कानपुर नगर निगम की समीक्षा बैठक में फाइलें गायब होने पर हंगामा, महापौर ने अधिकारियों को लगाई फटकार
रिपोर्ट: विक्की रघुवंशी
कानपुरः नगर निगम मुख्यालय स्थित समिति कक्ष में सोमवार को आयोजित जोन-1 की समीक्षा बैठक विकास कार्यों से अधिक प्रशासनिक व्यवस्था और फाइल प्रबंधन को लेकर चर्चा का केंद्र बन गई। महापौर प्रमिला पाण्डेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय की संयुक्त अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जोन-1 के पार्षदों ने विकास कार्यों की पत्रावलियों (फाइलों) के लगातार गायब होने, लंबित निर्माण कार्यों, सफाई व्यवस्था की खराब स्थिति, स्ट्रीट लाइटों की कमी और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। कई पार्षदों ने एक जैसी शिकायतें रखीं, जिसके बाद महापौर ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक की शुरुआत में महापौर प्रमिला पाण्डेय ने सभी पार्षदों से क्रमवार अपने-अपने वार्डों की समस्याएं रखने को कहा। साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रत्येक शिकायत पर स्पष्ट जवाब दें और समाधान की वर्तमान स्थिति से अवगत कराएं। इसके बाद विभिन्न वार्डों के पार्षदों ने विकास कार्यों में आ रही बाधाओं और प्रशासनिक लापरवाही के कई मामलों को विस्तार से सामने रखा।
फाइलें गायब होने का मुद्दा बैठक में सबसे प्रमुख रहा
बैठक के दौरान सबसे अधिक चर्चा विकास कार्यों की पत्रावलियों के गायब होने को लेकर हुई। वार्ड पार्षद हाजी सुहैल अहमद ने आरोप लगाया कि जोन-1 में विकास कार्यों से संबंधित फाइलें लगातार लापता हो रही हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 की एक विकास योजना की पत्रावली टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कार्यालय से गायब हो गई। इसके अलावा चमड़े और चप्पलों के कचरे के निस्तारण से जुड़ी स्वीकृत फाइल भी उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण महत्वपूर्ण कार्य समय पर शुरू नहीं हो पा रहे हैं।
इसी क्रम में पार्षद कौशिक वाजपेयी ने कहा कि नगर आयुक्त की आपत्ति के बाद उनकी विकास कार्य संबंधी फाइल भी कार्यालय से गायब हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि मार्च 2026 के बाद नए अधिशासी अभियंता के कार्यभार संभालने के पश्चात विकास कार्यों की गति काफी धीमी हो गई है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस से पहले झंडारोहण स्थल के निर्माण को प्राथमिकता देने की भी मांग की।
वहीं पार्षद आकर्ष बाजपेयी ने बताया कि लगभग 19 लाख रुपये के स्वीकृत विकास कार्य की पत्रावली भी कार्यालय में नहीं मिल रही है। उनका कहना था कि नगर आयुक्त द्वारा अग्रसारित फाइलें भी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं हैं और कर्मचारियों द्वारा पार्षदों को सही जानकारी नहीं दी जाती।
आशुतोष मिश्रा को जोन-1 से हटाने के दिए गए निर्देश
बैठक के दौरान पार्षद आकर्ष बाजपेयी ने जोन-1 में कार्यरत कर्मचारी आशुतोष मिश्रा की तैनाती पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पूर्व में आदेश जारी किया जा चुका था कि उन्हें जनता से जुड़े कार्यों में नहीं लगाया जाएगा, इसके बावजूद वे उसी जिम्मेदारी में कार्यरत हैं। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए महापौर प्रमिला पाण्डेय ने तत्काल उन्हें जोन-1 से हटाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
कई वार्डों के पार्षदों ने रखीं समान शिकायतें
बैठक में केवल एक-दो नहीं बल्कि कई पार्षदों ने समान प्रकार की समस्याएं उठाईं। वार्ड 94 के पार्षद अनवर अली ने बताया कि उनके क्षेत्र की सात से आठ विकास कार्यों की फाइलें गायब हैं। वहीं वार्ड 103 के पार्षद फैजान रहमान ने चार पत्रावलियों के लापता होने की जानकारी दी।
इसके अलावा वार्ड 107 के पार्षद राशिद महमूद ने कहा कि कार्यकारिणी से स्वीकृत विकास कार्य भी अब तक शुरू नहीं हो सके हैं। उन्होंने स्ट्रीट लाइटों की कमी, सफाई व्यवस्था की बदहाली और पेड़ों की छंटाई जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि क्षेत्र में सफाई कर्मचारियों की संख्या जरूरत से काफी कम है।
उधर पार्षद सुशील तिवारी ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में उनके वार्ड को केवल 55 स्ट्रीट लाइटें ही मिली हैं, जबकि विकास साहू ने कहा कि इस वर्ष उनके क्षेत्र में एक भी नई स्ट्रीट लाइट स्थापित नहीं की गई।
