कानपुर में विधायक अमिताभ बाजपेई का 24 घंटे का सत्याग्रह, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन; परीक्षा पारदर्शिता की उठी मांग

अमिताभ

रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर: प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, नीट परीक्षा पेपर लीक प्रकरण की निष्पक्ष जांच तथा दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में समाजवादी पार्टी के विधायक अमिताभ बाजपेई ने शुक्रवार को अपने काकादेव स्थित आवास पर 24 घंटे का सत्याग्रह किया।

मूल रूप से यह सत्याग्रह फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा पर आयोजित किया जाना था, लेकिन पुलिस द्वारा वहां बैरिकेडिंग और रोक लगाए जाने के बाद कार्यक्रम का स्थान बदल दिया गया।

सत्याग्रह के समापन के बाद विधायक अमिताभ बाजपेई ने भारत की महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित एक ज्ञापन एडीसीपी अर्चना सिंह को सौंपा।

ज्ञापन में परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक की निष्पक्ष जांच, आंदोलनरत छात्रों से जुड़े मामलों की जांच तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने सहित कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गईं।

पुलिस की रोक के बाद आवास बना सत्याग्रह स्थल

विधायक अमिताभ बाजपेई और उनके समर्थकों ने पहले फूलबाग स्थित गांधी प्रतिमा पर शांतिपूर्ण सत्याग्रह करने की योजना बनाई थी। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने वहां सुरक्षा व्यवस्था और अन्य कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी तथा बैरिकेडिंग कर दी।

इसके बाद विधायक और उनके समर्थकों ने काकादेव स्थित उनके आवास को ही सत्याग्रह स्थल बनाया। यहां 24 घंटे तक शांतिपूर्ण ढंग से धरना और सत्याग्रह आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र, युवा, अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।

निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की उठी मांग

सत्याग्रह के दौरान विधायक अमिताभ बाजपेई ने कहा कि देश का युवा केवल निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय परीक्षा व्यवस्था चाहता है। उनके अनुसार प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाले विवाद लाखों मेहनती विद्यार्थियों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं।

उन्होंने कहा कि वर्षों की मेहनत के बाद जब किसी परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो इसका सबसे अधिक प्रभाव उन छात्रों पर पड़ता है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से तैयारी की होती है। इसलिए परीक्षा प्रणाली को मजबूत और पारदर्शी बनाना समय की आवश्यकता है।

लोकतांत्रिक अधिकारों का किया उल्लेख

विधायक ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि छात्र अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं तो उनकी बात सुनना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।

उन्होंने यह भी कहा कि संवाद और संवेदनशीलता के माध्यम से ही छात्रों की समस्याओं का समाधान संभव है। इसलिए सरकार और संबंधित संस्थानों को विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

राष्ट्रपति के नाम सौंपे गए ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे

सत्याग्रह समाप्त होने के बाद एडीसीपी अर्चना सिंह को सौंपे गए ज्ञापन में कई महत्वपूर्ण मांगों का उल्लेख किया गया। ज्ञापन में कहा गया कि नीट परीक्षा पेपर लीक प्रकरण ने देश की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

इसके साथ ही ज्ञापन में कहा गया कि लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों का विश्वास शिक्षा प्रणाली से जुड़ा हुआ है। ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

ज्ञापन में शामिल प्रमुख मांगें

ज्ञापन के माध्यम से निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गईं—

  • नीट परीक्षा पेपर लीक प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए।
  • जांच पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
  • प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाए।
  • दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलनरत छात्रों से जुड़े घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
  • संबंधित मामलों में यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
  • परीक्षा से जुड़े घटनाक्रमों के कारण प्रभावित परिवारों को आवश्यक सरकारी सहायता और नियमानुसार आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की मांग पर विचार किया जाए।

छात्रों और अभिभावकों ने भी जताई चिंता

सत्याग्रह में शामिल कई छात्रों और अभिभावकों ने प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित होना आवश्यक है।

प्रतिभागियों का मानना था कि यदि परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का विश्वास मजबूत रहेगा तो शिक्षा व्यवस्था भी अधिक प्रभावी बनेगी।

बड़ी संख्या में शामिल हुए सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता

सत्याग्रह में पूर्व सांसद सुभाषिनी अली, पूर्व मेयर प्रत्याशी वंदना बाजपेई, दीपा यादव, नीरज सिंह, वरुण मिश्रा, कुतुबुद्दीन मंसूरी, राजीव शर्मा, मोइन खान, सर्वेश यादव, कुलदीप यादव, विनय कोरी, कृपा शंकर त्रिवेदी, संतोष पांडे, चंकी गुप्ता, पार्षद रजत बाजपेई सहित अनेक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

इसके अतिरिक्त बड़ी संख्या में छात्र, युवा, अभिभावक और नागरिक भी सत्याग्रह में शामिल हुए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का समर्थन किया।

परीक्षा व्यवस्था में सुधार पर बढ़ी चर्चा

हाल के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर देशभर में चर्चा तेज हुई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, मजबूत निगरानी व्यवस्था और समयबद्ध जांच प्रक्रिया अपनाकर परीक्षा प्रणाली को और अधिक विश्वसनीय बनाया जा सकता है।

कानपुर में विधायक अमिताभ बाजपेई द्वारा आयोजित 24 घंटे का सत्याग्रह प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम रहा।

पुलिस की रोक के बाद भी कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से उनके आवास पर संपन्न हुआ और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगों को औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया।

अब इस पूरे घटनाक्रम के बाद संबंधित मांगों पर सरकार और प्रशासन की आगामी प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं। वहीं परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है।

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