पप्पू यादव मामले में संत समाज की चेतावनी, निलंबन की मांग को लेकर भूख हड़ताल का ऐलान
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
गोवर्धन: पप्पू यादव मामले को लेकर संत समाज में नाराजगी सामने आई है। गोवर्धन स्थित चित्रकूट पीठ आश्रम, जुल्हेंदी में आयोजित संत समाज की बैठक में इस विषय पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान संतों ने मांग की कि यदि तीन दिन के भीतर पप्पू यादव के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई नहीं की जाती है तो संत समाज भूख हड़ताल करेगा।
बैठक में मौजूद संतों ने इस मामले को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और लोकसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग की। संत समाज का कहना है कि इस प्रकरण से धार्मिक परंपराओं और संसद की गरिमा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
संत समाज ने बैठक में लिया निर्णय
चित्रकूट पीठ आश्रम में आयोजित बैठक में कई संत और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। बैठक के दौरान पप्पू यादव से जुड़े मामले पर विस्तार से चर्चा की गई।
संत समाज की ओर से कहा गया कि मामले में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। संतों ने निर्णय लिया कि यदि तीन दिनों के भीतर उनकी मांग पर कोई कदम नहीं उठाया गया तो वह शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
इस दौरान संतों ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने और संबंधित संस्थाओं से कार्रवाई की अपील करने की बात कही।
संतों ने निलंबन की उठाई मांग
बैठक में सच्चिदानंद महाराज ने कहा कि पप्पू यादव द्वारा संतों की वेशभूषा को लेकर किए गए कार्य से धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि संत समाज इसे सनातन परंपरा के सम्मान से जोड़कर देख रहा है।
वहीं, श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा कि इस मामले में संसद की गरिमा को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से पप्पू यादव के निलंबन की मांग की।
उन्होंने कहा कि संत समाज इस मामले से आहत है और अपनी मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति तय करेगा।
संसद की गरिमा को लेकर जताई चिंता
बैठक में राहुल शास्त्री ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संसद देश का सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान है और उसकी गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
उन्होंने मांग की कि मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि को ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे संसद या समाज में विवाद की स्थिति उत्पन्न हो।
संत समाज ने रखी अपनी बात
बैठक में उपस्थित साधु-संतों ने एक स्वर में अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं और सामाजिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
संत समाज ने स्पष्ट किया कि वह अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ेगा। भूख हड़ताल का निर्णय भी इसी क्रम में लिया गया है।
संतों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि अपनी आपत्ति को संबंधित संस्थाओं तक पहुंचाना है।
बैठक में कई संत रहे मौजूद
इस बैठक में कई साधु-संत और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित रहे। इनमें चंद्रशेखर द्विवेदी, पवन देव महाराज, राजेश शास्त्री, अश्विनी पंडित और त्रिलोकी नाथ सहित अन्य लोग शामिल रहे।
बैठक के दौरान सभी उपस्थित संतों ने मामले को लेकर अपनी राय रखी और आगे की रणनीति पर चर्चा की।
आगे की कार्रवाई पर रहेगी नजर
फिलहाल संत समाज की ओर से तीन दिन का समय दिया गया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित पक्ष की ओर से इस मामले में क्या कदम उठाया जाता है।
वहीं, लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी विवाद या आपत्ति के समाधान के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे मामलों में संबंधित संस्थाओं द्वारा नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाता है।
पप्पू यादव मामले को लेकर संत समाज की बैठक और भूख हड़ताल की चेतावनी ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

