कानपुर में विकास कार्यों में देरी पर पार्षदों का प्रदर्शन, अधिशासी अभियंता को हटाने की मांग तेज

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी

कानपुर। शहर में विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर अब जनप्रतिनिधियों का आक्रोश सामने आने लगा है। नगर निगम के जोन-1 क्षेत्र में लंबे समय से लंबित पड़े विकास कार्यों, टेंडर प्रक्रिया में देरी और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मामलों का समाधान नहीं होने के विरोध में शनिवार को कई पार्षदों ने अधिशासी अभियंता कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया।

इस प्रदर्शन में भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद शामिल हुए। अलग-अलग राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधियों का एक मंच पर आना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि शहर के विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर सभी पार्षदों की चिंता एक जैसी है। पार्षदों का कहना है कि विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है और उन्हें अपने क्षेत्रों में लोगों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है।

विकास कार्यों में देरी को लेकर पार्षदों में नाराजगी

धरने के दौरान पार्षदों ने नगर निगम जोन-1 के अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव पर विकास कार्यों में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। पार्षदों का कहना था कि कई ऐसे कार्य हैं, जिन्हें स्वीकृति मिलने के बाद भी जमीन पर शुरू नहीं कराया जा सका है। वहीं, कई जरूरी कार्य फाइलों और प्रक्रियाओं में उलझे हुए हैं।

पार्षदों ने आरोप लगाया कि विकास कार्यों से संबंधित फाइलों को तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया को पूरा करने में अनावश्यक देरी की जा रही है। इसके अलावा छोटे लेकिन जरूरी कार्यों को भी प्राथमिकता नहीं दी जा रही है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने मांग की कि विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और अधिशासी अभियंता आलोक श्रीवास्तव को जोन-1 से हटाया जाए।

भाजपा, सपा, कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद हुए एकजुट

धरने की खास बात यह रही कि इसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों के पार्षदों ने एक साथ अपनी आवाज उठाई। सामान्य तौर पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद देखने को मिलते हैं, लेकिन शहर के विकास से जुड़े इस मुद्दे पर सभी पार्षद एकजुट नजर आए।

पार्षदों का कहना था कि जनता ने उन्हें अपने-अपने वार्डों के विकास के लिए चुना है। ऐसे में जब स्वीकृत कार्य समय पर पूरे नहीं होते तो जनता की नाराजगी का सामना जनप्रतिनिधियों को करना पड़ता है। इसलिए नगर निगम प्रशासन को विकास कार्यों की निगरानी और समयबद्ध तरीके से पूरा कराने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

विधायक अमिताभ बाजपेई ने भी दिया समर्थन

धरने की जानकारी मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के विधायक अमिताभ बाजपेई भी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे पार्षदों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में देरी किसी भी शहर के लिए चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा कि नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों को जनता से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना चाहिए। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाना जरूरी है।

विधायक ने पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, ताकि शहर के विकास कार्यों को गति मिल सके।

पार्षदों ने लगाए कई आरोप

धरने के दौरान पार्षदों ने अधिशासी अभियंता की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए। उनके अनुसार विकास कार्यों में देरी के पीछे कई प्रशासनिक कमियां जिम्मेदार हैं।

पार्षदों द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप इस प्रकार हैं—

  • विकास कार्यों की फाइल तैयार करने में देरी।
  • टेंडर प्रक्रिया को समय पर पूरा नहीं करना।
  • छोटे और जरूरी कार्यों की अनदेखी।
  • जनप्रतिनिधियों की शिकायतों पर उचित ध्यान नहीं देना।
  • विकास कार्यों के रिकॉर्ड और प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत।

पार्षदों का कहना है कि यदि इन समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया तो आने वाले समय में कई वार्डों में विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

सड़क, नाली और अन्य कार्यों को जल्द पूरा कराने की मांग

धरने में शामिल पार्षदों ने बताया कि उनके क्षेत्रों में सड़क निर्माण, नाली मरम्मत, जल निकासी व्यवस्था, इंटरलॉकिंग और अन्य छोटे-बड़े विकास कार्य लंबे समय से लंबित हैं।

उन्होंने नगर निगम प्रशासन से मांग की कि सभी लंबित कार्यों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उन्हें पूरा कराया जाए। इसके अलावा प्रत्येक कार्य की समय सीमा भी तय की जाए, ताकि जनता को जल्द राहत मिल सके।

पार्षदों का कहना है कि विकास कार्यों की नियमित समीक्षा होने से समस्याओं का समाधान तेजी से किया जा सकता है।

मुख्य अभियंता के आश्वासन के बाद खत्म हुआ धरना

धरने की सूचना मिलने के बाद नगर निगम के मुख्य अभियंता जैदी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे पार्षदों से बातचीत की। उन्होंने पार्षदों की समस्याओं को सुना और जल्द समाधान का भरोसा दिया।

मुख्य अभियंता ने आश्वासन दिया कि लंबित विकास कार्यों की समीक्षा कराई जाएगी और प्राथमिकता वाले कार्यों को एक सप्ताह के भीतर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इसके बाद पार्षदों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय में कार्यों में सुधार नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन करने पर विचार कर सकते हैं।

विकास कार्यों में समयबद्धता जरूरी

नगर विकास से जुड़े जानकारों का मानना है कि किसी भी शहर के बेहतर विकास के लिए योजनाओं का समय पर पूरा होना बेहद जरूरी है। नगर निगम जैसे स्थानीय निकायों में यदि फाइल प्रक्रिया, टेंडर और निर्माण कार्यों में देरी होती है तो इसका सीधा प्रभाव आम नागरिकों की सुविधाओं पर पड़ता है।

इसलिए जरूरी है कि विकास योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाए और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। इससे न केवल कार्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि जनता का भरोसा भी मजबूत होगा।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी

किसी भी शहर के विकास के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल होना आवश्यक है। यदि दोनों पक्ष मिलकर काम करते हैं तो विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं को आसानी से दूर किया जा सकता है।

वहीं, संवाद की कमी होने पर योजनाओं की गति प्रभावित होती है और इसका नुकसान सीधे जनता को उठाना पड़ता है। इसलिए पारदर्शी व्यवस्था, समय पर निर्णय और नियमित निगरानी विकास कार्यों को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कानपुर नगर निगम जोन-1 में विकास कार्यों में देरी को लेकर हुआ पार्षदों का प्रदर्शन प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। विभिन्न दलों के पार्षदों का एकजुट होकर आवाज उठाना दर्शाता है कि शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे सभी के लिए अहम हैं।

अब सभी की नजरें इस बात पर रहेंगी कि मुख्य अभियंता द्वारा दिए गए एक सप्ताह के आश्वासन के बाद लंबित कार्यों में कितनी तेजी आती है और पार्षदों की शिकायतों का समाधान किस तरह किया जाता है। यदि समयबद्ध तरीके से कार्रवाई होती है तो इससे कानपुर शहर के विकास कार्यों को नई गति मिल सकती है।

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