फर्रुखाबाद: पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को उम्रकैद, ₹1.02 लाख का जुर्माना, पढ़िए क्या है पूरा मामला

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रिपोर्ट – हर्ष वर्मा

फर्रुखाबाद: उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में वर्ष 2022 में दर्ज एक गंभीर आपराधिक मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) रितिका त्यागी की अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने दोषी पर ₹1,02,000 का अर्थदंड भी लगाया है। यदि अर्थदंड जमा नहीं किया जाता है, तो दोषी को दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

यह मामला अमृतपुर थाना क्षेत्र का है और बाल लैंगिक अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम के अंतर्गत दर्ज किया गया था। अदालत के इस निर्णय को बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

वर्ष 2022 में दर्ज हुआ था मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार यह घटना 22 फरवरी 2022 की है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि वह रोजगार के सिलसिले में गाजियाबाद में रहते थे, जबकि उनका परिवार गांव में रहता था।

शिकायत के अनुसार, घटना वाले दिन उनकी लगभग 12 वर्षीय दिव्यांग पुत्री घर के पास बने शौचालय गई थी। आरोप है कि इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले श्रवण कुमार उर्फ रामवीर सिंह ने उसके साथ अपराध किया और किसी को जानकारी देने पर पूरे परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

पीड़िता ने प्रारंभ में भय के कारण घटना की जानकारी किसी को नहीं दी। बाद में अस्वस्थ महसूस होने पर उसने अपनी मां को पूरी बात बताई। इसके बाद परिवार ने पुलिस से संपर्क किया और संबंधित थाना में मामला दर्ज कराया गया।

पुलिस जांच के बाद दाखिल हुआ आरोपपत्र

मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने नियमानुसार जांच प्रारंभ की। जांच अधिकारी ने घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य एकत्र किए, संबंधित व्यक्तियों के बयान दर्ज किए और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की।

विवेचना पूरी होने के बाद आरोपी के विरुद्ध न्यायालय में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किया गया। इसके बाद मामला विशेष पॉक्सो न्यायालय में विचाराधीन रहा।

अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता तेज सिंह राजपूत ने न्यायालय के समक्ष उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए।

विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) रितिका त्यागी ने दोनों पक्षों की दलीलों, दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी माना।

अदालत ने अपने निर्णय में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई तथा ₹1,02,000 का अर्थदंड लगाया। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि निर्धारित अर्थदंड का भुगतान नहीं किया जाता है, तो दोषी को दो वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

पॉक्सो कानून का उद्देश्य

बाल लैंगिक अपराधों से संरक्षण (POCSO) अधिनियम बच्चों के विरुद्ध होने वाले लैंगिक अपराधों के मामलों की त्वरित और संवेदनशील सुनवाई के लिए बनाया गया है। इस कानून के अंतर्गत विशेष अदालतों में ऐसे मामलों की सुनवाई की जाती है ताकि पीड़ित बच्चों के अधिकारों की रक्षा हो सके और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच, साक्ष्यों का उचित संकलन और न्यायालय में प्रभावी प्रस्तुतीकरण न्याय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

न्यायिक प्रक्रिया का महत्व

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में न्यायालय का निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया पर आधारित होता है। पुलिस जांच, अभियोजन पक्ष की दलीलें और गवाहों के बयान अदालत के समक्ष महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह निर्णय इस बात को भी रेखांकित करता है कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में कानून के तहत दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड का प्रावधान है।

समाज में जागरूकता भी है जरूरी

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानूनी व्यवस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बच्चों को उनकी सुरक्षा, अधिकारों और भरोसेमंद लोगों से संवाद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

साथ ही, यदि किसी भी प्रकार की आपराधिक या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिले, तो उसकी सूचना समय पर संबंधित पुलिस अथवा सक्षम प्राधिकारी को देना आवश्यक है, ताकि नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

फर्रुखाबाद की विशेष पॉक्सो अदालत द्वारा सुनाया गया यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों और कानून के महत्व को दर्शाता है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह निर्णय बाल संरक्षण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायिक व्यवस्था की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

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