कानपुर में गिरफ्तार किया गया साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट गैंग का मास्टरमाइंड, 50 हजार का था इनामिया
रिपोर्ट – सर्वेश सोनू शर्मा
कानपुर: साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने वाले एक गिरोह के खिलाफ कानपुर कमिश्नरेट पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बर्रा थाना पुलिस, क्राइम ब्रांच, साइबर टीम और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में 50 हजार रुपये के इनामी वांछित आरोपी समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान ओमकार यादव उर्फ राजवीर सिंह और उसके साथी शिवम सिन्हा के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि आरोपी डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े माध्यमों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। इसके बाद ठगी की रकम को अलग-अलग फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर उसे ठिकाने लगाने का काम किया जाता था।
संयुक्त टीम ने की कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के निर्देश पर साइबर अपराधों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में थाना बर्रा पुलिस, क्राइम ब्रांच, साइबर टीम और सर्विलांस टीम को वांछित आरोपियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली।
इसके बाद संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 50 हजार रुपये के इनामी वांछित अभियुक्त ओमकार यादव उर्फ राजवीर सिंह और उसके साथी शिवम सिन्हा को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और उनके नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का आरोप
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करते थे। इनमें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर या दबाव में लेकर रकम ट्रांसफर कराने का तरीका भी शामिल बताया गया है।
ऐसे मामलों में साइबर अपराधी अक्सर खुद को पुलिस, जांच एजेंसी, बैंक या किसी अन्य सरकारी संस्था का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। इसके बाद पीड़ित को किसी कथित मामले में फंसने का डर दिखाकर ऑनलाइन प्रक्रिया के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराने का प्रयास किया जाता है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों का नेटवर्क इसी तरह की साइबर ठगी और अवैध धनराशि के लेन-देन से जुड़ा हुआ पाया गया है।
फर्जी बैंक खातों के जरिए रकम ठिकाने लगाने का आरोप
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद इन खातों के माध्यम से रकम को आगे भेजकर ठिकाने लगाने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, जांच में करीब 42 बैंक खातों के संचालन की जानकारी सामने आई है। इन खातों को सात मोबाइल नंबरों के माध्यम से संचालित किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
पुलिस अब इन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और उनसे जुड़े लोगों की विस्तृत जांच कर रही है।
4.12 करोड़ रुपये की धनराशि पहले ही फ्रीज
पुलिस की कार्रवाई में साइबर अपराध से जुड़े वित्तीय लेन-देन पर भी बड़ा फोकस किया गया है। जांच के दौरान करीब 4.12 करोड़ रुपये की धनराशि पहले ही फ्रीज कराई जा चुकी है।
इसके अलावा, गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों में लगभग 35 से 40 लाख रुपये की धनराशि मिलने की जानकारी सामने आई है। इस रकम को भी फ्रीज कराने की कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस का उद्देश्य साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को आगे ट्रांसफर होने से रोकना और पीड़ितों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जानकारी जुटाना है।
पांच मोबाइल फोन और दस्तावेज बरामद
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने पांच मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा, अलग-अलग नामों के आधार कार्ड की प्रतियां भी बरामद होने की जानकारी दी गई है।
पुलिस इन मोबाइल फोन और दस्तावेजों की तकनीकी जांच कर रही है। मोबाइल फोन से प्राप्त जानकारी के आधार पर आरोपियों के संपर्कों, बैंक खातों और संभावित साइबर नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा सकती है।
इसके साथ ही, आरोपियों के कब्जे से एक आई-20 कार भी बरामद की गई है।
जांच में सामने आएगा नेटवर्क का विस्तार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध के मामलों में केवल एक या दो आरोपियों तक जांच सीमित नहीं रहती। ऐसे मामलों में बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोगों, रकम ट्रांसफर करने वाले व्यक्तियों और तकनीकी सहायता देने वाले नेटवर्क की भी जांच की जाती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं।
साथ ही, आरोपियों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों से जुड़े लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म से भी जुड़ा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों का संबंध प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने वाले वित्तीय लेन-देन से भी पाया गया है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के माध्यम से किस तरह रकम का लेन-देन किया जाता था और साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को किन खातों में भेजा जाता था।
इस दिशा में भी पुलिस तकनीकी और वित्तीय जांच कर रही है।
इनामी आरोपी की गिरफ्तारी से पुलिस को मिली अहम सफलता
ओमकार यादव उर्फ राजवीर सिंह पुलिस के लिए वांछित आरोपी था और उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। उसकी गिरफ्तारी को पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी लंबे समय से साइबर अपराध से जुड़े मामले में वांछित था। उसकी तलाश के लिए पुलिस की विभिन्न टीमें काम कर रही थीं।
अब गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे पूछताछ कर गिरोह के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
साइबर अपराध से बचने के लिए सावधानी जरूरी
पुलिस लगातार लोगों से साइबर अपराधों को लेकर सतर्क रहने की अपील करती है। किसी भी व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से डराकर तत्काल पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहा जाए तो सावधान रहने की आवश्यकता है।
किसी भी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी के नाम पर फोन आने पर बिना सत्यापन के कोई आर्थिक लेन-देन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा, बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है, तो उसे तुरंत संबंधित साइबर हेल्पलाइन और पुलिस को सूचना देनी चाहिए।
आगे की कानूनी कार्रवाई जारी
गिरफ्तार दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। बरामद मोबाइल फोन, दस्तावेज, वाहन और बैंक खातों से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत विवेचना जारी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
कुल मिलाकर, कानपुर में डिजिटल अरेस्ट गैंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार किए जाने के बाद साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। बर्रा पुलिस, क्राइम ब्रांच, साइबर और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में 50 हजार रुपये के इनामी वांछित आरोपी ओमकार यादव उर्फ राजवीर सिंह और उसके साथी शिवम सिन्हा को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी डिजिटल अरेस्ट, साइबर फ्रॉड और प्रतिबंधित ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को ठगी का शिकार बनाकर रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते थे। कार्रवाई के दौरान पांच मोबाइल फोन, अलग-अलग नामों के आधार कार्ड की प्रतियां और एक आई-20 कार बरामद की गई है।
जांच में 42 बैंक खातों के सात मोबाइल नंबरों से संचालन की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा, करीब 4.12 करोड़ रुपये की धनराशि पहले ही फ्रीज कराई जा चुकी है, जबकि 35 से 40 लाख रुपये की अतिरिक्त धनराशि को फ्रीज कराने की कार्रवाई चल रही है।
अब पुलिस आरोपियों के नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और साइबर ठगी से जुड़े वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है।

