कंधे पर पीपल-बरगद, मन में हरियाली का दिखा संकल्प; उन्नाव के ‘ट्री मैन’ अनूप मिश्रा बाँट रहे प्राकृतिक AC
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
उन्नाव: भीषण गर्मी, बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच उत्तर प्रदेश पुलिस के एक अधिकारी ने हरियाली बढ़ाने की ऐसी मुहिम शुरू की है, जो अब धीरे-धीरे जन आंदोलन का रूप ले रही है। उन्नाव जिले में पुलिस कंट्रोल रूम प्रभारी और वरिष्ठ उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत अनूप कुमार मिश्रा लोगों को एयर कंडीशनर के बजाय पीपल, बरगद और नीम जैसे छायादार पौधे उपहार में देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।
अनूप मिश्रा को लोग ‘पेड़ वाले पुलिस अंकल’, ‘ट्री मैन ऑफ यूपी’ और ‘ऑक्सीजन मैन ऑफ यूपी’ जैसे नामों से भी जानते हैं। वह अपनी वर्दी की जिम्मेदारियों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सामाजिक दायित्व मानते हैं। यही वजह है कि वह गांवों की चौपालों से लेकर शहर के मोहल्लों तक पहुंचकर लोगों को पौधे वितरित करते हैं और उन्हें पौधारोपण के साथ-साथ पौधों की रक्षा का संकल्प दिलाते हैं।
पीपल और बरगद को बताया भविष्य का प्राकृतिक एसी
अनूप मिश्रा का कहना है कि बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय असंतुलन के दौर में पेड़ आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ा प्राकृतिक सहारा हैं। उनके अनुसार, पीपल, बरगद और नीम जैसे पेड़ न केवल छाया देते हैं, बल्कि लंबे समय तक पर्यावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इसी विचार के साथ उन्होंने लोगों को पौधे उपहार में देने की अनूठी शुरुआत की है। उनका संदेश है कि आज लगाया गया एक पौधा भविष्य में शीतल छांव, स्वच्छ वातावरण और हरियाली का आधार बन सकता है।
वह लोगों से अपील करते हैं कि पौधा लगाने के बाद उसकी देखभाल भी उतनी ही जरूरी है। क्योंकि केवल पौधारोपण कर देने से पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होता। इसके लिए पौधे को बचाना और उसे बड़ा करना भी आवश्यक है।
2 लाख से अधिक पौधों का रोपण कराने का दावा
अनूप मिश्रा के अनुसार, स्वयं के प्रयास और जन सहयोग से अब तक 2 लाख से अधिक पौधों का रोपण कराया जा चुका है। इसके अलावा, लगाए गए पौधों की सुरक्षा के लिए भी लगातार प्रयास किए गए हैं।
वन विभाग, विभिन्न सरकारी विभागों, स्कूल-कॉलेजों, सामाजिक संस्थाओं और आम लोगों के सहयोग से 20 हजार से अधिक पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड की व्यवस्था कराई गई है। इससे पौधों को शुरुआती अवस्था में सुरक्षित रखने और उनके विकास में मदद मिली।
उनका मानना है कि पौधारोपण अभियान तभी सफल हो सकता है, जब पौधों की नियमित देखभाल की जाए। इसलिए उनकी मुहिम में पौधे लगाने के साथ-साथ उनकी सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी जाती है।
जियो टैगिंग से पौधों की निगरानी
पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए अनूप मिश्रा ने पौधों की जियो टैगिंग की शुरुआत भी की है। इसके माध्यम से लगाए गए पौधों की लोकेशन और उनके विकास की निगरानी की जा सकती है।
लोगों को भी अपने लगाए गए पौधों की जियो टैगिंग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि पौधों की स्थिति और उनके विकास को समय-समय पर ऑनलाइन देखा जा सके।
इस पहल से पौधारोपण अभियान में पारदर्शिता और जिम्मेदारी दोनों बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, लोगों को यह एहसास भी कराया जा रहा है कि पौधा लगाने के बाद उसकी जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।
1000 से अधिक पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम
अनूप मिश्रा की मुहिम केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है। स्कूलों, कॉलेजों, मोहल्लों और विभिन्न सामाजिक संस्थानों के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े 1000 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
इन कार्यक्रमों में ‘पर्यावरण संरक्षण पाठशाला’, ‘इको क्लास’ और ‘प्रकृति संवाद’ जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। इनका उद्देश्य बच्चों, युवाओं और आम लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है।
