अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में मानसून का असर: हाथियों और हिरनों की बढ़ी गतिविधियां, जंगल सफारी अस्थायी रूप से बंद

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रिपोर्ट – तबिश मिर्जा

बिजनौर: मानसूनी बारिश ने बिजनौर जनपद के अफजलगढ़ स्थित अमानगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगलों में नई जान फूंक दी है। लगातार हुई वर्षा के बाद वन क्षेत्र में तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इसके साथ ही प्राकृतिक जल स्रोतों में पानी की उपलब्धता बढ़ी है और जंगल फिर से हरियाली से आच्छादित हो गए हैं।

इन अनुकूल परिस्थितियों का सकारात्मक प्रभाव अब वन्यजीवों की गतिविधियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ दिनों से जंगल के खुले मैदानों, घास के क्षेत्रों और जल स्रोतों के आसपास हाथियों के दल तथा हिरनों के झुंड नियमित रूप से देखे जा रहे हैं।

वन विभाग के अनुसार मानसून के दौरान जंगल का प्राकृतिक संतुलन बेहतर होने से वन्यजीव अधिक सक्रिय हो जाते हैं। यही कारण है कि इस समय अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की आवाजाही सामान्य दिनों की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है।

हालांकि पर्यटकों और वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फिलहाल जंगल सफारी पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।

मानसूनी बारिश से बदला जंगल का प्राकृतिक स्वरूप

अमानगढ़ टाइगर रिजर्व, जो जिम कॉर्बेट लैंडस्केप का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, मानसून के बाद पूरी तरह हरे-भरे वातावरण में बदल गया है। बारिश के कारण जंगल के तालाब, प्राकृतिक जलाशय और छोटे जल स्रोत फिर से पानी से भर गए हैं। वहीं तापमान में कमी आने से वन्यजीवों को भी अनुकूल वातावरण मिला है।

वन विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में पानी और भोजन की सीमित उपलब्धता के कारण अधिकांश वन्यजीव घने जंगलों में रहते हैं। लेकिन जैसे ही मानसून आता है और प्राकृतिक संसाधन बढ़ते हैं, वे खुले क्षेत्रों में अधिक दिखाई देने लगते हैं।

हाथियों और हिरनों की गतिविधियां हुईं तेज

वन विभाग के गश्ती दल के अनुसार पिछले कुछ दिनों के दौरान कई स्थानों पर हाथियों के समूह और हिरनों के झुंड आसानी से देखे गए हैं। विशेष रूप से घास वाले मैदानों और जल स्रोतों के आसपास इनकी गतिविधियां बढ़ी हैं।

अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है। वर्षा के बाद नई घास तेजी से उगती है और जंगलों में जंगली फल भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाते हैं। इससे शाकाहारी वन्यजीवों को भोजन की कमी नहीं रहती और वे अपने प्राकृतिक आवास में अधिक सक्रिय दिखाई देते हैं।

शाकाहारी वन्यजीवों को मिला प्राकृतिक भोजन

मानसून के बाद जंगलों में उगने वाली ताजी हरी घास, कोमल वनस्पतियां और विभिन्न प्रकार के जंगली फल हाथी, हिरन तथा अन्य शाकाहारी जीवों के लिए प्रमुख भोजन का स्रोत होते हैं।

वन अधिकारियों के अनुसार वर्तमान समय में अमानगढ़ के जंगलों में भोजन और पानी दोनों की पर्याप्त उपलब्धता है। इसलिए वन्यजीवों को भोजन की तलाश में लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ रही। इससे उनके प्राकृतिक व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव देखा जा रहा है।

जल स्रोत बने वन्यजीवों का प्रमुख केंद्र

बारिश के बाद जंगल के प्राकृतिक जल स्रोतों में पर्याप्त पानी भर गया है। सुबह और शाम के समय हाथियों और हिरनों के अलावा अन्य वन्यजीव भी इन जल स्रोतों के आसपास देखे जा रहे हैं।

वन विभाग का कहना है कि गश्ती दल लगातार इन क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और उनके प्राकृतिक आवास में किसी प्रकार का अनावश्यक हस्तक्षेप न हो।

सुरक्षा को देखते हुए जंगल सफारी पर रोक

मानसून के मौसम में जंगल के रास्ते फिसलन भरे हो जाते हैं और कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति भी बन जाती है। इसके अलावा इस अवधि में वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ जाने से उनकी सुरक्षा और पर्यटकों की सुरक्षा दोनों महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

इसी कारण वन विभाग ने मानसूनी मौसम के दौरान अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी को अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया है। विभाग का कहना है कि मौसम सामान्य होने और रास्तों की स्थिति सुरक्षित होने के बाद ही सफारी दोबारा शुरू की जाएगी।

जैव विविधता के लिए अनुकूल समय

मानसून का मौसम जंगलों के पारिस्थितिक संतुलन के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान वनस्पतियों का तेजी से विकास होता है, जल स्रोत पुनर्जीवित होते हैं और वन्यजीवों को पर्याप्त प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध होते हैं।

अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में भी यही स्थिति देखने को मिल रही है। हरियाली बढ़ने से न केवल शाकाहारी जीवों को लाभ मिलता है बल्कि संपूर्ण खाद्य श्रृंखला पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

वन विभाग की लगातार निगरानी

वन विभाग की टीमें नियमित रूप से जंगल के विभिन्न हिस्सों में गश्त कर रही हैं। इस दौरान वन्यजीवों की गतिविधियों, जल स्रोतों और जंगल की स्थिति का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि मानसून के दौरान वन्यजीव संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही अवैध गतिविधियों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है ताकि रिजर्व क्षेत्र का प्राकृतिक वातावरण सुरक्षित बना रहे।

पर्यटकों से सहयोग की अपील

वन विभाग ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि जंगल सफारी पर लगी अस्थायी रोक का सम्मान करें और वन क्षेत्र के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचें। विभाग का कहना है कि वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रहने देना संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।

मौसम सामान्य होने और परिस्थितियां अनुकूल होने के बाद पर्यटकों के लिए सफारी दोबारा शुरू की जाएगी, जिससे वे सुरक्षित तरीके से अमानगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों का आनंद ले सकेंगे।

बिजनौर के अफजलगढ़ स्थित अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में मानसूनी बारिश के बाद प्राकृतिक वातावरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। तापमान में कमी, जल स्रोतों में बढ़ी उपलब्धता और हरी-भरी वनस्पतियों के कारण हाथियों और हिरनों सहित कई वन्यजीवों की गतिविधियां तेज हो गई हैं।

वन विभाग लगातार निगरानी कर रहा है और सुरक्षा के मद्देनजर जंगल सफारी को अस्थायी रूप से बंद रखा गया है। मानसून का यह दौर वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है तथा आने वाले समय में इससे जंगल का पारिस्थितिक संतुलन और अधिक मजबूत होगा।

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