2027 से पहले CORSIA अनुपालन की तैयारी तेज, भारत में सतत विमानन ईंधन (SAF) इकोसिस्टम को मिलेगा नया विस्तार, जानिए पूरी रिपोर्ट

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारत सरकार ने विमानन क्षेत्र को अधिक पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की, जिसमें भारत में सतत विमानन ईंधन (Sustainable Aviation Fuel – SAF) के उत्पादन, आपूर्ति, प्रमाणन और उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) की कार्बन ऑफसेटिंग एंड रिडक्शन स्कीम फॉर इंटरनेशनल एविएशन (CORSIA) के अनिवार्य चरण की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि भारत 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले CORSIA के अनिवार्य चरण के लिए पूरी तरह तैयार रहे। इसके साथ ही देश में एक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर SAF इकोसिस्टम विकसित करने की दिशा में विभिन्न मंत्रालयों और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

कई मंत्रालयों और प्रमुख संस्थानों ने लिया भाग

बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सचिव सहित पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA), भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (AAI), भारतीय मानक ब्यूरो (BIS), ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE), तेल विपणन कंपनियों (OMCs), विभिन्न एयरलाइंस, हवाई अड्डा संचालकों तथा अन्य प्रमुख हितधारकों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

इस दौरान देशभर में SAF उत्पादन परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, उनकी प्रगति और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही यह भी समीक्षा की गई कि वर्ष 2027 से संभावित मांग को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में सतत विमानन ईंधन की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित की जाए।

SAF उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला पर विशेष जोर

बैठक में तेल विपणन कंपनियों द्वारा स्थापित की जा रही विभिन्न SAF उत्पादन इकाइयों की प्रगति की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त उत्पादन, प्रमाणन, भंडारण, परिवहन और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

राम मोहन नायडू बोले— SAF केवल अनुपालन नहीं, राष्ट्रीय अवसर

बैठक को संबोधित करते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि भारत केवल अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करने के लिए ही SAF को नहीं अपना रहा है, बल्कि इसे देश के लिए एक बड़े आर्थिक और रणनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” के विजन के अनुरूप भारत ऐसा SAF इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है जो विमानन क्षेत्र के विकास के साथ-साथ वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे।

मंत्री ने यह भी कहा कि SAF मूल्य श्रृंखला के विकास से किसानों, जैव ईंधन उत्पादकों, उद्योगों तथा ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अनेक हितधारकों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

हरित ऊर्जा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है भारत

राम मोहन नायडू ने बताया कि भारत का विमानन क्षेत्र पहले से ही कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए कई स्तरों पर कार्य कर रहा है।

उन्होंने जानकारी दी कि वर्ष 2014 में जहां देश में कोई भी हवाई अड्डा पूरी तरह हरित ऊर्जा पर संचालित नहीं था, वहीं आज देश के 104 हवाई अड्डे 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी का उपयोग कर रहे हैं।

इसके अलावा एयरलाइंस को आधुनिक एवं ईंधन-कुशल विमानों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। लीज आधारित विमानन व्यवस्था को बढ़ावा देकर परिचालन लागत और ईंधन खपत दोनों में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है।

संभावना अध्ययन से आगे बढ़कर उत्पादन पर होगा फोकस

मंत्री ने स्पष्ट कहा कि अब केवल अध्ययन और योजनाओं का समय समाप्त हो चुका है। अब सभी संबंधित एजेंसियों को तय समयसीमा के भीतर वास्तविक उत्पादन शुरू करने पर ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक हितधारक की जिम्मेदारियां स्पष्ट होनी चाहिए ताकि पर्याप्त उत्पादन, प्रभावी निगरानी और पारदर्शी लेखांकन सुनिश्चित किया जा सके।

साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की तत्काल प्राथमिकता CORSIA के तहत निर्धारित 1 प्रतिशत SAF मिश्रण आवश्यकता को सबसे किफायती तरीके से पूरा करना है।

राष्ट्रीय SAF रजिस्ट्री विकसित करने की तैयारी

बैठक में एक मजबूत राष्ट्रीय SAF रजिस्ट्री विकसित करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। यह रजिस्ट्री उत्पादन से लेकर अंतिम उपयोग तक SAF की पूरी ट्रैकिंग सुनिश्चित करेगी।

इसके अतिरिक्त ICAO और CORSIA मानकों के अनुरूप लेखांकन, निगरानी तथा रिपोर्टिंग प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया गया ताकि भारत का पूरा SAF तंत्र अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य कर सके।

यह व्यवस्था भविष्य में प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों तक भारतीय SAF की पहुंच को भी आसान बनाएगी।

सभी हितधारकों के बीच समन्वय पर दिया गया जोर

बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि SAF इकोसिस्टम का सफल विकास तभी संभव होगा जब सभी मंत्रालय, उद्योग, तेल कंपनियां, एयरलाइंस और हवाई अड्डा संचालक एक साझा रणनीति के तहत कार्य करें।

उन्होंने कहा कि सामूहिक निर्णय और प्रभावी समन्वय ही भारत को CORSIA के अनिवार्य चरण से पहले पूरी तरह तैयार कर सकता है।

इसी उद्देश्य से सभी संबंधित एजेंसियों को निर्धारित कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश भी दिए गए।

अंतिम चरण में है SAF नीति

बैठक के दौरान मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि भारत की राष्ट्रीय SAF नीति अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

उन्होंने बताया कि नीति को अंतिम रूप देने से पहले विभिन्न मंत्रालयों, उद्योग संगठनों और विशेषज्ञों के साथ लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है ताकि नीति व्यावहारिक, संतुलित और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो।

यात्रियों पर न्यूनतम आर्थिक बोझ रहेगा प्राथमिकता

राम मोहन नायडू ने स्पष्ट किया कि सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि SAF लागू होने के बावजूद यात्रियों और एयरलाइंस पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न्यूनतम रहे।

इसके लिए उत्पादन से लेकर हवाई अड्डों तक ईंधन की आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया का लागत विश्लेषण किया जा रहा है। साथ ही विभिन्न उत्पादन तकनीकों और आपूर्ति मॉडलों का मूल्यांकन भी किया जा रहा है ताकि सबसे किफायती विकल्प अपनाया जा सके।

भारत को वैश्विक SAF हब बनाने की दिशा में कदम

बैठक में भारत के CORSIA अनुपालन, कार्बन मार्केट फ्रेमवर्क, प्राधिकरण पत्र जारी करने तथा अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आवश्यक संस्थागत व्यवस्थाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी परियोजनाएं पूरी हो जाती हैं, तो भारत न केवल अपनी घरेलू विमानन जरूरतों को पूरा कर सकेगा, बल्कि भविष्य में वैश्विक SAF बाजार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

भारत सरकार विमानन क्षेत्र को अधिक टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। सतत विमानन ईंधन (SAF) को बढ़ावा देने, CORSIA के मानकों का समय पर पालन सुनिश्चित करने और मजबूत उत्पादन एवं आपूर्ति तंत्र विकसित करने के लिए सरकार, उद्योग और विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वित प्रयास जारी हैं।

यदि यह रोडमैप निर्धारित समय के अनुसार लागू होता है, तो भारत न केवल अंतरराष्ट्रीय पर्यावरणीय दायित्वों को प्रभावी ढंग से पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर सतत विमानन के क्षेत्र में एक अग्रणी देश के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकेगा।

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