वृंदावन में व्यापारियों ने जीएसटी की जटिलताओं पर उठाई आवाज, वित्तमंत्री के नाम सौंपा मांगपत्र

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज

दावन,मथुरा: नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल, वृंदावन ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था से जुड़ी विभिन्न व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर भारत सरकार की वित्त मंत्री के नाम एक विस्तृत मांगपत्र जीएसटी कमिश्नर के कार्यालय के माध्यम से सौंपा।

संगठन का कहना है कि जीएसटी लागू होने के बाद देश में कर प्रणाली को एकीकृत करने का उद्देश्य निश्चित रूप से महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन इसके क्रियान्वयन के दौरान सामने आ रही कई व्यावहारिक चुनौतियों के कारण छोटे और मध्यम व्यापारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

व्यापार प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि इन समस्याओं का समय रहते समाधान किया जाता है, तो व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी तथा सरकार और व्यापारियों के बीच विश्वास भी मजबूत होगा। इसी उद्देश्य से संगठन ने विभिन्न सुझावों और मांगों को मांगपत्र के माध्यम से केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

जीएसटी की व्यावहारिक चुनौतियों पर जताई चिंता

नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने अपने ज्ञापन में कहा कि जीएसटी व्यवस्था के अंतर्गत कई बार तकनीकी त्रुटियों अथवा मानवीय भूल के कारण ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, जिनमें व्यापारी द्वारा पूरा कर जमा करने के बावजूद उसे नोटिस, जुर्माना अथवा अन्य प्रशासनिक कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।

संगठन ने मांग की कि ऐसे मामलों में वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए व्यापारियों को अनावश्यक दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी जाए।

व्यापारियों का कहना है कि कई बार पोर्टल संबंधी तकनीकी समस्याएं, दस्तावेज अपलोड करने में कठिनाई या अन्य प्रक्रियागत कारणों से विलंब हो जाता है। ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की बजाय सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए।

40 लाख रुपये तक कारोबार वालों को मिले राहत

मांगपत्र में प्रमुख रूप से यह मांग उठाई गई कि 40 लाख रुपये तक वार्षिक कारोबार करने वाले व्यापारियों के लिए जीएसटी पंजीकरण की अनिवार्यता समाप्त की जाए। संगठन का तर्क है कि छोटे व्यापारियों पर अनुपालन संबंधी औपचारिकताओं का अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जिससे उनका समय और संसाधन दोनों प्रभावित होते हैं।

संगठन के अनुसार यदि छोटे कारोबारियों को इस व्यवस्था में अधिक राहत मिलेगी, तो वे अपने व्यापार के विस्तार पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। साथ ही प्रशासनिक प्रक्रियाओं का बोझ भी कम होगा।

जांच और सर्वे के दौरान अनावश्यक दबाव न बने

व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने अपने ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया कि जांच एवं सर्वे की कार्रवाई के दौरान व्यापारियों पर अनावश्यक रूप से तत्काल कर जमा कराने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए। संगठन का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए तथा प्रत्येक व्यापारी को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए।

इसके अलावा व्यापारियों ने यह भी सुझाव दिया कि यदि किसी मामले में तथ्य स्पष्ट नहीं हैं, तो पहले जांच पूरी की जाए और उसके बाद ही नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाए।

ई-वे बिल संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग

मांगपत्र में ई-वे बिल प्रणाली से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों का भी उल्लेख किया गया। व्यापारियों का कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों या अन्य प्रक्रियागत समस्याओं के चलते ई-वे बिल संबंधी परेशानियां सामने आती हैं, जिससे माल की आवाजाही प्रभावित होती है।

संगठन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ई-वे बिल प्रणाली को और अधिक सरल एवं उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाया जाए ताकि व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े और वस्तुओं का परिवहन सुचारु रूप से हो सके।

विलंब से भुगतान पर ब्याज दर कम करने की मांग

व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने जीएसटी के विलंबित भुगतान पर लगने वाली 18 प्रतिशत ब्याज दर को कम करके अधिकतम 6 प्रतिशत करने की मांग भी उठाई। संगठन का कहना है कि वर्तमान ब्याज दर छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए अपेक्षाकृत अधिक है, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ जाता है।

संगठन का मानना है कि ब्याज दर में कमी से व्यापारियों को राहत मिलेगी और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

दंडात्मक प्रावधानों में राहत देने का सुझाव

ज्ञापन में जीएसटी अधिनियम के दंडात्मक प्रावधानों में भी आवश्यक संशोधन और राहत देने की मांग की गई। व्यापारियों का कहना है कि पहली बार होने वाली प्रक्रियागत या तकनीकी त्रुटियों को गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में रखने के बजाय सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त संगठन ने पंजीकृत व्यापारियों को डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) तथा आवश्यक सॉफ्टवेयर निःशुल्क उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया, ताकि अनुपालन प्रक्रिया सरल और कम खर्चीली बन सके।

दुर्घटना बीमा और अन्य मांगें भी शामिल

व्यापार प्रतिनिधि मंडल ने अपने मांगपत्र में व्यापारियों के लिए उपलब्ध दुर्घटना बीमा की सीमा बढ़ाने की मांग भी की। संगठन का कहना है कि वर्तमान समय की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए बीमा सुरक्षा का दायरा बढ़ाया जाना आवश्यक है।

इसके साथ ही तंबाकू एवं कुछ अन्य वस्तुओं पर जीएसटी से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने की मांग भी उठाई गई। संगठन का मानना है कि विभिन्न वस्तुओं पर कर संबंधी स्पष्टता होने से व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिलेगा।

अध्यक्ष आलोक बंसल ने रखी व्यापारियों की बात

नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष आलोक बंसल ने कहा कि संगठन की ओर से प्रस्तुत मांगें व्यापारियों की दैनिक समस्याओं और व्यावहारिक अनुभवों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन सुझावों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाता है, तो व्यापारिक वातावरण और अधिक सरल, पारदर्शी तथा विश्वासपूर्ण बनेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि कर प्रणाली का उद्देश्य व्यापार को प्रोत्साहित करना और राजस्व संग्रह को सुगम बनाना होना चाहिए। इसलिए ऐसी व्यवस्थाएं विकसित की जानी चाहिए जिनसे ईमानदार करदाताओं को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

कई व्यापारी पदाधिकारी रहे मौजूद

मांगपत्र सौंपने के दौरान व्यापार प्रतिनिधि मंडल के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। इस अवसर पर संयुक्त महामंत्री एवं प्रेम मंदिर व्यापार मंडल अध्यक्ष आशीष ठाकुर, इस्कॉन व्यापार मंडल अध्यक्ष आशु गौतम, आकाश गोस्वामी, रामू गुप्ता सहित अन्य व्यापारी मौजूद रहे। सभी ने संगठन की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

वृंदावन के नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल द्वारा वित्त मंत्री के नाम सौंपा गया यह मांगपत्र जीएसटी व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं के समाधान की दिशा में एक संगठित पहल माना जा रहा है।

व्यापारियों का कहना है कि उनकी मांगों का उद्देश्य कर प्रणाली को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बनाना है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्र सरकार इन सुझावों पर किस प्रकार विचार करती है और व्यापारियों को राहत देने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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