रसखान समाधि स्थल पर सजेगी ब्रज की सांझी कला, 6 से 10 अक्टूबर तक होगा सांझी महोत्सव

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

गोकुल/महावन, मथुरा। ब्रज की प्राचीन लोक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कलाओं को नई पहचान देने के उद्देश्य से महावन में पांच दिवसीय सांझी महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं जीएलए विश्वविद्यालय, मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में यह महोत्सव 6 से 10 अक्टूबर 2026 तक श्रीकृष्ण के भक्त रसखान एवं ताजबीबी उपवन, महावन स्थित रसखान समाधि स्थल पर आयोजित होगा।

महोत्सव का उद्देश्य ब्रज की सदियों पुरानी सांझी कला और लोक परंपराओं को संरक्षित करने के साथ-साथ उन्हें व्यापक स्तर पर पहचान दिलाना है। इसके माध्यम से पारंपरिक कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए मंच मिलेगा। साथ ही, नई पीढ़ी को ब्रज की सांस्कृतिक विरासत और लोक कलाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

सांझी कला की विभिन्न विधाओं की लगेगी प्रदर्शनी

पांच दिवसीय सांझी महोत्सव में प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक सांझी कला की विभिन्न विधाओं की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें कलाकार अपनी रचनात्मकता के माध्यम से ब्रज की पारंपरिक कला का प्रदर्शन करेंगे।

प्रदर्शनी में कैनवास सांझी, सूखे एवं गीले रंगों की सांझी, जल सांझी, पोट्रेट एवं रंगोली सांझी और गोबर सांझी विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा सांझी कला तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्री को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

इस दौरान सांझी कला के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला भी आयोजित होगी। कार्यशाला में प्रतिभागियों को सांझी बनाने की पारंपरिक तकनीकों और इसके विभिन्न स्वरूपों की जानकारी दी जाएगी। इस पहल से जहां सांझी कला के प्रति रुचि बढ़ेगी, वहीं इसके संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रयास होगा।

शाम को होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम

सांझी महोत्सव में केवल कला प्रदर्शनी ही नहीं, बल्कि प्रतिदिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। शाम 5 बजे से रात 8:30 बजे तक होने वाले इन कार्यक्रमों में ब्रज की लोक संस्कृति और भारतीय शास्त्रीय परंपराओं की विविध झलक देखने को मिलेगी।

कार्यक्रमों में कथक नृत्य, भजन संध्या, जिकड़ी भजन, लोक गायन, गीता आधारित प्रेरक कार्यक्रम, सांझी कला पर संगोष्ठी और ब्रजभाषा काव्य सम्मेलन प्रमुख आकर्षण होंगे। इस प्रकार महोत्सव में कला, संगीत, साहित्य और आध्यात्मिक परंपरा का समन्वय देखने को मिलेगा।

6 अक्टूबर को सांझी गीत और रसखान पद गायन

महोत्सव का शुभारंभ 6 अक्टूबर को सांझी गीत और रसखान पद गायन के साथ होगा। इस अवसर पर माधव मिश्र और राघव मिश्र बंधु सांझी गीत एवं रसखान के पदों का गायन प्रस्तुत करेंगे।

रसखान ब्रजभक्ति परंपरा के महत्वपूर्ण कवियों में माने जाते हैं। इसलिए रसखान समाधि स्थल पर उनके पदों का गायन इस आयोजन को विशेष सांस्कृतिक महत्व प्रदान करेगा।

7 अक्टूबर को ब्रज लोकगीत और गीता आधारित कार्यक्रम

7 अक्टूबर को तलवीर ब्रजवासी एवं सांझी कलाकारों द्वारा ब्रज के लोकगीत प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही गीता शोध संस्थान और रसलीला अकादमी, वृंदावन की ओर से गीता श्लोक अंताक्षरी, पुरुषोत्तम योग गीत पाठ और भजन का आयोजन किया जाएगा।

इस कार्यक्रम के माध्यम से ब्रज की लोक परंपरा के साथ आध्यात्मिक एवं साहित्यिक संस्कृति को भी मंच प्रदान किया जाएगा।

8 अक्टूबर को कथक और जिकड़ी भजन

महोत्सव के तीसरे सांस्कृतिक दिवस 8 अक्टूबर को दिल्ली के कथक केंद्र की सुधी चेतना शर्मा कथक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। भारतीय शास्त्रीय नृत्य की यह प्रस्तुति सांझी महोत्सव के सांस्कृतिक आयाम को और व्यापक बनाएगी।

इसी दिन श्यामवीर एवं साथी कलाकारों द्वारा जिकड़ी भजन और लोक गायन प्रस्तुत किया जाएगा। ब्रज की लोकधुनों और पारंपरिक गायन शैली के माध्यम से दर्शक ब्रज की सांस्कृतिक अनुभूति से जुड़ सकेंगे।

9 अक्टूबर को सांझी कला के संरक्षण पर संगोष्ठी

9 अक्टूबर को सांझी कला की परंपरा और उसके संरक्षण से जुड़े विषयों पर विशेष संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें सांझी कला के इतिहास, वर्तमान स्वरूप, संरक्षण की आवश्यकता और नई पीढ़ी तक इस कला को पहुंचाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

वर्तमान समय में पारंपरिक लोक कलाओं को निरंतर संरक्षण और नए मंच की आवश्यकता है। ऐसे में यह संगोष्ठी सांझी कला के भविष्य को लेकर संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकती है।

10 अक्टूबर को होगा ब्रजभाषा कवि सम्मेलन

महोत्सव के अंतिम दिन 10 अक्टूबर को ब्रजभाषा कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से ब्रजभाषा और ब्रज संस्कृति की विशेषताओं को प्रस्तुत करेंगे।

ब्रजभाषा की साहित्यिक परंपरा को बढ़ावा देने की दृष्टि से यह कार्यक्रम भी महत्वपूर्ण रहेगा। इससे स्थानीय भाषा और साहित्य के प्रति लोगों, विशेषकर युवाओं में रुचि विकसित करने का अवसर मिलेगा।

पारंपरिक कलाकारों को मिलेगा मंच

सांझी महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि ब्रज की पारंपरिक कला और लोक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रयास है। आयोजन के माध्यम से सांझी कला को व्यापक पहचान दिलाने, पारंपरिक कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

महोत्सव के समन्वयक चन्द्र प्रताप सिंह सिकरवार तथा रसखान उपवन के व्यवस्थापक अनुपम यादव ने बताया कि आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। आयोजकों के अनुसार, महोत्सव में सांझी कला की विविध विधाओं के साथ ब्रज के संगीत, नृत्य, साहित्य और लोक परंपराओं का सुंदर समागम देखने को मिलेगा।