अयोध्या में पप्पू यादव प्रदर्शन विवाद पर सतीश महाना का पलटवार, बोले- संत परंपरा का अपमान स्वीकार नहीं
Digital UP News Desk
अयोध्या: उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना शनिवार को अयोध्या पहुंचे, जहां उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन कर भगवान का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने संसद भवन के बाहर राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले को लेकर सांसद पप्पू यादव के प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति संतों के त्याग, तपस्या और आशीर्वाद की परंपरा पर आधारित है और संतों के स्वरूप को राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बनाना उचित नहीं है।
सतीश महाना ने कहा कि संत समाज भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में संतों के वेश या प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक विरोध-प्रदर्शन के लिए करना समाज की भावनाओं को प्रभावित करता है। उन्होंने इसे संत परंपरा के सम्मान से जुड़ा विषय बताया और कहा कि सभी को धार्मिक आस्थाओं और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
संतों के वेश को लेकर जताई नाराजगी
अयोध्या में मीडिया से बातचीत करते हुए सतीश महाना ने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या और सेवा का प्रतीक होता है। इसलिए किसी भी व्यक्ति द्वारा संतों के स्वरूप को धारण कर राजनीतिक संदेश देना उचित नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में विपक्ष ने स्वयं अपनी मानसिकता को सामने रखा है। महाना ने आरोप लगाया कि धार्मिक परंपराओं को राजनीति से जोड़ना भारतीय संस्कृति की मूल भावना के विपरीत है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले पर बोले महाना
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े मामले पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकरण की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। जांच एजेंसी पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस मामले की निगरानी कर रहे हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने लोगों से जांच प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखने की अपील की।
अयोध्या में संत समाज ने भी जताया विरोध
वहीं, संसद परिसर के बाहर हुए प्रदर्शन को लेकर अयोध्या के साधु-संतों में भी नाराजगी देखने को मिली। तपस्वी छावनी के महंत परमहंस आचार्य ने सांसद पप्पू यादव के प्रदर्शन का विरोध किया और अपना विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने आरोप लगाया कि संतों की वेशभूषा और परंपरा का इस्तेमाल राजनीतिक गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने विपक्ष के कुछ नेताओं की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
नेताओं को भेजा गया कानूनी नोटिस
इस मामले में राजनीतिक और कानूनी प्रतिक्रिया भी सामने आई है। बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और सांसद अवधेश प्रसाद को कानूनी नोटिस भेजने की जानकारी दी।
नोटिस में आरोप लगाया गया कि साधु-संतों के स्वरूप का राजनीतिक प्रदर्शन धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। इसमें कहा गया कि भारतीय संस्कृति में संतों का स्थान अत्यंत सम्मानजनक है और उनकी वेशभूषा को राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ना उचित नहीं है।
नोटिस में संबंधित नेताओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, अपने कृत्य पर खेद व्यक्त करने और भविष्य में धार्मिक प्रतीकों व संत परंपरा का राजनीतिक उपयोग नहीं करने का आश्वासन देने की मांग की गई है।
अयोध्या की धार्मिक मर्यादा का मुद्दा उठाया
डॉ. रजनीश सिंह ने कहा कि अयोध्या भगवान श्रीराम की पावन नगरी है और इसकी धार्मिक मर्यादा का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अयोध्या किसी एक व्यक्ति, दल या संगठन की नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
100 से अधिक संतों ने किया प्रदर्शन
राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर संसद परिसर में हुए प्रदर्शन के विरोध में अयोध्या में भी संत समाज ने प्रदर्शन किया। जानकारी के अनुसार, हनुमान गुफा क्षेत्र में बड़ी संख्या में संत एकत्र हुए और उन्होंने विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शन में 100 से अधिक संतों की मौजूदगी बताई गई। इस दौरान कई संतों और स्थानीय लोगों ने अपनी नाराजगी व्यक्त की। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन सौंपकर मामले में कार्रवाई की मांग की।
इस मौके पर महंत कमल नयन दास, महंत राजकुमार दास, महंत गौरी शंकर दास, महंत परशुराम दास, महंत कमला दास सहित कई संत और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
धार्मिक भावनाओं और राजनीति के बीच बहस तेज
इस पूरे मामले के बाद धार्मिक प्रतीकों, संत परंपरा और राजनीति के संबंध को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक ओर जहां कुछ लोग इसे राजनीतिक विरोध का हिस्सा बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संत समाज और धार्मिक संगठनों ने इसे आस्था से जुड़ा विषय बताया है।
हालांकि, राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल राजनीतिक बयानबाजी और संत समाज की प्रतिक्रियाओं के कारण यह मामला चर्चा में बना हुआ है।
एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं
अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने जहां संत परंपरा के सम्मान की बात कही, वहीं संत समाज ने भी अपने तरीके से विरोध दर्ज कराया है। दूसरी ओर, जांच एजेंसियां मामले की पड़ताल कर रही हैं। ऐसे में सभी पक्षों की नजर अब जांच के निष्कर्ष और आगे की कार्रवाई पर बनी हुई है।

