कानपुर: एस.एन. सेन बीवीपीजी कॉलेज में महिला स्वास्थ्य कार्यशाला, एपिजेनेटिक्स और आध्यात्मिक जीवनशैली पर विशेष व्याख्यान
vikas chauhan July 21, 2026
रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी
कानपुर: छात्राओं के समग्र स्वास्थ्य, वैज्ञानिक जागरूकता और आत्म-सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर के विज्ञान संकाय द्वारा आयोजित “Workshop on Women Health, Hygiene & Self Empowerment” के दूसरे दिन एपिजेनेटिक्स और सकारात्मक जीवनशैली पर केंद्रित विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया।
यह कार्यशाला 20 जुलाई से 28 जुलाई 2026 तक आयोजित की जा रही है, जिसका आयोजन शांतिकुंज, हरिद्वार तथा “आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी” के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं को केवल स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना ही नहीं, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक सोच, मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक जीवन मूल्यों से भी जोड़ना है। कार्यशाला में स्नातक और स्नातकोत्तर वर्ग की छात्राएं उत्साहपूर्वक भाग ले रही हैं।
एपिजेनेटिक्स और जीवनशैली पर विशेषज्ञ का व्याख्यान
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता डॉ. संगीता सारस्वत ने अपने व्याख्यान में एपिजेनेटिक्स की अवधारणा को सरल भाषा में समझाते हुए बताया कि मनुष्य की जीवनशैली, सोच, वातावरण और दैनिक आदतें स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं।
उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी इस बात की पुष्टि करता है कि सकारात्मक जीवनशैली शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए लाभकारी होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि संतुलित दिनचर्या, नियमित व्यायाम, पर्याप्त विश्राम, सकारात्मक सोच और मानसिक शांति जैसे तत्व व्यक्ति के समग्र विकास में सहायक होते हैं। साथ ही उन्होंने छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
योग, ध्यान और मानसिक संतुलन पर दिया गया जोर
व्याख्यान के दौरान डॉ. सारस्वत ने योग, ध्यान और नियमित मानसिक अभ्यास के महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि नियमित योग और ध्यान व्यक्ति को तनाव से निपटने, आत्मअनुशासन विकसित करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
उन्होंने छात्राओं से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्यवर्धक आदतों को शामिल करें और मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास करें। इस दौरान उन्होंने सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवनशैली के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
विज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों के समन्वय पर चर्चा
कार्यक्रम में वक्ता ने विज्ञान और आध्यात्मिक मूल्यों के बीच संतुलन की आवश्यकता पर भी विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सकारात्मक नैतिक मूल्यों का समन्वय व्यक्ति के समग्र विकास में सहायक हो सकता है।
उन्होंने छात्राओं को आत्मविश्वास, आत्मअनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही यह भी कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण में युवाओं, विशेषकर छात्राओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
छात्राओं को आत्मविश्वास और नेतृत्व के लिए प्रेरित किया
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को अपनी प्रतिभा पहचानने, आत्मविश्वास बढ़ाने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक सफलता तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि व्यक्तित्व विकास और सामाजिक उत्तरदायित्व भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इस अवसर पर छात्राओं को संवाद, सकारात्मक सोच और आत्मनिर्भरता के महत्व से भी अवगत कराया गया। वक्ताओं ने उन्हें समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनने का संदेश दिया।
मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर विशेष चर्चा
कार्यशाला के दौरान मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर भी विशेष सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना उतना ही आवश्यक है जितना शारीरिक स्वास्थ्य पर।
छात्राओं को तनाव कम करने के व्यावहारिक उपाय, समय प्रबंधन, सकारात्मक दृष्टिकोण और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के सुझाव दिए गए। साथ ही यह भी बताया गया कि नियमित अभ्यास और संतुलित जीवनशैली मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है।
स्वस्थ समाज निर्माण का संदेश
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. सुमन ने छात्राओं से कहा कि कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान को केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि अपने परिवार और समाज तक भी पहुंचाएं।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक छात्रा स्वास्थ्य, स्वच्छता और सकारात्मक जीवनशैली के संदेश को अपने आसपास के लोगों तक पहुंचाएगी, तो समाज में व्यापक स्तर पर जागरूकता बढ़ेगी और स्वस्थ सामाजिक वातावरण का निर्माण होगा।
आयोजन समिति की सक्रिय भूमिका
कार्यशाला के द्वितीय सत्र का संचालन प्रो. गार्गी यादव ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. प्रीति सिंह और डॉ. शैल वाजपेयी सहित आयोजन समिति के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर महाविद्यालय की वरिष्ठ प्रवक्ताओं प्रो. निशि प्रकाश, प्रो. रेखा चौबे सहित अन्य शिक्षकगण भी उपस्थित रहे। कॉलेज के शिक्षकों, कर्मचारियों तथा छात्राओं ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दिया।
छात्राओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता
कार्यशाला में स्नातक एवं स्नातकोत्तर वर्ग की बड़ी संख्या में छात्राओं ने भाग लिया। विभिन्न सत्रों के दौरान छात्राओं ने विशेषज्ञों से प्रश्न पूछे और स्वास्थ्य, स्वच्छता, मानसिक संतुलन तथा व्यक्तित्व विकास से जुड़े विषयों पर उपयोगी जानकारी प्राप्त की।
प्रतिभागियों ने इस प्रकार के कार्यक्रमों को ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन उन्हें जीवन के व्यावहारिक पहलुओं को समझने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं।
शिक्षा के साथ व्यक्तित्व विकास पर भी जोर
महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि आज के समय में उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए स्वास्थ्य जागरूकता, मानसिक संतुलन, स्वच्छता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता जैसे विषयों पर नियमित कार्यशालाओं का आयोजन भी आवश्यक है।
इसी उद्देश्य से आयोजित यह कार्यशाला छात्राओं को आधुनिक वैज्ञानिक जानकारी के साथ-साथ सकारात्मक जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पहल छात्राओं को आत्मनिर्भर, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करती है।
एस.एन. सेन बी.वी.पी.जी. कॉलेज, कानपुर में आयोजित “महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं आत्म-सशक्तिकरण” कार्यशाला का दूसरा दिन स्वास्थ्य, विज्ञान, मानसिक संतुलन और व्यक्तित्व विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा।
विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई जानकारी ने छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने की प्रेरणा दी।
महाविद्यालय द्वारा आयोजित यह पहल न केवल छात्राओं के ज्ञान और व्यक्तित्व विकास में सहायक सिद्ध हो रही है, बल्कि उन्हें समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए भी प्रेरित कर रही है।
आने वाले दिनों में कार्यशाला के अन्य सत्रों में भी महिला स्वास्थ्य, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे।

