बांदा में पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन: विद्युत विभाग में सेवा आयु 55 वर्ष करने के फैसले का विरोध, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

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रिपोर्ट – पंकज त्रिपाठी 

बांदा: विद्युत विभाग में संविदा एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत कार्यरत पूर्व सैनिकों की सेवा आयु 60 वर्ष से घटाकर 55 वर्ष किए जाने के प्रस्तावित निर्णय के विरोध में शुक्रवार को बांदा में पूर्व सैनिकों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया, जिसमें सरकार से निर्णय पर पुनर्विचार करने और पूर्व की तरह 60 वर्ष की सेवा आयु बहाल करने की मांग की गई।

पूर्व सैनिकों का कहना है कि यदि सेवा आयु घटाई जाती है तो इसका सीधा असर सैकड़ों पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की आजीविका पर पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए इस आदेश को वापस लेने की अपील की।

जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाई मांग

पूर्व सैनिकों का प्रतिनिधिमंडल जिला मुख्यालय पहुंचा और जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि विद्युत विभाग में लंबे समय से कार्य कर रहे पूर्व सैनिक अनुशासन, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अचानक सेवा आयु 60 वर्ष से घटाकर 55 वर्ष करना न केवल उनके रोजगार को प्रभावित करेगा, बल्कि उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा कर सकता है। इसलिए सरकार इस निर्णय पर पुनर्विचार करे।

सेवा आयु घटाने पर जताई नाराजगी

पूर्व सैनिकों ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार वे 60 वर्ष की आयु तक सेवाएं दे रहे हैं। यदि इसे घटाकर 55 वर्ष कर दिया जाता है तो कई कर्मचारियों को समय से पहले सेवा से बाहर होना पड़ेगा।

उनका कहना है कि अधिकांश पूर्व सैनिक सेवानिवृत्ति के बाद परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए विद्युत विभाग में कार्य कर रहे हैं। ऐसे में सेवा अवधि कम होने से उनकी आय का महत्वपूर्ण स्रोत प्रभावित होगा।

रोजगार और परिवारों की आजीविका पर असर की आशंका

ज्ञापन में पूर्व सैनिकों ने दावा किया कि प्रस्तावित निर्णय लागू होने पर प्रदेश भर में बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक प्रभावित होंगे। इसके परिणामस्वरूप अनेक परिवारों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व सैनिक देश की सेवा करने के बाद समाज और विभिन्न सरकारी व्यवस्थाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इसलिए उनके हितों का संरक्षण किया जाना आवश्यक है।

निर्णय वापस लेने की मांग

पूर्व सैनिकों ने सरकार से अनुरोध किया कि सेवा आयु घटाने के आदेश को वापस लिया जाए और पूर्व की व्यवस्था के अनुसार 60 वर्ष की आयु सीमा को यथावत रखा जाए।

उनका कहना है कि इससे न केवल अनुभवी कर्मचारियों की सेवाओं का लाभ विभाग को मिलता रहेगा, बल्कि पूर्व सैनिकों के परिवारों की आर्थिक सुरक्षा भी बनी रहेगी।

सरकार से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील

ज्ञापन में पूर्व सैनिकों ने मुख्यमंत्री से इस विषय पर शीघ्र हस्तक्षेप करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार यदि समय रहते सकारात्मक निर्णय लेती है तो इससे बड़ी संख्या में पूर्व सैनिकों को राहत मिलेगी।

उन्होंने यह भी भरोसा जताया कि राज्य सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनेगी और उचित समाधान निकालने का प्रयास करेगी।

शांतिपूर्ण तरीके से रखा पक्ष

ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व सैनिकों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांगें प्रशासन के समक्ष रखीं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी समस्याएं पहुंचाना है, ताकि इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जा सके।

इस दौरान पूर्व सैनिकों ने यह भी कहा कि वे सरकार के निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन सेवा आयु कम करने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार आवश्यक है।

क्या है पूर्व सैनिकों की प्रमुख मांगें?

  • सेवा आयु 55 वर्ष करने के प्रस्तावित निर्णय को वापस लिया जाए।
  • विद्युत विभाग में पूर्व की तरह 60 वर्ष की सेवा आयु बहाल की जाए।
  • पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के रोजगार एवं आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
  • सरकार इस विषय पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर राहत प्रदान करे।

बांदा में पूर्व सैनिकों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन विद्युत विभाग में सेवा आयु से जुड़े मुद्दे को लेकर उनकी चिंता को दर्शाता है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि सेवा आयु कम होने से रोजगार और पारिवारिक आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। वहीं, उन्होंने सरकार से 60 वर्ष की आयु सीमा बहाल करने और इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। अब इस मामले में राज्य सरकार की ओर से लिए जाने वाले निर्णय पर संबंधित कर्मचारियों और पूर्व सैनिकों की नजर बनी हुई है।

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