आज़मगढ़ में साइबर ठगी गैंग का सरगना गिरफ्तार, AEPS क्लोनिंग से ठगी करने वाले आरोपी के पास मिले फर्जी आधार कार्ड

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रिपोर्ट- पित्तेश्वर कुमार

आज़मगढ़ः उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गम्भीरपुर थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने AEPS (आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम) क्लोनिंग के माध्यम से लोगों के बैंक खातों से अवैध रूप से धन निकालने वाले गिरोह के सरगना को गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से एक कूटरचित (फर्जी) आधार कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है। बरामद मोबाइल की डिजिटल जांच भी कराई जा रही है ताकि गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में तकनीकी निगरानी, डिजिटल साक्ष्य और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई तेज कर दी गई है। इसी क्रम में यह गिरफ्तारी साइबर अपराध के खिलाफ चल रहे अभियान की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में चला विशेष अभियान

पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में पूरे जनपद में साइबर अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल माध्यम से होने वाले आर्थिक अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाना है।

इसी अभियान के तहत गम्भीरपुर थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने लंबे समय से वांछित आरोपी सद्दाम पुत्र तौफिक, निवासी रंजीतपट्टी, थाना मुहम्मदपुर को गिरफ्तार किया। पुलिस का कहना है कि आरोपी की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही थी और तकनीकी विश्लेषण के बाद उसके ठिकाने की पुष्टि की गई।

पहले आरोपी की गिरफ्तारी से खुला साइबर नेटवर्क

इस पूरे मामले की शुरुआत 11 जुलाई 2026 को हुई थी, जब साइबर सेल और गम्भीरपुर पुलिस ने संदिग्ध बैंक खातों की जांच के दौरान यश विश्वकर्मा निवासी दयालपुर को गिरफ्तार किया था।

पूछताछ के दौरान मिले डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल डेटा के विश्लेषण में यह जानकारी सामने आई कि यश विश्वकर्मा अपने साथी सद्दाम के साथ मिलकर साइबर ठगी का संगठित नेटवर्क चला रहा था। जांच में यह भी पता चला कि दोनों आरोपी AEPS आधारित बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग कर लोगों के खातों से धन निकालते थे और बाद में उस रकम को आपस में कमीशन के रूप में बांट लेते थे।

इसके बाद पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी की तलाश तेज कर दी थी।

AEPS क्लोनिंग के जरिए करते थे बैंक खातों से निकासी

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी आधार आधारित बैंकिंग सेवाओं का गलत इस्तेमाल कर लोगों के बैंक खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते थे। प्रारंभिक जांच के अनुसार, बायोमेट्रिक डिवाइस और अन्य तकनीकी माध्यमों की सहायता से बैंकिंग लेन-देन को प्रभावित कर खातों से अवैध निकासी की जाती थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि AEPS प्रणाली ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हालांकि, यदि इसका दुरुपयोग किया जाए तो यह साइबर अपराधियों के लिए आर्थिक अपराध का साधन बन सकता है। यही कारण है कि ऐसे मामलों में डिजिटल फॉरेंसिक जांच और तकनीकी विश्लेषण को विशेष प्राथमिकता दी जाती है।

मुखबिर की सूचना पर हुई गिरफ्तारी

सोमवार 3 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 1:30 बजे पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि मुख्य आरोपी सद्दाम रानीपुर-रजमों मोड़ के पास मौजूद है।

सूचना मिलते ही गम्भीरपुर थाना पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से एक फर्जी आधार कार्ड और एक मोबाइल फोन बरामद हुआ।

पुलिस ने दोनों वस्तुओं को कब्जे में लेकर जांच के लिए सुरक्षित रखा है। साथ ही मोबाइल फोन की डिजिटल जांच भी कराई जाएगी ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों, बैंक खातों और लेन-देन से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए जा सकें।

इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

पुलिस ने बताया कि इस मामले में थाना गम्भीरपुर पर मुकदमा अपराध संख्या 171/2026 दर्ज है।

आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2), 318(4), 319(2), 338, 336(3), 340 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 66D के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विवेचना के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गिरफ्तार आरोपी सद्दाम के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें साइबर ठगी के अलावा गोवध अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट, लूट, दंगा और अन्य गंभीर मामलों से जुड़े मुकदमे शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, वर्तमान कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य साइबर ठगी के नेटवर्क का खुलासा करना और आर्थिक अपराधों में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए डिजिटल साक्ष्यों का गहन विश्लेषण कर रही है।

साइबर अपराध के खिलाफ जारी रहेगा अभियान

आज़मगढ़ पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान भविष्य में भी लगातार जारी रहेगा। डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, इसलिए साइबर सेल संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए है।

पुलिस का मानना है कि समय रहते कार्रवाई और जनजागरूकता के माध्यम से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है। इसी दिशा में साइबर सेल आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

नागरिकों के लिए पुलिस की महत्वपूर्ण सलाह

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने आधार नंबर, बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, सीवीवी और बायोमेट्रिक विवरण किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, मोबाइल ऐप या बैंकिंग लेन-देन पर तुरंत सतर्कता बरतें।

यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन ठगी होती है तो वह बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या निकटतम पुलिस थाने अथवा साइबर सेल से संपर्क करे। समय पर शिकायत दर्ज होने से धनराशि को सुरक्षित कराने और अपराधियों तक पहुंचने की संभावना बढ़ जाती है।

आज़मगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई दर्शाती है कि साइबर अपराधों के खिलाफ तकनीकी जांच, डिजिटल साक्ष्य और खुफिया सूचना का समन्वय प्रभावी परिणाम दे सकता है। AEPS क्लोनिंग जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई न केवल अपराधियों पर शिकंजा कसती है, बल्कि आम नागरिकों के डिजिटल बैंकिंग सिस्टम पर भरोसे को भी मजबूत करती है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर ठगी के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और भविष्य में भी ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा।

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