राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे का सरकार पर हमला, बोले- 12 साल में सवा लाख छात्रों ने की आत्महत्या, नया बिल पर्याप्त नहीं
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में देश में लगभग 1.25 लाख छात्रों ने आत्महत्या की है और कहा कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी गंभीर चुनौती का संकेत है। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा लाया गया नया विधेयक केवल आंकड़े प्रस्तुत करता है, जबकि पेपर लीक जैसी समस्याओं के मूल कारणों के समाधान के लिए इसमें पर्याप्त प्रावधान नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे में कानून का उद्देश्य केवल कठोर दंड तय करना नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था भी विकसित करनी चाहिए।
पेपर लीक विधेयक पर उठाए सवाल
राज्यसभा में चर्चा के दौरान खड़गे ने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तुत संशोधन विधेयक में कई ऐसे पहलुओं का अभाव है, जिनसे संगठित तरीके से होने वाले पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून का स्वरूप ऐसा होना चाहिए जिससे अपराध की पूरी श्रृंखला पर कार्रवाई हो, न कि केवल कुछ मामलों में दंड का प्रावधान बढ़ा दिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच और जवाबदेही की मजबूत व्यवस्था नहीं होगी तो पेपर लीक कराने वाले संगठित गिरोह कानून की कमियों का लाभ उठाते रहेंगे। उनके अनुसार छात्रों को न्याय तभी मिलेगा, जब परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा उठाया
अपने संबोधन में खड़गे ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में लगभग सवा लाख छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने का आंकड़ा चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव, बार-बार पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और अनिश्चितता युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं ताकि युवाओं का विश्वास बहाल हो और उन्हें निष्पक्ष अवसर मिल सके। साथ ही उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र को भी मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।
सभापति और खड़गे के बीच हल्का संवाद
चर्चा के दौरान एक हल्का-फुल्का क्षण भी देखने को मिला। जब राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने खड़गे से पूछा कि उन्हें और कितना समय चाहिए, तब उन्होंने कहा कि उनका निर्धारित समय पूरा हो चुका है, इसलिए यह प्रश्न पूछा जा रहा है।
इस पर खड़गे ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “आप जितना दे दें।” उनके इस जवाब पर सदन में मौजूद सदस्यों के बीच ठहाके गूंज उठे। इसके बाद उन्होंने अपना भाषण जारी रखा और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
केंद्र सरकार पर साधा निशाना
अपने संबोधन में खड़गे ने पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल सख्त दंड की घोषणा करने के बजाय ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे और युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इस दिशा में ठोस संस्थागत सुधार आवश्यक हैं।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य संगठित पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और अन्य अनुचित गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है। संशोधित प्रावधानों के तहत गंभीर मामलों में 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
सरकार का दावा है कि यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने और अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
शिक्षा व्यवस्था पर व्यापक बहस
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पेपर लीक का मुद्दा अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और युवाओं के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय विषय बन चुका है। संसद में हुई चर्चा से स्पष्ट है कि सभी पक्ष परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने की आवश्यकता स्वीकार कर रहे हैं, हालांकि समाधान के तरीकों पर मतभेद बने हुए हैं।
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे ने पेपर लीक विधेयक पर गंभीर सवाल उठाते हुए छात्रों की आत्महत्या, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और सरकार की नीतियों पर चर्चा की। वहीं सरकार का कहना है कि नया संशोधन कानून पेपर लीक जैसे संगठित अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए बनाया गया है। अब इस कानून के लागू होने के बाद इसके प्रभाव और क्रियान्वयन पर सभी की नजर रहेगी।

