मथुरा-वृंदावन नगर निगम के अधूरे विकास कार्यों पर उठे सवाल, सड़क, जानिए स्थानीय लोग किन समस्याओं से हैं परेशान

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

मथुरा: धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध मथुरा-वृंदावन इन दिनों नगर निगम क्षेत्र में अधूरे विकास कार्यों को लेकर चर्चा में है। शहर के कई हिस्सों में सड़क निर्माण, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट, घाटों की मरम्मत और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्य अभी तक पूरे नहीं हो सके हैं। इसके चलते स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ तीर्थ यात्रियों को भी विभिन्न प्रकार की असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परियोजनाएं महीनों पहले शुरू हुई थीं, लेकिन निर्धारित समय में पूरी नहीं हो सकीं। वहीं, नगर निगम का कहना है कि कुछ कार्य मौसम और अन्य तकनीकी कारणों से प्रभावित हुए हैं तथा संबंधित ठेकेदारों को जल्द कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के कई कार्य अभी भी हैं अधूरे

शहर के प्रमुख मार्गों पर स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत सड़क, पाइपलाइन और केबल से जुड़े विकास कार्य शुरू किए गए थे। हालांकि कई स्थानों पर पाइपलाइन और केबल बिछाने के बाद सड़क की मरम्मत अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों के अनुसार कृष्णा नगर, गोविंद नगर, डैंपियर नगर और चौबिया पाड़ा सहित कई क्षेत्रों में सड़कें खोदी गईं, लेकिन बाद में उन्हें समतल नहीं किया गया। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर गड्ढे बने हुए हैं, जिससे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

नागरिकों का यह भी कहना है कि मानसून से पहले यदि इन कार्यों को पूरा नहीं किया गया, तो जलभराव जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी बनी हुई है चिंता

बरसात का मौसम शुरू होने से पहले जल निकासी व्यवस्था को लेकर भी लोगों ने चिंता व्यक्त की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई इलाकों में नालियों की सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था पर अपेक्षित गति से कार्य नहीं हुआ है।

उनका मानना है कि यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो वर्षा के दौरान कुछ क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे यातायात और दैनिक जीवन प्रभावित होने की आशंका रहेगी।

वृंदावन में परिक्रमा मार्ग का सौंदर्यीकरण है धीमी गति से

वृंदावन के परिक्रमा मार्ग पर चल रहे सौंदर्यीकरण कार्य को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चा बनी हुई है। नागरिकों और कुछ स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि निर्माण कार्य अपेक्षाकृत धीमी गति से चल रहा है और कई स्थानों पर निर्माण सामग्री अभी भी सड़क किनारे रखी हुई है।

उनके अनुसार इससे श्रद्धालुओं को परिक्रमा के दौरान असुविधा होती है। वहीं कुछ दुकानदारों का कहना है कि धूल और यातायात संबंधी दिक्कतों के कारण उनके व्यापार पर भी असर पड़ा है। यह स्थानीय व्यापारियों द्वारा व्यक्त की गई राय है।

घाटों की मरम्मत और स्वच्छता व्यवस्था पर उठे प्रश्न

यमुना तट स्थित कुछ प्रमुख घाटों पर मरम्मत कार्य को लेकर भी नागरिकों ने चिंता जताई है। स्थानीय लोगों के अनुसार केशी घाट और विश्राम घाट के कुछ हिस्सों में मरम्मत कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है।

इसके अलावा कुछ स्थानों पर स्वच्छता व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। नागरिकों का कहना है कि कुछ कूड़ेदान क्षतिग्रस्त हैं तथा नालियों की नियमित सफाई की आवश्यकता है। उनका मानना है कि इससे स्वच्छ वातावरण बनाए रखने में सहायता मिलेगी।

स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर भी शिकायतें

नगर निगम द्वारा स्ट्रीट लाइट लगाने की योजना के बावजूद कुछ कॉलोनियों में अभी भी पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने की बात स्थानीय लोगों ने कही है।

कुछ क्षेत्रों में लोगों का कहना है कि जहां खंभे लगाए गए हैं, वहां कई स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद हैं। उनका सुझाव है कि नियमित निरीक्षण कर खराब लाइटों को शीघ्र ठीक कराया जाए, ताकि रात्रि के समय आवागमन अधिक सुविधाजनक हो सके।

पार्षदों ने भी उठाए कार्यों की गति पर सवाल

स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी विकास कार्यों की गति को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। कुछ पार्षदों का कहना है कि बजट उपलब्ध होने के बावजूद कई कार्य निर्धारित समय में पूरे नहीं हो रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि नागरिकों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बाद भी कई मामलों में अपेक्षित गति से कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि इन बयानों पर नगर निगम की ओर से अलग से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

नगर आयुक्त ने दिए समयबद्ध कार्य पूरे करने के निर्देश

नगर आयुक्त ने बताया कि कुछ कार्य मौसम और अन्य कारणों से प्रभावित हुए हैं। उनके अनुसार संबंधित ठेकेदारों को 15 दिन के भीतर अधूरे कार्य पूरे करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं किया गया, तो संबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

नागरिकों ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि विकास कार्यों के लिए स्पष्ट समयसीमा तय की जानी चाहिए। साथ ही प्रत्येक परियोजना की प्रगति की नियमित जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि लोगों को यह पता चल सके कि कार्य किस चरण में है।

उनका मानना है कि यदि कार्यों की नियमित निगरानी, गुणवत्ता परीक्षण और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, तो विकास परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकती हैं और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं।

तीर्थ नगरी के अनुरूप सुविधाएं विकसित करने की आवश्यकता

मथुरा-वृंदावन हर वर्ष देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का स्वागत करता है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की आधारभूत सुविधाओं को तीर्थ नगरी की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क, स्वच्छता, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक सुविधाओं का समयबद्ध विकास न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए लाभकारी होगा, बल्कि धार्मिक पर्यटन को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा।

मथुरा-वृंदावन नगर निगम क्षेत्र में अधूरे विकास कार्यों को लेकर स्थानीय नागरिकों, व्यापारियों और तीर्थ यात्रियों ने विभिन्न समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है। वहीं नगर निगम प्रशासन का कहना है कि संबंधित ठेकेदारों को निर्धारित समय में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं और आवश्यकता पड़ने पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।

अब लोगों की नजर इस बात पर है कि आगामी दिनों में अधूरे कार्य कितनी तेजी से पूरे होते हैं और नागरिक सुविधाओं में कितना सुधार देखने को मिलता है। यदि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित किए जाते हैं, तो इससे शहर की आधारभूत व्यवस्थाओं के साथ-साथ तीर्थ यात्रियों की सुविधा भी बेहतर हो सकेगी।

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