श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए बनेगा 3.5 किमी एलिवेटेड रोड, 470 करोड़ की विकास योजना को मिली मंजूरी
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में बढ़ती श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या को देखते हुए यातायात व्यवस्था को आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अवस्थापना विकास के अंतर्गत करीब 470 करोड़ रुपये की विकास योजना तैयार की है। इस योजना में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के लिए 3.5 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड, बस पार्किंग, संपर्क मार्गों के विस्तार और प्रमुख चौराहों के सुधार सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।
इन योजनाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं और पर्यटकों को जाम से राहत दिलाना, धार्मिक स्थलों तक पहुंच को आसान बनाना और मथुरा शहर की यातायात व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करना है। इसके साथ ही, भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की संख्या को ध्यान में रखते हुए जन सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि तक पहुंचने के लिए बनेगा एलिवेटेड रोड
एमवीडीए की योजना के तहत मछली फाटक से श्रीकृष्ण जन्मभूमि के गेट संख्या-3 तक करीब 3.50 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा। वर्तमान में यमुना एक्सप्रेस वे, एनएच-530 बी, एनएच-19, टाउनशिप और धौली प्याऊ की ओर से आने वाले श्रद्धालु टैंक चौराहा, एसबीआई तिराहा, नया बस स्टैंड और भूतेश्वर तिराहे से होकर जन्मभूमि पहुंचते हैं।
यह मार्ग शहर के प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए यहां लगातार यातायात का दबाव बना रहता है। विशेष रूप से पर्व, त्योहार और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने पर इस मार्ग पर जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है।
प्राधिकरण के अनुसार, इस मार्ग पर रेलवे अंडरपास होने और दोनों ओर पर्याप्त भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण सड़क का सामान्य चौड़ीकरण व्यावहारिक नहीं है। ऐसे में एलिवेटेड रोड को यातायात सुधारने का प्रभावी विकल्प माना गया है।
इस परियोजना पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। एलिवेटेड रोड बनने के बाद वर्तमान में 3.5 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगने वाला करीब 30 से 40 मिनट का समय घटकर लगभग 5 से 7 मिनट तक रह सकता है। इससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को यातायात जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
जन्मभूमि के पास बनेगी बस पार्किंग
श्रीकृष्ण जन्मभूमि क्षेत्र में बसों के कारण उत्पन्न होने वाली यातायात समस्या को दूर करने के लिए विशेष बस पार्किंग विकसित की जाएगी। योजना के तहत मसानी कट स्थित कल्याण करोति अस्पताल से रामलीला मैदान होते हुए महाविद्या कॉलोनी स्थित सीएम ग्रिड लिंक रोड तक करीब 1050 मीटर लंबे लिंक मार्ग का विकास किया जाएगा।
वर्तमान में एनएच-19 से श्रीकृष्ण जन्मभूमि आने वाली अधिकांश बसें गोविंद नगर के संकरे मार्गों से होकर गुजरती हैं। इसके कारण कई बार यातायात प्रभावित होता है। साथ ही, स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
इस समस्या के समाधान के लिए करीब 4 एकड़ प्राधिकरण भूमि पर बसों के लिए ओपन पार्किंग विकसित करने की योजना है। पार्किंग तक पहुंचने के लिए 12.50 मीटर चौड़ा दो लेन लिंक मार्ग बनाया जाएगा।
इसके अलावा, श्रीकृष्ण जन्मभूमि की ओर जाने वाले मार्ग को जोड़ने के लिए 30 फीट चौड़े मार्ग का निर्माण किया जाएगा। स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिए 7.50-7.50 मीटर चौड़े दो कैरिज-वे और दोनों ओर 2-2 मीटर चौड़े फुटपाथ भी विकसित किए जाएंगे।
इस पूरी परियोजना पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इससे बसों को व्यवस्थित रूप से पार्क करने की सुविधा मिलेगी और जन्मभूमि क्षेत्र में अनावश्यक यातायात दबाव कम हो सकता है।
17 प्रमुख चौराहों का होगा जंक्शन इम्प्रूवमेंट
मथुरा महानगर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए 17 प्रमुख तिराहों और चौराहों का जंक्शन इम्प्रूवमेंट किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
योजना के तहत टाउनशिप तिराहा, गोकुल तिराहा, कलेक्ट्रेट तिराहा, भूतेश्वर चौराहा, मंडी चौराहा, गोवर्धन चौराहा, गांधी पार्क तिराहा, प्रेम मंदिर जंक्शन, एसबीआई चौराहा और नया बस अड्डा तिराहा सहित अन्य प्रमुख जंक्शनों का सुधार किया जाएगा।
इन स्थानों पर यातायात की आवश्यकता के अनुसार लेन सेपरेटर, डिवाइडर, रोटरी, साइनेज, रोड मार्किंग, ग्रिल, स्पीड ब्रेकर और फुटपाथ विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा, आवश्यकतानुसार वेंडिंग जोन और पार्किंग की सुविधा भी विकसित करने की योजना है।
इससे यातायात संचालन को अधिक व्यवस्थित करने और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
बढ़ती श्रद्धालु संख्या को ध्यान में रखकर तैयार हुई योजना
श्रीकृष्ण जन्मभूमि और वृंदावन में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। धार्मिक आयोजनों, त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह संख्या और अधिक बढ़ जाती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए एमवीडीए ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कई महत्वपूर्ण अवस्थापना परियोजनाएं तैयार की हैं। इनका उद्देश्य केवल सड़क और यातायात व्यवस्था में सुधार करना नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं को बेहतर धार्मिक पर्यटन अनुभव उपलब्ध कराना भी है।
परियोजनाओं के तहत संपर्क मार्गों का विस्तार, पार्किंग सुविधाओं का विकास और प्रमुख चौराहों का सुधार किया जाएगा। इसके परिणामस्वरूप धार्मिक स्थलों तक पहुंच अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकती है।
भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया प्लान
मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी नागप्पन के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशानिर्देशों के तहत श्रीकृष्ण जन्मभूमि को ध्यान में रखते हुए ये परियोजनाएं भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार की गई हैं।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य केवल यातायात सुधारना नहीं है, बल्कि मथुरा-वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना भी है। इसके साथ ही, योजनाओं के क्रियान्वयन से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने बताया कि इन सभी परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है और उनका प्रस्तुतीकरण मुख्यमंत्री के समक्ष किया गया है।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि होने के कारण देश और दुनिया के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बेहतर यातायात और जन सुविधाएं उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यदि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड, बस पार्किंग, लिंक मार्ग और चौराहों के सुधार की योजनाएं निर्धारित समय के अनुसार पूरी होती हैं, तो मथुरा में यातायात व्यवस्था को काफी राहत मिल सकती है। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं को धार्मिक स्थलों तक पहुंचने में कम समय लगेगा और स्थानीय लोगों को भी रोजमर्रा के यातायात में सुविधा मिल सकती है।
इस प्रकार 470 करोड़ रुपये की अवस्थापना विकास योजना को मथुरा के भविष्य के यातायात और धार्मिक पर्यटन की जरूरतों से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले वर्षों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इन परियोजनाओं का प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सबसे महत्वपूर्ण होगा।

