नहीं रही लखनऊ की पहली महिला पत्रकार मेहरू जाफर का निधन, पत्रकारिता जगत और प्रेस संगठनों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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Digital UP News Desk

लखनऊ: हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता जगत के लिए एक दुखद समाचार सामने आया है। लखनऊ की पहली महिला पत्रकारों में अग्रणी मानी जाने वाली मेहरू जाफर का गोवा में निधन हो गया। उनके निधन से पत्रकारिता, साहित्य और सामाजिक सरोकारों से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। विभिन्न पत्रकार संगठनों, वरिष्ठ पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को लंबे समय तक याद किए जाने योग्य बताया है।

मेहरू जाफर ने ऐसे दौर में पत्रकारिता की शुरुआत की थी, जब समाचार जगत में महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित थी। उन्होंने न केवल अपनी पहचान एक निर्भीक और संवेदनशील पत्रकार के रूप में बनाई, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हस्तक्षेप करते हुए नई पीढ़ी की महिला पत्रकारों के लिए प्रेरणा भी बनीं।

सत्तर के दशक में शुरू किया पत्रकारिता का सफर

मेहरू जाफर ने वर्ष 1970 के दशक की शुरुआत में पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा। उस समय लखनऊ में महिला पत्रकारों की संख्या बहुत कम थी। ऐसे दौर में उन्होंने समाचार लेखन, रिपोर्टिंग और सामाजिक विषयों पर गंभीर पत्रकारिता के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई।

उनके साथ ही सीमा मुस्तफा और ललिता सुब्राह्मण्यम जैसी महिला पत्रकारों ने भी पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश किया। इन तीनों ने उस समय महिलाओं की भागीदारी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यही कारण है कि मेहरू जाफर का नाम उत्तर प्रदेश की महिला पत्रकारिता के इतिहास में सम्मान के साथ लिया जाता है।

पत्रकारिता के साथ सामाजिक सरोकारों से भी रहीं जुड़ी

मेहरू जाफर केवल पत्रकार ही नहीं थीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहने वाली एक जागरूक सामाजिक कार्यकर्ता (एक्टिविस्ट) भी थीं। उन्होंने अपने लेखन और सार्वजनिक जीवन के माध्यम से शिक्षा, महिला अधिकार, सामाजिक न्याय और मानवीय मूल्यों जैसे विषयों पर निरंतर आवाज उठाई।

इसके अलावा उन्होंने कई पुस्तकों का लेखन भी किया। उनके लेखों और पुस्तकों में समाज, संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है। साहित्य और पत्रकारिता के बीच उन्होंने एक सार्थक सेतु का कार्य किया।

पत्रकार संगठनों में भी निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

मेहरू जाफर पत्रकार संगठनों से भी सक्रिय रूप से जुड़ी रहीं। वर्ष 1978 में आयोजित इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के चित्रकूट सम्मेलन के प्रमुख आयोजकों में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उस समय यह सम्मेलन पत्रकारों के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजन माना गया था।

इसके अतिरिक्त उन्होंने यू.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के साथ लंबे समय तक सक्रिय भूमिका निभाई। संगठनात्मक कार्यों में उनकी भागीदारी और पत्रकारों के हितों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखा गया।

प्रेस संगठनों ने जताया गहरा शोक

मेहरू जाफर के निधन पर विभिन्न पत्रकार संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। यू.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन के अध्यक्ष हसीब सिद्दीकी और महामंत्री देवराज सिंह ने उनके निधन को पत्रकारिता जगत की अपूरणीय क्षति बताया।

इसी प्रकार आई.एफ.डब्ल्यू.जे. के अध्यक्ष गोपाल मिश्र और मंत्री विश्वदेव राव ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मेहरू जाफर का योगदान पत्रकारिता के इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा।

वहीं यू.पी. प्रेस क्लब के अध्यक्ष रवीन्द्र कुमार सिंह तथा यूनियन की लखनऊ इकाई के अध्यक्ष शिव शरण सिंह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने कार्य, व्यवहार और विचारों से पत्रकारिता की गरिमा को नई ऊंचाई प्रदान की।

महिला पत्रकारों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत

पत्रकारिता के क्षेत्र में मेहरू जाफर का सफर केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने ऐसे समय में अपनी पहचान बनाई, जब महिलाओं के लिए इस क्षेत्र में अवसर अपेक्षाकृत कम थे। उन्होंने अपनी मेहनत, निष्पक्षता और संवेदनशील दृष्टिकोण से यह साबित किया कि पत्रकारिता में समर्पण और पेशेवर ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी होती है।

आज उत्तर प्रदेश सहित देशभर में बड़ी संख्या में महिला पत्रकार विभिन्न मीडिया संस्थानों में कार्य कर रही हैं। वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि मेहरू जाफर जैसी अग्रणी महिला पत्रकारों ने ही आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता तैयार किया।

साहित्य और पत्रकारिता का संतुलित संगम

मेहरू जाफर ने अपने लेखन के माध्यम से समाज के अनेक पहलुओं को सामने रखा। उन्होंने केवल समाचार लेखन तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पुस्तकों और विचारपरक लेखों के माध्यम से भी सामाजिक विमर्श को समृद्ध किया।

उनकी लेखनी में संवेदनशीलता, तथ्यपरकता और मानवीय दृष्टिकोण का संतुलित समावेश देखने को मिलता था। यही कारण है कि उन्हें पत्रकारिता के साथ-साथ साहित्यिक जगत में भी सम्मान प्राप्त हुआ।

पत्रकारिता जगत के लिए एक युग का अवसान

मेहरू जाफर का निधन केवल एक वरिष्ठ पत्रकार की विदाई नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण अध्याय का समापन भी माना जा रहा है। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में पत्रकारिता की विश्वसनीयता, सामाजिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों को हमेशा प्राथमिकता दी।

उनके सहयोगियों का कहना है कि वह नई पीढ़ी के पत्रकारों का मार्गदर्शन करने में भी सदैव आगे रहती थीं। उनके अनुभव, विचार और कार्यशैली से अनेक पत्रकारों ने प्रेरणा प्राप्त की।

योगदान हमेशा रहेगा याद

मेहरू जाफर ने पत्रकार, लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जो योगदान दिया, वह आने वाले वर्षों तक याद किया जाएगा। उन्होंने यह सिद्ध किया कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी एक सशक्त मंच है।

उनके निधन से पत्रकारिता जगत ने एक अनुभवी, संवेदनशील और प्रतिबद्ध व्यक्तित्व को खो दिया है। वहीं, उनके कार्य और विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। पत्रकार संगठनों, साहित्यकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनके शुभचिंतकों ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनके परिजनों और निकटजनों को इस कठिन समय में संबल मिले।

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