सफाई व्यवस्था और सड़क निर्माण पर भी उठे सवाल
बैठक के दौरान शहर की सफाई व्यवस्था और सड़क निर्माण कार्यों पर भी व्यापक चर्चा हुई। पार्षद आदर्श गुप्ता ने कहा कि जोन-1 कानपुर का प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र है, जहां प्रतिदिन हजारों व्यापारी और नागरिक आते हैं। इसके बावजूद सफाई व्यवस्था संतोषजनक नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में एक ही कार्य को दो-दो बार स्वीकृति मिलने जैसी अनियमितताएं सामने आई हैं।
वहीं पार्षद अमित गुप्ता ने बताया कि केस्को द्वारा सड़क खोदने के बाद मरम्मत के लिए आवश्यक फाइलें तैयार नहीं की गईं, जिससे आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पार्षद शिवम दीक्षित ने कई गलियों की जर्जर स्थिति और महीनों से लंबित पैचवर्क का मुद्दा उठाते हुए शीघ्र मरम्मत की मांग की।
इसके अतिरिक्त पार्षद अभिषेक गुप्ता ‘मोनू’ ने कहा कि पार्षदों द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्रों पर समय से कार्रवाई नहीं होती, जबकि अन्य माध्यमों से प्राप्त शिकायतों पर तुरंत फाइलें तैयार कर ली जाती हैं। उन्होंने कहा कि इससे जनता के बीच जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
अधिकारियों ने दी अपनी सफाई
जोन-1 के अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव ने बैठक में कहा कि उन्हें नगर निगम में कार्यभार संभाले अभी लगभग चार महीने हुए हैं और अधिकांश लंबित फाइलें उनके आने से पहले की हैं। उन्होंने बताया कि सभी पत्रावलियां मंगवाई जा चुकी हैं और जल्द ही उनका निस्तारण किया जाएगा। साथ ही फाइलों के गायब होने के मामले में संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
मुख्य अभियंता (सिविल) सैय्यद फरीद अख्तर जैदी ने जानकारी दी कि जांच के दौरान पाया गया कि जोन-1 में फाइलों का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। कई पत्रावलियां आपत्तियों सहित अलमारियों में पड़ी मिलीं। उन्होंने बताया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए गूगल आधारित डिजिटल रिकॉर्ड ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे प्रत्येक पत्रावली की वर्तमान स्थिति आसानी से देखी जा सकेगी।
महापौर ने जताई नाराजगी, दिए सख्त निर्देश
बैठक में लगातार सामने आ रही शिकायतों पर महापौर प्रमिला पाण्डेय ने अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव से नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चार महीने का समय कार्यालय की कार्यप्रणाली सुधारने के लिए पर्याप्त था। उन्होंने यह भी कहा कि इससे पहले चार अन्य जोनों की समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन किसी भी जोन में अधिकारियों के विरुद्ध इतनी अधिक शिकायतें प्राप्त नहीं हुईं।
महापौर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में किसी भी पार्षद की फाइल या उस पर लगी आपत्तियों की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि अनावश्यक विवाद और धरने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न न हों।
नगर आयुक्त ने जांच और सुधार का दिया भरोसा
नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने बैठक में कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत बैक लेन और गलियों में पेंटिंग का कार्य कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चौराहों के सौंदर्यीकरण के लिए अलग बजट उपलब्ध नहीं होता।
साथ ही उन्होंने जोन-1 की अभियंत्रण शाखा की विस्तृत जांच कराने तथा फाइलों के गायब होने के मामले में दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगा।
जनसमस्याओं के त्वरित समाधान पर दिया गया जोर
बैठक के समापन पर महापौर प्रमिला पाण्डेय ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पार्षदों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों—जिनमें सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सड़क निर्माण, लंबित विकास कार्य और फाइल प्रबंधन शामिल हैं—का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है और इसके लिए प्रशासनिक जवाबदेही तथा पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है।

