गुरु पूर्णिमा पर उन्नाव के रामपुर गढ़ौवा विद्यालय में ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान, बच्चों ने लिया हरित गाँव बनाने का संकल्प
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
उन्नाव: गुरु पूर्णिमा केवल गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का पर्व ही नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक मूल्यों को अपनाने का भी संदेश देता है। इसी भावना को साकार करते हुए जनपद उन्नाव के औरास विकासखंड स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर गढ़ौवा में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ‘प्रकृति वंदन एवं गुरु वंदन’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने न केवल अपने शिक्षकों का सम्मान किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए पौधरोपण कर समाज को हरित भविष्य का संदेश भी दिया।
कार्यक्रम का आयोजन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश कुमार पाण्डेय के निर्देश पर किया गया। वहीं, ग्रीन एंड क्लीन यूपी कैंपेन के मुख्य सह संयोजक डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा के निर्देशन में बच्चों ने प्रकृति संरक्षण को व्यवहारिक रूप देने का प्रेरणादायी प्रयास किया। इस पहल में प्रभारी पुलिस कंट्रोल रूम उन्नाव एवं वरिष्ठ उपनिरीक्षक अनूप मिश्र अपूर्व द्वारा संचालित पर्यावरण जागरूकता अभियान की भावना भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
गुरु और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का अनूठा संगम
विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को यह समझाना था कि जैसे गुरु जीवन में सही मार्गदर्शन देकर व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं, उसी प्रकार वृक्ष भी बिना किसी स्वार्थ के मानव जीवन को अनगिनत लाभ प्रदान करते हैं। यही कारण रहा कि कार्यक्रम को ‘प्रकृति वंदन एवं गुरु वंदन’ की थीम पर आधारित किया गया।
इस दौरान विद्यार्थियों ने गुरु और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को समझते हुए कहा कि वृक्ष भी गुरु की तरह निःस्वार्थ भाव से जीवनभर देते रहते हैं। वे धूप स्वयं सहकर दूसरों को छाया देते हैं, फल देते हैं, शुद्ध वायु प्रदान करते हैं और बिना किसी अपेक्षा के मानव जीवन को समृद्ध बनाते हैं। इसी संदेश को आत्मसात करते हुए बच्चों ने प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त किया।
पोस्टरों के माध्यम से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े आकर्षक और प्रेरणादायक पोस्टर तैयार किए। इन पोस्टरों पर लिखे संदेशों ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।
बच्चों ने पोस्टरों के माध्यम से लिखा—
- “वृक्ष मेरा गुरु”
- “मेरा पेड़–मेरी जिम्मेदारी”
- “वृक्ष बिना कुछ माँगे हमें देना सिखाता है”
इन संदेशों के जरिए विद्यार्थियों ने यह समझाने का प्रयास किया कि यदि प्रत्येक व्यक्ति एक पौधे को अपना दायित्व मानकर उसकी देखभाल करे, तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखना भी उतना ही आवश्यक है।
‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान बना आकर्षण का केंद्र
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विद्यालय परिसर में “एक पेड़ गुरु के नाम” अभियान के अंतर्गत पौधरोपण किया गया। इस दौरान बच्चों ने अपने गुरुजनों के सम्मान में पौधे लगाए और उन्हें जीवनभर संरक्षित रखने का संकल्प लिया।
विद्यालय परिसर में गोल्ड मोहर, जामुन, पकड़िया तथा अमरूद के पौधे रोपे गए। पौधरोपण के बाद बच्चों ने प्रत्येक पौधे की जिम्मेदारी स्वयं लेने का निर्णय लिया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से शपथ ली कि वे नियमित रूप से पौधों को पानी देंगे, उनकी देखभाल करेंगे और पौधों को वृक्ष बनने तक उनका संरक्षण करेंगे।
कार्यक्रम में लिया गया यह संकल्प केवल विद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों ने इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने की भी बात कही।
“एक बच्चा–एक पेड़–एक जिम्मेदारी” बना अभियान का मूल मंत्र
कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता रही “एक बच्चा–एक पेड़–एक जिम्मेदारी” की अवधारणा। इस पहल के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी को एक पौधे की जिम्मेदारी सौंपी गई।
इसका उद्देश्य केवल पौधरोपण करना नहीं, बल्कि पौधे के संपूर्ण विकास तक उसकी देखभाल सुनिश्चित करना है। बच्चों ने कहा कि वे नियमित रूप से पौधों की सिंचाई करेंगे, उनकी सुरक्षा करेंगे तथा किसी भी प्रकार की क्षति से बचाने का प्रयास करेंगे।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि पौधरोपण के साथ संरक्षण की भावना जुड़ जाए, तो पर्यावरण संरक्षण के अभियान अधिक प्रभावी और स्थायी बन सकते हैं। विद्यालय की यह पहल इसी दिशा में एक सकारात्मक प्रयास मानी जा रही है।
हरित गाँव बनाने का लिया संकल्प
हाल ही में प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ), उन्नाव द्वारा परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के पर्यावरणीय प्रयासों की सराहना की गई थी। इसी प्रोत्साहन से प्रेरित होकर रामपुर गढ़ौवा विद्यालय के बच्चों ने अपने अभियान को विद्यालय तक सीमित न रखने का निर्णय लिया।
विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे अपने परिवार, पड़ोसियों और ग्रामीणों को भी पौधरोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे। उनका लक्ष्य रामपुर गढ़ौवा को ‘हरित गाँव’ के रूप में विकसित करना है।
बच्चों का कहना था कि यदि प्रत्येक परिवार कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे, तो आने वाले वर्षों में पूरा गाँव हरियाली से आच्छादित हो सकता है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित होगी।
पर्यावरण संरक्षण को व्यवहार में उतारने का प्रयास
आज जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और घटते हरित क्षेत्र जैसी चुनौतियाँ पूरी दुनिया के सामने हैं। ऐसे समय में विद्यालय स्तर पर बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
रामपुर गढ़ौवा विद्यालय का यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया। यहाँ बच्चों ने केवल भाषण या संदेश देने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पौधरोपण कर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी भी स्वीकार की। यही व्यवहारिक शिक्षा भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के बड़े अभियानों की मजबूत नींव बन सकती है।
शिक्षकों और अतिथियों ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह
कार्यक्रम में विद्यालय परिवार एवं अन्य गणमान्य लोगों की भी सक्रिय सहभागिता रही। इस अवसर पर शशि देवी, इंद्रपाल, रमनजीत कौर एवं शाहे खुबा ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा उनके प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने बच्चों से कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि मानव जीवन के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं। इसलिए प्रत्येक विद्यार्थी को अपने लगाए गए पौधे की नियमित देखभाल करनी चाहिए।
कार्यक्रम की समस्त गतिविधियाँ डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा के निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुईं। उनके मार्गदर्शन में बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण, गुरु सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।
समाज के लिए प्रेरणादायी पहल
गुरु पूर्णिमा पर आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का संदेश देता है कि गुरु का सम्मान केवल शब्दों से नहीं, बल्कि समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाकर भी किया जा सकता है। “एक पेड़ गुरु के नाम” जैसी पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि नई पीढ़ी में जिम्मेदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता जैसे जीवन मूल्यों का भी विकास करती है।
यदि इसी प्रकार विद्यालय, परिवार और समाज मिलकर पौधरोपण के साथ-साथ पौधों के संरक्षण का संकल्प लें, तो आने वाले समय में हरित भारत का सपना और अधिक सशक्त रूप से साकार हो सकता है। यही इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा संदेश भी रहा कि पौधा लगाना शुरुआत है, लेकिन उसे वृक्ष बनाना हमारी वास्तविक जिम्मेदारी है।

