रणथंभौर टाइगर वीक 2026: वाइल्डलाइफ एसओएस को एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड, संरक्षण प्रयासों को मिला सम्मान
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा/रणथंभौर: 5वें रॉयल रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 के दौरान वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस को ‘टाइगर प्रोटेक्शन एंड एंटी-पोचिंग एक्सीलेंस अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान संगठन को बाघों के संरक्षण, अवैध शिकार पर रोक और वन्यजीवों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने में किए गए निरंतर प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान देश-विदेश के संरक्षण विशेषज्ञों, वन अधिकारियों, नीति-निर्माताओं और वन्यजीव प्रेमियों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य भारत में बाघ संरक्षण की उपलब्धियों को रेखांकित करना और भविष्य की चुनौतियों पर चर्चा करना था।
संरक्षण प्रयासों को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने संगठन की ओर से यह सम्मान ग्रहण किया। इस अवसर पर उन्होंने एंटी-पोचिंग प्रयासों और बाघ संरक्षण पर विस्तृत प्रस्तुति भी दी।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि पूरी टीम, वन विभाग के सहयोगियों और उन समुदायों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है जो लगातार वन्यजीव संरक्षण में योगदान दे रहे हैं।
एंटी-पोचिंग प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका
वाइल्डलाइफ एसओएस पिछले तीन दशकों से भारत में अवैध वन्यजीव व्यापार और शिकार पर रोक लगाने के लिए कार्य कर रहा है। संगठन की एंटी-पोचिंग इकाई ‘फॉरेस्ट वॉच’ वन विभाग, पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई में सहयोग करती है।
इसके अलावा, यह इकाई वन्यजीव तस्करों के खिलाफ छापेमारी, फंदों की बरामदगी और संरक्षित क्षेत्रों में निगरानी जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे कई संगठित शिकार गिरोहों का पर्दाफाश संभव हुआ है।
अंतरराज्यीय अभियानों में सहयोग
इसी क्रम में, संगठन ने सीबीआई, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB), हरियाणा पुलिस और वन विभाग के साथ मिलकर कई संयुक्त अभियान चलाए हैं। इन अभियानों के दौरान वन्यजीव अपराधों में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी भी की गई है।
विशेष रूप से, तमिलनाडु में बाघ शिकार से जुड़े एक बड़े मामले में दोषसिद्धि को संरक्षण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।
टाइगर वीक में संरक्षण पर व्यापक चर्चा
कार्यक्रम का उद्घाटन दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्मेश शर्मा ने किया। उन्होंने वन्यजीव संरक्षण और कानूनी कार्रवाई के महत्व पर प्रकाश डाला।
इसके साथ ही, उन्होंने कहा कि वन्यजीव अपराधों के खिलाफ समयबद्ध और प्रभावी कानूनी कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल अपराधियों पर रोक लगती है, बल्कि संरक्षण प्रयास भी मजबूत होते हैं।
विशेषज्ञों और संगठनों की भागीदारी
इस आयोजन में संरक्षणविदों, फोटोग्राफरों, शोधकर्ताओं और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। सभी ने बाघ संरक्षण से जुड़ी चुनौतियों और समाधान पर अपने विचार साझा किए।
इसके अलावा, सम्मेलन में संरक्षण नेतृत्व, पत्रकारिता और आजीवन योगदान जैसी विभिन्न श्रेणियों में भी सम्मान प्रदान किए गए।
वाइल्डलाइफ एसओएस का दीर्घकालिक योगदान
वाइल्डलाइफ एसओएस एक गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 1995 में हुई थी। यह संस्था भारत में संकटग्रस्त वन्यजीवों के बचाव, पुनर्वास और संरक्षण के लिए कार्य करती है।
साथ ही, संगठन मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने, अवैध व्यापार रोकने और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर संरक्षण को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाता है।
हाथी संरक्षण और जनजागरूकता अभियान
इसके अलावा, संगठन ‘भिक्षावृत्ति में उपयोग किए जाने वाले हाथियों के विरुद्ध अभियान’ चलाकर कैद हाथियों के शोषण को समाप्त करने की दिशा में भी कार्य कर रहा है। यह अभियान हाथियों के बचाव और उनके पुनर्वास पर केंद्रित है।
संगठन पर्यटन क्षेत्र में भी जागरूकता फैलाने के लिए ‘रिफ्यूज टू राइड’ जैसे अभियानों का समर्थन करता है, जिससे कैद हाथियों की स्थिति में सुधार लाया जा सके।
कुल मिलाकर, रणथंभौर इंटरनेशनल टाइगर वीक 2026 में वाइल्डलाइफ एसओएस को मिला यह सम्मान भारत में वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह पुरस्कार न केवल संगठन के कार्यों की सराहना है, बल्कि बाघों और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक मजबूत संदेश भी देता है।

