Indian Railways की नई पहल: अब TTE करेंगे Body Worn Camera से टिकट जांच, बढ़ेगी पारदर्शिता

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रिपोर्ट- अमित सिंह यादव

प्रयागराजः भारतीय रेलवे लगातार अपनी सेवाओं को आधुनिक और यात्रियों के अनुकूल बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है। इसी क्रम में रेलवे ने टिकट जांच प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने के लिए एक नई तकनीक की शुरुआत की है। उत्तर मध्य रेलवे ने दो प्रमुख ट्रेनों में टिकट चेकिंग स्टाफ यानी टीटीई (Train Ticket Examiner) को बॉडी वॉर्न कैमरे से लैस किया है। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों और टीटीई के बीच होने वाले विवादों को कम करना तथा टिकट जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाना है।

उत्तर मध्य रेलवे की ओर से शुरू की गई यह व्यवस्था फिलहाल प्रयोग के तौर पर लागू की गई है। यदि इसका परिणाम सकारात्मक रहता है तो आने वाले समय में इसे अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों में भी विस्तार दिया जा सकता है। रेलवे का मानना है कि डिजिटल रिकॉर्डिंग की सुविधा से टिकट जांच व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ेंगी।

प्रयागराज एक्सप्रेस और श्रमशक्ति एक्सप्रेस में शुरू हुआ ट्रायल

उत्तर मध्य रेलवे ने ट्रेन संख्या 12417-12418 प्रयागराज एक्सप्रेस और 12451-12452 श्रमशक्ति एक्सप्रेस में बॉडी वॉर्न कैमरे का ट्रायल शुरू किया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह व्यवस्था शुक्रवार रात से लागू की गई है।

इस नई व्यवस्था के तहत ड्यूटी पर तैनात टीटीई अपने कंधे पर बॉडी वॉर्न कैमरा लगाए रहेंगे। टिकट जांच के दौरान यात्रियों से बातचीत, टिकट सत्यापन और अन्य संबंधित गतिविधियां कैमरे में रिकॉर्ड होंगी। इससे भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में घटना की वास्तविक जानकारी प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक के निर्देशन और प्रयागराज मंडल के डीआरएम रजनीश अग्रवाल के नेतृत्व में इस तकनीक को लागू किया गया है। रेलवे प्रशासन का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सेवा देने के साथ-साथ कर्मचारियों के कामकाज में भी सुधार लाना है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं बॉडी वॉर्न कैमरे

रेलवे द्वारा उपलब्ध कराए गए बॉडी वॉर्न कैमरों में कई आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। प्रयागराज मंडल के पीआरओ अमित सिंह के अनुसार, इन कैमरों में एचडी वीडियो रिकॉर्डिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, नाइट विजन, लंबी बैटरी बैकअप और टैंपर-प्रूफ रिकॉर्डिंग सिस्टम जैसी सुविधाएं मौजूद हैं।

इन सुविधाओं के कारण रात के समय भी टीटीई कोच और कूपे में आसानी से टिकट जांच कर सकेंगे। इसके अलावा रिकॉर्डिंग सिस्टम में किसी तरह की छेड़छाड़ की संभावना को कम करने के लिए विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

दरअसल, रेलवे में टिकट जांच एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। कई बार यात्रियों और टिकट जांच कर्मचारियों के बीच गलतफहमी या विवाद की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में वीडियो रिकॉर्डिंग एक निष्पक्ष माध्यम के रूप में काम करेगी।

शिकायतों के समाधान में मिलेगी मदद

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बॉडी वॉर्न कैमरा व्यवस्था लागू होने से शिकायतों के निपटारे में भी तेजी आएगी। यदि किसी यात्री या कर्मचारी की ओर से कोई शिकायत दर्ज कराई जाती है तो रिकॉर्डिंग के आधार पर मामले की जांच की जा सकेगी।

इसके अलावा, यह व्यवस्था फर्जी शिकायतों पर भी रोक लगाने में सहायक होगी। क्योंकि टिकट जांच के दौरान हुई पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे रेलवे प्रशासन को सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।

साथ ही, कर्मचारियों के व्यवहार और सेवा गुणवत्ता का मूल्यांकन भी बेहतर तरीके से किया जा सकेगा। रेलवे भविष्य में इस तकनीक के उपयोग से यात्रियों को और अधिक सुरक्षित एवं भरोसेमंद यात्रा अनुभव देने की योजना पर काम कर रहा है।

रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में भी उपयोगी साबित होगी तकनीक

बॉडी वॉर्न कैमरे केवल टिकट जांच प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षा से जुड़े मामलों में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड की गई वीडियो फुटेज रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और अन्य जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण प्रमाण बन सकती है।

इसके अलावा, रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों दोनों के अधिकारों की रक्षा में भी यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पारदर्शिता बढ़ने से यात्रियों का रेलवे व्यवस्था के प्रति भरोसा और मजबूत होगा।

कासगंज-दिल्ली इंटरसिटी में भी बड़ा बदलाव

वहीं, रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कासगंज से नई दिल्ली जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस में भी बदलाव करने का फैसला लिया है। 22 अगस्त से इस ट्रेन का संचालन आधुनिक एलएचबी (Linke Hofmann Busch) कोच से किया जाएगा।

अभी तक इस ट्रेन में 18 आईसीएफ कोच लगाए जाते थे, लेकिन नई एलएचबी रैक में 16 कोच होंगे। रेलवे के अनुसार, एलएचबी कोच यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित माने जाते हैं और इनमें यात्रा के दौरान बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।

एलएचबी कोच की डिजाइन आधुनिक तकनीक पर आधारित होती है, जिससे यात्रियों को आरामदायक सफर का अनुभव मिलता है। इसके अलावा, इन कोचों में सुरक्षा मानकों को भी पहले से बेहतर बनाया गया है।

यात्रियों के लिए बेहतर सुविधाओं की दिशा में कदम

कासगंज-दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस वर्तमान में कासगंज से रात 2:50 बजे रवाना होकर बरेली और मुरादाबाद होते हुए नई दिल्ली पहुंचती है। रेलवे का कहना है कि कोच परिवर्तन के बाद यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।

कुल मिलाकर, भारतीय रेलवे की ये दोनों पहलें यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर की गई हैं। एक ओर जहां बॉडी वॉर्न कैमरे से टिकट जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, वहीं दूसरी ओर एलएचबी कोच से यात्रा सुविधाओं में सुधार होगा।

इस तरह रेलवे तकनीक और आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से अपनी सेवाओं को लगातार बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में ऐसी कई नई पहलें यात्रियों के अनुभव को और बेहतर बना सकती हैं।

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