देहरादून में ₹16 करोड़ का नया पुल 17 दिन में धंसा, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल, यातायात रोका गया
रिपोर्ट- अमित सिंह यादव
देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर स्थित नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर निर्मित नया पुल भारी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गया है। लगभग ₹16 करोड़ की लागत से तैयार किए गए इस पुल को हाल ही में आम जनता के लिए खोला गया था, लेकिन महज 16 से 17 दिनों के भीतर इसके एप्रोच मार्ग (Approach Road) में धंसाव आने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने पुल पर यातायात रोक दिया है और संबंधित विभाग द्वारा स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
यह पुल देहरादून से प्रेमनगर और पांवटा साहिब की ओर आने-जाने वाले हजारों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है। ऐसे में पुल के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय नागरिकों और यात्रियों को एक बार फिर असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।
भारी बारिश के बाद एप्रोच रोड में आया धंसाव
जानकारी के अनुसार, लगातार हो रही बारिश के कारण पुल के एक हिस्से, विशेष रूप से एप्रोच मार्ग में धंसाव हो गया। इसके परिणामस्वरूप सड़क पर बड़ा गड्ढा बन गया, जिससे वाहनों की आवाजाही सुरक्षित नहीं रह गई। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से पुल पर यातायात रोक दिया।
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। इसके बाद क्षेत्र की घेराबंदी कर लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई। साथ ही संबंधित विभागों को तकनीकी निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं।
हाल ही में शुरू हुआ था पुल पर यातायात
लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस पुल का निर्माण कार्य पूरा करने के बाद 12 जुलाई 2026 से इस पर वाहनों की आवाजाही शुरू कराई थी। इससे पहले 11 जुलाई की रात अस्थायी पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिसके कारण विभाग ने मुख्य पुल को यातायात के लिए खोल दिया था।
उस समय इस परियोजना को क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया गया था क्योंकि इससे लंबे समय से चली आ रही आवागमन की समस्या का समाधान होने की उम्मीद थी। हालांकि, पुल खुलने के कुछ ही दिनों बाद आई इस समस्या ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सितंबर 2025 में क्षतिग्रस्त हुआ था पुराना पुल
दरअसल, 15 सितंबर 2025 की रात भारी बारिश और बाढ़ के दौरान नंदा की चौकी स्थित पुराना पुल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। उस समय पुल की एबटमेंट वॉल तथा एक स्लैब को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद पुल पर यातायात बंद करना पड़ा।
इसके बाद लोक निर्माण विभाग ने लोगों की सुविधा के लिए ह्यूम पाइप के सहारे एक अस्थायी पुलिया तैयार की थी। लगभग 10 महीनों तक इसी अस्थायी व्यवस्था के माध्यम से लोगों की आवाजाही जारी रही।
मार्च 2026 में शुरू हुआ था पुनर्निर्माण
पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद मार्च 2026 में नए पुल के निर्माण का कार्य शुरू किया गया। इस परियोजना पर लगभग ₹16 करोड़ की लागत आई। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी।
हालांकि, निर्माण पूरा होने के कुछ ही दिनों बाद एप्रोच मार्ग में धंसाव की घटना सामने आने से परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्न उठ रहे हैं।
निर्माण गुणवत्ता पर उठने लगे सवाल
पुल में इतनी कम अवधि में आई तकनीकी समस्या को लेकर स्थानीय लोगों के बीच विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कई लोगों का मानना है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की विस्तृत जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
हालांकि, अभी तक संबंधित विभाग की ओर से धंसाव के कारणों पर अंतिम तकनीकी रिपोर्ट जारी नहीं की गई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि नुकसान केवल अत्यधिक वर्षा के कारण हुआ या फिर इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी कारण भी जिम्मेदार है।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंच गया। अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए लोगों को प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी। साथ ही यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ा गया ताकि किसी प्रकार की असुविधा या दुर्घटना की स्थिति उत्पन्न न हो।
इसके अतिरिक्त, प्रशासन ने संबंधित विभागों से जल्द से जल्द निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है ताकि आवश्यक मरम्मत कार्य समय पर शुरू किया जा सके।
लगातार बारिश से बढ़ी चुनौती
इन दिनों देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में लगातार वर्षा हो रही है। ऐसे मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने और मिट्टी कमजोर होने की संभावना बनी रहती है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावित हिस्से की तकनीकी जांच अत्यंत सावधानी से की जानी चाहिए।
यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो यातायात व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित हो सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय तकनीकी परीक्षण और विभागीय रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।
स्थानीय लोगों को फिर बढ़ी चिंता
नंदा की चौकी और प्रेमनगर क्षेत्र के निवासी इस मार्ग का नियमित रूप से उपयोग करते हैं। पुल पर यातायात रुकने से दैनिक आवागमन, व्यापारिक गतिविधियों और अन्य आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ सकता है। इसलिए स्थानीय लोग चाहते हैं कि विभाग शीघ्र जांच पूरी कर सुरक्षित समाधान उपलब्ध कराए।
विभागीय कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल लोक निर्माण विभाग की ओर से विस्तृत निरीक्षण किया जा रहा है। विभाग यह पता लगाने का प्रयास करेगा कि धंसाव किन परिस्थितियों में हुआ और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए, इसके लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े बुनियादी ढांचे की दीर्घकालिक मजबूती सुनिश्चित करने के लिए निर्माण गुणवत्ता, नियमित निरीक्षण और जल निकासी व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है। इसी कारण अब सभी की नजर विभागीय जांच और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध आधिकारिक एवं सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। पुल के धंसाव के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभाग की तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

