कानपुर में गिरफ्तार किए गए दतिया के 3 साइबर ठग, पढ़िए म्यूल खातों से जुड़े मिले कितने करोड़ का लेन-देन
रिपोर्ट – सर्वेश सोनू शर्मा
कानपुर: कानपुर कमिश्नरेट पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत गुजैनी थाना क्षेत्र से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी कथित तौर पर विभिन्न स्रोतों से म्यूल बैंक खाते हासिल कर उनका इस्तेमाल साइबर ठगी से जुड़े लेन-देन में करते थे। प्रारंभिक जांच में इन खातों से लगभग 35 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी मध्य प्रदेश के दतिया क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनकी पहचान राहुल वर्मा, देवराज यादव और गौतम गोस्वामी के रूप में हुई है। पुलिस को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग कानपुर के गुजैनी क्षेत्र में ऐसे व्यक्तियों से संपर्क करने पहुंचे हैं, जो उन्हें बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीनों संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया।
म्यूल बैंक खातों के इस्तेमाल की जांच
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित तौर पर ऐसे बैंक खातों की तलाश में रहते थे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध से जुड़ी रकम के लेन-देन के लिए किया जा सके। साइबर अपराध की भाषा में ऐसे बैंक खातों को आम तौर पर ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है।
इन खातों का इस्तेमाल कई बार साइबर ठगी से प्राप्त रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजने, रकम निकालने या उसे अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार आरोपी किन लोगों से बैंक खाते प्राप्त करते थे और इन खातों का संचालन किस नेटवर्क के माध्यम से किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों की गतिविधियों और उनके संपर्कों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। इसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।
खातों की जांच में सामने आया 35 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेन-देन
गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों के सत्यापन के दौरान पुलिस को करीब 35 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन का पता चला है। प्रारंभिक जांच में पुलिस को आशंका है कि यह रकम डिजिटल अरेस्ट, निवेश योजनाओं और अन्य तरीकों का झांसा देकर की गई साइबर ठगी से संबंधित हो सकती है।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। संदिग्ध लेन-देन की कड़ियों को साइबर अपराध से जोड़कर देखा जा रहा है और संबंधित बैंक खातों तथा डिजिटल ट्रांजेक्शन का विश्लेषण किया जा रहा है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध रकम किन-किन खातों में भेजी गई और उसके बाद उसे किस तरह आगे स्थानांतरित किया गया। इसके अलावा, ठगी की रकम से जुड़े संभावित पीड़ितों और अन्य खाताधारकों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट और निवेश के नाम पर ठगी की जांच
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्ध लेन-देन का संबंध डिजिटल अरेस्ट, निवेश और अन्य योजनाओं का झांसा देकर की जाने वाली साइबर ठगी से हो सकता है। साइबर अपराधी अक्सर लोगों को अलग-अलग तरीकों से संपर्क कर उन्हें किसी सरकारी जांच, कानूनी कार्रवाई, निवेश में लाभ या अन्य योजनाओं का भरोसा दिलाते हैं।
इसके बाद पीड़ितों से बैंक खातों में रकम जमा कराने या ऑनलाइन माध्यम से धनराशि ट्रांसफर करने के लिए कहा जाता है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि गिरफ्तार आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए या इस्तेमाल किए गए बैंक खातों में ऐसी कोई रकम पहुंची थी या नहीं।
साथ ही, पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी केवल बैंक खातों की व्यवस्था करने तक सीमित थे या साइबर ठगी के व्यापक नेटवर्क में उनकी कोई अन्य भूमिका भी थी।
गुजैनी क्षेत्र में संपर्क करने पहुंचे थे आरोपी
पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपी कानपुर के गुजैनी क्षेत्र में उन लोगों से संपर्क करने पहुंचे थे, जो उन्हें बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इसी दौरान पुलिस को उनके बारे में सूचना मिली। सूचना के आधार पर पुलिस ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया और पूछताछ के बाद मामले में कार्रवाई की।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों और अन्य वित्तीय गतिविधियों का सत्यापन किया। इसके बाद करीब 35 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन की जानकारी सामने आई। पुलिस अब इन लेन-देन का स्रोत और गंतव्य पता लगाने का प्रयास कर रही है।
आईटी एक्ट के तहत दर्ज हुआ मुकदमा
पुलिस ने बताया कि मामले में थाना गुजैनी में आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके अलावा, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर अन्य कानूनी धाराओं में भी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ उनके मोबाइल फोन, बैंक खातों और अन्य डिजिटल माध्यमों की जांच कर रही है। इससे साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक खंगाल रही पुलिस
कानपुर पुलिस इस मामले में आरोपियों के फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंक की जांच कर रही है। यानी पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों को बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग कौन हैं और इन खातों के माध्यम से रकम आगे किन लोगों तक पहुंचाई जाती थी।
डीसीपी साउथ दीपेन्द्र नाथ चौधरी ने बताया कि मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान सामने आने वाले सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है। इसके साथ ही, साइबर अपराध से जुड़े नेटवर्क की अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच में जिन अन्य लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ भी नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
साइबर अपराध के नेटवर्क पर पुलिस की नजर
कानपुर पुलिस की इस कार्रवाई से एक बार फिर यह स्पष्ट होता है कि साइबर अपराध में बैंक खातों का इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में किया जा सकता है। इसलिए पुलिस अब ऐसे खातों और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन पर विशेष निगरानी रख रही है।
वहीं, पुलिस आम लोगों से भी अपील करती है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम, मोबाइल बैंकिंग या अन्य वित्तीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। किसी भी लालच, निवेश योजना या अन्य प्रस्ताव के नाम पर अपना बैंक खाता किसी दूसरे व्यक्ति के इस्तेमाल के लिए देना कानूनी और वित्तीय दोनों दृष्टि से गंभीर परेशानी का कारण बन सकता है।
फिलहाल, कानपुर में तीन साइबर ठग गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। 35 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन की कड़ियां सामने आने के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की विवेचना में साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क और उसके अन्य सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।

