रोडवेज बस में UPI भुगतान से इनकार: बांदा में यात्री को बस से उतारा, जानिए क्या है मामला
रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा: उत्तर प्रदेश सरकार लगातार डिजिटल भुगतान और कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। सरकारी सेवाओं में भी ऑनलाइन भुगतान को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि नागरिकों को सुविधा मिल सके और लेनदेन अधिक पारदर्शी बन सके। हालांकि, जमीनी स्तर पर कई बार ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जो इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर देती हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से सामने आया है, जहां एक यात्री ने आरोप लगाया कि रोडवेज बस के परिचालक ने UPI के माध्यम से किराया लेने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, यात्री का दावा है कि नकद राशि न होने के कारण उन्हें बस से उतरने के लिए कहा गया, जिससे उन्हें काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।
यह मामला अब मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल तक पहुंच गया है। शिकायत मिलने के बाद रोडवेज प्रशासन ने भी जांच कराने और तथ्य सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटना ने एक बार फिर सार्वजनिक परिवहन में डिजिटल भुगतान व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार समाजसेवी एवं पत्रकार इमरान अली ने आरोप लगाया है कि मंगलवार, 22 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 3:30 से 3:45 बजे के बीच उन्होंने बांदा से कानपुर जाने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बस संख्या UP90 T5525 में यात्रा शुरू की। उनके पास उस समय नकद राशि उपलब्ध नहीं थी। इसलिए उन्होंने परिचालक से अनुरोध किया कि किराया UPI के माध्यम से स्वीकार कर लिया जाए।
आरोप है कि परिचालक ने ऑनलाइन भुगतान लेने से इनकार करते हुए कहा कि वह केवल नकद भुगतान ही स्वीकार करेंगे। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब उन्होंने इसका कारण पूछा और यह जानना चाहा कि क्या टिकट मशीन में कोई तकनीकी खराबी है या नेटवर्क की समस्या है, तब भी उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
यात्री का दावा, बस से उतरने को कहा गया
शिकायतकर्ता के अनुसार परिचालक ने नकद भुगतान न होने की स्थिति में बस से उतरने के लिए कहा। इसके बाद उन्हें मजबूरी में बस छोड़नी पड़ी। बाद में दूसरी बस का इंतजार करना पड़ा, जिससे उनकी यात्रा करीब दो घंटे विलंब से पूरी हो सकी।
यात्री का कहना है कि इस घटना के कारण उन्हें समय की हानि के साथ-साथ आर्थिक और मानसिक असुविधा भी हुई। उनका मानना है कि यदि डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है तो उसका उपयोग करने वाले यात्रियों को इस प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए।
मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत
घटना के बाद इमरान अली ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने संबंधित परिचालक के खिलाफ उचित कार्रवाई करने और प्रदेश की सभी रोडवेज बसों में डिजिटल भुगतान व्यवस्था का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित कराने का अनुरोध भी किया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने की सरकारी नीति तभी सफल मानी जाएगी, जब सभी स्तरों पर उसका समान रूप से पालन किया जाए।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि पिछले महीने भी बांदा डिपो में UPI भुगतान स्वीकार न करने से जुड़ा एक मामला सामने आया था, जिसमें विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद यदि इसी प्रकार की शिकायतें दोबारा सामने आ रही हैं तो इससे यह संकेत मिलता है कि निर्धारित व्यवस्थाओं के पालन की नियमित निगरानी आवश्यक है।
हालांकि, इस पूर्व मामले के संबंध में विभाग की ओर से इस घटना के संदर्भ में कोई विस्तृत टिप्पणी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है।
एआरएम ने जांच के बाद कार्रवाई का दिया आश्वासन
बांदा डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) देशराज ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि बिना किसी तकनीकी कारण के परिचालक ने UPI भुगतान लेने से इनकार किया या यात्री के साथ अनुचित व्यवहार किया, तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई करेगा।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था क्यों है महत्वपूर्ण?
वर्तमान समय में UPI देश में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले डिजिटल भुगतान माध्यमों में शामिल है। बड़ी संख्या में लोग नकद राशि रखने के बजाय मोबाइल के माध्यम से भुगतान करना पसंद करते हैं। ऐसे में यदि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में डिजिटल भुगतान उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया जाता, तो यात्रियों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा डिजिटल भुगतान से लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है, भुगतान प्रक्रिया तेज होती है और नकदी प्रबंधन से जुड़ी कई व्यावहारिक समस्याएं भी कम हो सकती हैं। इसलिए सरकार और संबंधित विभाग समय-समय पर डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने पर बल देते रहे हैं।
यात्रियों की सुविधा पर उठे सवाल
इस घटना के बाद यह प्रश्न भी उठ रहा है कि यदि किसी बस में तकनीकी कारणों से ऑनलाइन भुगतान संभव नहीं है, तो यात्रियों को इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। वहीं यदि डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार उसका उपयोग सुनिश्चित किया जाना भी आवश्यक है।हालांकि, इस मामले में परिचालक का पक्ष सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इसलिए पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।बांदा से सामने आया यह मामला सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में डिजिटल भुगतान व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देने की आवश्यकता की ओर संकेत करता है। एक ओर सरकार कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर यदि किसी स्तर पर नियमों के पालन में कमी रहती है तो यात्रियों को असुविधा हो सकती है।फिलहाल इस मामले की विभागीय जांच प्रस्तावित है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और संबंधित परिचालक के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी या नहीं। तब तक यह मामला प्रशासनिक जांच के दायरे में है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

