव जैसी स्थिति सामने आई।

ऐसे में गोशालाओं की क्षमता, जल निकासी, चारा रखने की व्यवस्था, पेयजल, शेड और पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी जैसे बिंदुओं की जांच की मांग की गई है। साथ ही, संघ ने यह भी कहा है कि गोशालाओं में रखे जाने वाले गोवंशों की संख्या और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन होना जरूरी है।

अभिगांव गोशाला के संचालन पर भी सवाल

अभिगांव की गोशाला को लेकर शिकायत में संचालन व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शारदा सेवा समिति की ओर से इस गोशाला का संचालन किया जा रहा था। पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, समिति को गोवंशों के भरण-पोषण के लिए प्रति गोवंश प्रतिदिन 50 रुपये की दर से राशि दिए जाने की बात सामने आई है। 428 गोवंश के हिसाब से यह राशि करीब 21,400 रुपये प्रतिदिन और लगभग 6.42 लाख रुपये प्रतिमाह बैठती है।

इसी व्यवस्था के बीच गोशाला में चारा-पानी और बारिश से बचाव के प्रबंधों को लेकर सवाल उठे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम स्थिति पुलिस और प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

केयरटेकर दानवीर गिरफ्तार, प्रियंक कौशिक की तलाश

मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद केयरटेकर दानवीर को गिरफ्तार किया है। वहीं, गोशाला संचालक प्रियंक कौशिक की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। बाद की रिपोर्ट के अनुसार, प्रियंक कौशिक ने अदालत में आत्मसमर्पण के लिए प्रार्थना पत्र भी दाखिल किया है।

पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े तथ्यों, गोशाला के संचालन और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

पशु चिकित्सा संघ ने अपनी शिकायत में जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और संबंधित बीडीओ समेत जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की है। संघ का तर्क है कि गोशालाओं के संचालन के साथ-साथ उनकी निगरानी और समय-समय पर निरीक्षण की व्यवस्था भी प्रशासनिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।

इसलिए, यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल यह मामला पुलिस जांच के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में है।

आगे क्या होगा?

बदायूं की गोशालाओं में सामने आए मामलों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि गोवंशों की देखभाल के लिए उपलब्ध संसाधनों और जमीनी व्यवस्थाओं के बीच कितना अंतर है। पशु चिकित्सा संघ की शिकायत के बाद अब संबंधित अधिकारियों और गोशाला संचालकों की जिम्मेदारी की जांच की मांग तेज हो गई है।

वहीं, प्रशासन की ओर से भी गोशालाओं की व्यवस्थाओं की समीक्षा और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की बात सामने आई है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और पुलिस कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि गोशालाओं में व्यवस्थाओं की कमी के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है। फिलहाल अभिगांव प्रकरण में एफआईआर और गिरफ्तारी के बाद जांच जारी है।

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