टीबी मुक्त भारत अभियान को नई गति: जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल के सांसदों के साथ की रणनीतिक बैठक
vikas chauhan July 30, 2026
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: भारत को वर्ष 2025 तक टीबी (तपेदिक) मुक्त राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में केंद्र सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने संसद के मानसून सत्र के दौरान नई दिल्ली स्थित विस्तारित संसद भवन एनेक्सी में पश्चिम बंगाल के सांसदों के साथ “टीबी मुक्त भारत के लिए सांसदों की पहल” विषय पर एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर सांसदों के साथ टीबी उन्मूलन की दिशा में चल रही योजनाओं, जनभागीदारी, जागरूकता अभियान और स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की गई।
टीबी मुक्त भारत अभियान को जनआंदोलन बनाने पर जोर
बैठक के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीबी जैसी बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण केवल सरकारी योजनाओं के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सांसद अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने, समय पर जांच कराने और उपचार के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जब जनप्रतिनिधि स्वयं इस अभियान से जुड़ते हैं, तब समाज में स्वास्थ्य संबंधी संदेश अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचता है। यही कारण है कि केंद्र सरकार “टीबी मुक्त भारत के लिए सांसदों की पहल” को एक जनभागीदारी आधारित अभियान के रूप में आगे बढ़ा रही है।
समय पर पहचान और उपचार सबसे प्रभावी उपाय
बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि तपेदिक का समय पर पता लगने और नियमित उपचार से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। इसलिए सरकार लगातार जांच सुविधाओं का विस्तार कर रही है तथा आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जा रहा है।
इसके साथ ही यह भी चर्चा की गई कि ग्रामीण क्षेत्रों, दूरस्थ इलाकों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और अधिक मजबूत बनाई जाए ताकि कोई भी संभावित मरीज उपचार से वंचित न रहे।
सांसदों की भूमिका होगी निर्णायक
बैठक में मौजूद सांसदों से आग्रह किया गया कि वे अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा करें। साथ ही स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करें।
इसके अतिरिक्त सांसदों को समुदाय स्तर पर टीबी मरीजों को सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराने, पोषण सहायता योजनाओं के बारे में जानकारी देने तथा उपचार पूरा कराने के लिए प्रेरित करने पर भी बल दिया गया।
जनभागीदारी से मिलेगा अभियान को नया बल
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल होती हैं जब उनमें जनता की सक्रिय भागीदारी शामिल हो। इसलिए टीबी मुक्त भारत अभियान को केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित न रखते हुए इसे सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि, नगर निकाय, स्वयं सहायता समूह, शिक्षण संस्थान, युवा संगठन और सामाजिक संस्थाएं भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इससे बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और समय पर जांच एवं उपचार को बढ़ावा मिलेगा।
आधुनिक स्वास्थ्य ढांचे पर सरकार का विशेष फोकस
बैठक में यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए निरंतर निवेश कर रही है। डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली, आधुनिक प्रयोगशालाएं, उन्नत जांच सुविधाएं तथा प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों के माध्यम से टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को मजबूत किया जा रहा है।
इसके अलावा मरीजों की निगरानी, उपचार की प्रगति और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।
जागरूकता अभियान को मिलेगा विस्तार
बैठक के दौरान इस बात पर भी सहमति बनी कि टीबी से जुड़े सामाजिक भ्रम और गलत धारणाओं को दूर करने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है।
इसके लिए जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और मीडिया के सहयोग से लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया गया। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी जागरूकता बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा हुई।
पश्चिम बंगाल के सांसदों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
बैठक में पश्चिम बंगाल के सांसदों ने अपने क्षेत्रों के अनुभव साझा करते हुए कई उपयोगी सुझाव प्रस्तुत किए। उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जागरूकता कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा मरीजों तक सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने के संबंध में सुझाव दिए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इन सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार सभी राज्यों और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है।
केंद्र सरकार की प्राथमिकता में स्वास्थ्य
बैठक के दौरान यह भी दोहराया गया कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। टीबी उन्मूलन कार्यक्रम इसी व्यापक स्वास्थ्य दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सरकार का उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि समय पर पहचान, बेहतर पोषण, सामाजिक सहयोग और निरंतर निगरानी के माध्यम से संक्रमण की श्रृंखला को भी रोकना है।
सामूहिक प्रयासों से बनेगा टीबी मुक्त भारत
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि प्रत्येक सांसद अपने संसदीय क्षेत्र में इस अभियान को जनआंदोलन का रूप देने का प्रयास करें। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी, जांच की संख्या में वृद्धि होगी और मरीजों को समय पर उपचार मिल सकेगा।
नई दिल्ली में आयोजित “टीबी मुक्त भारत के लिए सांसदों की पहल” विषयक बैठक ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार टीबी उन्मूलन को सर्वोच्च स्वास्थ्य प्राथमिकताओं में शामिल कर चुकी है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी, जनजागरूकता, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं और सामूहिक प्रयासों पर विशेष बल दिया गया।
यदि केंद्र और राज्य सरकारें, जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य विभाग तथा समाज के विभिन्न वर्ग इसी प्रकार समन्वित रूप से कार्य करते रहे, तो भारत टीबी उन्मूलन के अपने लक्ष्य की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है। जनभागीदारी, समय पर जांच, नियमित उपचार और जागरूकता ही इस अभियान की सफलता की सबसे मजबूत आधारशिला साबित होंगे।

