हमीरपुर में बाल श्रम के खिलाफ बड़ा अभियान: मौदहा में बाल श्रमिक मुक्त, दोषी सेवायोजकों पर होगी सख्त कार्रवाई

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रिपोर्ट- मो अकरम 

हमीरपुरः उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बाल श्रम उन्मूलन को लेकर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत हमीरपुर जनपद में प्रशासन लगातार सक्रिय नजर आ रहा है। इसी क्रम में सोमवार को मौदहा तहसील क्षेत्र में संयुक्त टीम ने व्यापक अभियान चलाकर विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। अभियान के दौरान एक बाल/किशोर श्रमिक को कार्यस्थल से मुक्त कराया गया, जबकि संबंधित सेवायोजक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाल श्रम कराने वालों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

जिलाधिकारी अभिषेक गोयल के निर्देशन में संचालित यह अभियान बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 तथा संशोधित बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि बच्चों का बचपन सुरक्षित रखना और उन्हें शिक्षा से जोड़ना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

संयुक्त टीम ने की सघन जांच

मौदहा क्षेत्र में चलाए गए अभियान के दौरान सीडब्ल्यूसी मजिस्ट्रेट श्रीमती विभा भारती, श्रम प्रवर्तन अधिकारी विजयपाल सोनकर, जिला समन्वयक चाइल्ड लाइन तथा एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारी राकेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने विभिन्न हॉटस्पॉट क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इसके साथ ही ढाबों, दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर बाल एवं किशोर श्रमिकों की पहचान की गई।

निरीक्षण के दौरान एक प्रतिष्ठान पर कार्यरत बाल/किशोर श्रमिक को तत्काल मुक्त कराया गया। इसके बाद संबंधित सेवायोजक के खिलाफ निरीक्षण टिप्पणी जारी करते हुए कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

एक जुलाई से 31 अगस्त तक विशेष अभियान

प्रशासन ने जानकारी दी कि शासन के निर्देशानुसार 1 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक पूरे जनपद में विशेष बाल श्रम उन्मूलन अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य केवल बाल श्रमिकों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना, पुनर्वास सुनिश्चित करना और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना भी है।

इसके अतिरिक्त सड़क पर रहने वाले, बेघर और असुरक्षित बच्चों की पहचान कर उनके बचाव एवं पुनर्वास की दिशा में भी लगातार कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का मानना है कि बाल श्रम की समस्या का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराया जाए।

ढाबों, होटल और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर रहेगी विशेष नजर

जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जनपद के ढाबों, होटल-रेस्टोरेंट, केटरिंग प्रतिष्ठानों, हलवाई की दुकानों, शादी घरों, डीजे संचालकों, गमला लाइट व्यवसायियों तथा अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर नियमित रूप से निरीक्षण किया जाए।

उन्होंने कहा कि जिन प्रतिष्ठानों पर बाल या किशोर श्रमिक कार्य करते पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध तत्काल वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही व्यापारिक संगठनों के सहयोग से व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाया जाए ताकि समाज में बाल श्रम के प्रति जागरूकता बढ़ सके।

बाल श्रम कराना दंडनीय अपराध

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने व्यापारियों और प्रतिष्ठान संचालकों को बाल श्रम निषेध कानून की विस्तृत जानकारी दी। उन्हें बताया गया कि किसी भी नाबालिग बालक या किशोर से प्रतिबंधित कार्य कराना कानूनन अपराध है।

अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर संबंधित सेवायोजक पर 20 हजार रुपये से 70 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा छह माह से दो वर्ष तक के कारावास का भी प्रावधान है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून का उल्लंघन करने वालों के साथ किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

न्यूनतम वेतन का पालन भी अनिवार्य

बाल श्रम अभियान के साथ-साथ श्रम विभाग ने श्रमिकों को मिलने वाले न्यूनतम वेतन की भी समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सभी प्रतिष्ठानों को शासन द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

वर्तमान में शासन द्वारा निर्धारित मासिक न्यूनतम वेतन इस प्रकार है—

  • अकुशल श्रमिक: 12,356 रुपये प्रतिमाह
  • अर्धकुशल श्रमिक: 13,590 रुपये प्रतिमाह
  • कुशल श्रमिक: 15,224 रुपये प्रतिमाह

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रतिष्ठान पर निर्धारित न्यूनतम वेतन से कम भुगतान किया जाता है तो न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

जनजागरूकता पर भी रहेगा विशेष जोर

प्रशासन का कहना है कि केवल कार्रवाई से ही बाल श्रम पूरी तरह समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज, व्यापारिक संगठनों, अभिभावकों और आम नागरिकों की सहभागिता भी आवश्यक है। इसलिए विभिन्न माध्यमों से लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि बच्चों का स्थान कार्यस्थल नहीं, बल्कि विद्यालय होना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज बाल श्रम की सूचना समय पर प्रशासन तक पहुंचाए तो इस समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से लोगों से अपील की जा रही है कि यदि कहीं भी बाल श्रम होता दिखाई दे तो तत्काल संबंधित विभाग या प्रशासन को इसकी सूचना दें।

इन अधिकारियों की रही मौजूदगी

अभियान के दौरान सीडब्ल्यूसी मजिस्ट्रेट श्रीमती विभा भारती, विजय शंकर श्रीवास्तव, श्रम प्रवर्तन अधिकारी विजयपाल सोनकर, जिला समन्वयक चाइल्ड लाइन, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना प्रभारी राकेश कुमार, कांस्टेबल मेघा मिश्रा, कांस्टेबल अजीत कुमार सचान, श्रम विभाग से विवेक मिश्रा, कंप्यूटर ऑपरेटर सैयद मोहम्मद उबैद उल्लाह, सूरजभान सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

हमीरपुर प्रशासन का यह अभियान स्पष्ट संकेत देता है कि जिले में बाल श्रम के खिलाफ शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई जा रही है। एक ओर जहां बाल श्रमिकों को मुक्त कर उनके पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कानून का उल्लंघन करने वाले सेवायोजकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जा रही है। यदि इसी तरह नियमित निरीक्षण, जनजागरूकता और कानूनी कार्रवाई जारी रहती है, तो आने वाले समय में बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराई पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।

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