इसके अलावा, 3000 से अधिक स्कूलों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इन संस्थानों में हरित परिसर और स्वच्छ परिसर की दिशा में काम करने के लिए विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्रेरित किया जा रहा है।
अनूप मिश्रा के अनुसार, अब तक 5 लाख से अधिक लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाकर प्रकृति के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया है।
‘बरगद बचाओ महाअभियान’ से जुड़ रही महिलाएं
राष्ट्रीय वृक्ष बरगद के संरक्षण और इसकी संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से अनूप मिश्रा ने ‘बरगद बचाओ महाअभियान-मैं हूं मित्र बरगद का’ अभियान शुरू किया है।
इस अभियान को वट सावित्री व्रत से भी जोड़ा गया है। इसके माध्यम से महिलाओं को बरगद के पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। अभियान को हजारों महिलाओं का सक्रिय सहयोग मिलने की बात कही गई है।
बरगद को विरासत वृक्ष का दर्जा दिलाने के उद्देश्य से हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जा रहा है। इसके माध्यम से लोगों को इस विशाल और महत्वपूर्ण वृक्ष के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
गांवों और शहरों में लगेंगी पर्यावरण चौपाल
आने वाले समय में अनूप मिश्रा गांवों की चौपालों से लेकर शहरों के मोहल्लों तक ‘वृक्ष जल कथा-पर्यावरण चौपाल’ आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।
इन चौपालों में पेड़-पौधों और नदियों से जुड़ी लोक कथाओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जाएगा। बरगद, पीपल, नीम, आंवला और तुलसी जैसे पौधों के महत्व के साथ-साथ गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी नदियों के सांस्कृतिक और प्राकृतिक महत्व पर भी चर्चा होगी।
इसके अलावा, पोखर, तालाब और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण के लिए भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। इस दौरान लोगों को प्रकृति संरक्षण का संकल्प दिलाने की योजना है।
स्कूलों में बनेगी ग्रीन टास्क फोर्स
पर्यावरण संरक्षण को नई पीढ़ी से जोड़ने के लिए स्कूल और कॉलेजों में ग्रीन टास्क फोर्स बनाने की योजना है। इसमें शिक्षक और छात्र-छात्राएं मिलकर हरित और स्वच्छ परिसर के लिए काम करेंगे।
योजना के तहत जियो टैगिंग के साथ पौधा रोपण, पौधों की देखभाल और नियमित निगरानी पर जोर दिया जाएगा। इसके साथ ही ‘सेल्फी विद पौधा’ जैसे अभियानों के माध्यम से युवाओं को भी पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
इस तरह पौधारोपण को केवल एक कार्यक्रम न बनाकर विद्यार्थियों की नियमित गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
प्रकृति और भारतीय संस्कृति के बीच संबंध का संदेश
ग्रीन भारत अभियान के संयोजक और ‘ट्री मैन’ तथा ‘ऑक्सीजन मैन ऑफ यूपी’ के नाम से लोकप्रिय अनूप मिश्रा अपूर्व का कहना है कि पेड़-पौधे और नदियां केवल प्राकृतिक संपदा नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति में जीवन, आस्था और अध्यात्म का महत्वपूर्ण आधार भी हैं।
उनका मानना है कि भारतीय परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान और संरक्षण का संदेश लंबे समय से मौजूद रहा है। इसलिए आधुनिक समय में भी लोगों को पेड़-पौधों, नदियों और जल स्रोतों के साथ अपने संबंध को समझना होगा।
वह कहते हैं कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।
हरित भविष्य के लिए जनभागीदारी पर जोर
अनूप मिश्रा की पहल यह संदेश देती है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े संसाधनों के साथ-साथ व्यक्तिगत इच्छाशक्ति और सामुदायिक भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। एक पुलिस अधिकारी के रूप में अपनी जिम्मेदारियों के साथ पर्यावरण के लिए लगातार काम करना उनकी मुहिम को अलग पहचान देता है।
आज जब बढ़ते तापमान, प्रदूषण और घटते हरित क्षेत्र को लेकर चिंता बढ़ रही है, ऐसे में पौधे लगाना और उनकी रक्षा करना एक महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी बन गई है।
यदि इस तरह के अभियान में अधिक से अधिक लोग जुड़ते हैं, तो शहरों और गांवों में हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप दिया जा सकता है। यही अनूप मिश्रा की मुहिम का उद्देश्य भी है—कंधे पर पौधा लेकर लोगों तक पहुंचना और हर व्यक्ति को प्रकृति का प्रहरी बनाना।

