महाराष्ट्र साइबर पुलिस का दावा: CJP विरोध-प्रदर्शन के दौरान 500 से अधिक संदिग्ध सोशल मीडिया प्रोफाइल की पहचान

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Digital UP News Desk

मुंबई: महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने दावा किया है कि हाल के CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) से जुड़े देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के दौरान सोशल मीडिया पर एक संगठित दुष्प्रचार अभियान चलाया गया। पुलिस के अनुसार, जांच में 500 से अधिक सोशल मीडिया प्रोफाइल की पहचान की गई है, जिनके माध्यम से कथित रूप से भ्रामक और एआई (Artificial Intelligence) से तैयार की गई सामग्री प्रसारित की जा रही थी।

साइबर पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर विभिन्न तकनीकी पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है। फिलहाल पुलिस द्वारा जांच के दावों की प्रक्रिया जारी है और किसी भी व्यक्ति या समूह की कानूनी जिम्मेदारी अदालत या सक्षम प्राधिकारी द्वारा तय की जानी बाकी है।

तकनीकी जांच में कई अहम तथ्य आने का दावा

महाराष्ट्र साइबर पुलिस के अनुसार, मामले की जांच के दौरान ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT), मेटाडाटा विश्लेषण, डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों और एआई जनित (AI-Generated) तथा डीपफेक (Deepfake) सामग्री की जांच की गई।

पुलिस का दावा है कि इन तकनीकी जांचों के दौरान सोशल मीडिया खातों का एक ऐसा नेटवर्क सामने आया, जो कथित रूप से भ्रामक जानकारी और एआई आधारित सामग्री प्रसारित कर रहा था।

अधिकारियों के अनुसार, इस सामग्री का उद्देश्य लोगों की धारणा को प्रभावित करना, भ्रम की स्थिति पैदा करना तथा कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डालना हो सकता है। हालांकि, इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

500 से अधिक सोशल मीडिया प्रोफाइल की पहचान

साइबर पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान 500 से अधिक सोशल मीडिया प्रोफाइल की पहचान की गई है। इन खातों की गतिविधियों, पोस्ट, साझा की गई सामग्री और उनके तकनीकी स्रोतों का विश्लेषण किया जा रहा है।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन खातों का संचालन किन व्यक्तियों या समूहों द्वारा किया जा रहा था और क्या इनके बीच किसी प्रकार का समन्वय था।

सीमा पार से गतिविधियों का दावा

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने यह भी दावा किया है कि प्रारंभिक जांच में कुछ गतिविधियों के तार पाकिस्तान और मध्य-पूर्व के कुछ देशों से संचालित असामाजिक तत्वों तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस संबंध में विस्तृत जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। अभी तक किसी न्यायालय द्वारा इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है।

एआई और डीपफेक सामग्री बनी चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक के बढ़ते उपयोग ने साइबर सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं।

डीपफेक तकनीक के माध्यम से किसी व्यक्ति के वीडियो, ऑडियो या तस्वीरों को इस तरह तैयार किया जा सकता है कि वे वास्तविक प्रतीत हों। यदि ऐसी सामग्री का दुरुपयोग किया जाए, तो गलत सूचना तेजी से फैल सकती है।

इसी कारण जांच एजेंसियां अब डिजिटल फॉरेंसिक और एआई आधारित विश्लेषण पर अधिक जोर दे रही हैं।

OSINT क्या है?

ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) ऐसी जांच प्रक्रिया है, जिसमें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण किया जाता है। इसमें सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट, सार्वजनिक डेटाबेस और अन्य खुले स्रोतों से जानकारी जुटाकर उसका तकनीकी अध्ययन किया जाता है।

साइबर अपराधों और ऑनलाइन दुष्प्रचार की जांच में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सोशल मीडिया पर बढ़ रही निगरानी

विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आज सूचना के सबसे प्रभावशाली माध्यम बन चुके हैं। इसलिए फर्जी खबरों, डीपफेक वीडियो और भ्रामक सामग्री की पहचान के लिए साइबर एजेंसियां लगातार नई तकनीकों का उपयोग कर रही हैं।

साथ ही नागरिकों को भी सलाह दी जाती है कि किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।

कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर जोर

महाराष्ट्र साइबर पुलिस का कहना है कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या कानून के उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, जांच पूरी होने तक सभी निष्कर्ष प्रारंभिक स्तर के माने जाएंगे और अंतिम निर्णय कानूनन सक्षम प्राधिकारी तथा न्यायिक प्रक्रिया के अधीन होगा।

डिजिटल सुरक्षा की बढ़ती आवश्यकता

डिजिटल विशेषज्ञों का मानना है कि एआई आधारित तकनीकों के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।

सरकार और जांच एजेंसियां लगातार नागरिकों को जागरूक कर रही हैं कि वे केवल विश्वसनीय स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करें और संदिग्ध सामग्री मिलने पर संबंधित प्लेटफॉर्म या एजेंसियों को इसकी सूचना दें।

महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने दावा किया है कि CJP से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों के दौरान 500 से अधिक सोशल मीडिया प्रोफाइल के माध्यम से कथित दुष्प्रचार अभियान चलाया गया। पुलिस के अनुसार, तकनीकी जांच में एआई जनित सामग्री, डीपफेक और ओएसआईएनटी विश्लेषण के जरिए कई महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। साथ ही कुछ गतिविधियों के तार पाकिस्तान और मध्य-पूर्व के कुछ देशों से जुड़े होने का भी दावा किया गया है। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित एजेंसियों की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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