भूजल सप्ताह 2026: कानपुर के क्राइस्ट चर्च इंटर कॉलेज में जल संरक्षण कार्यशाला और चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी

कानपुर:  जल संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप देने और नई पीढ़ी में प्राकृतिक संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से भूजल सप्ताह के अंतर्गत क्राइस्ट चर्च इंटर कॉलेज, कानपुर में एक विशेष जल संरक्षण जागरूकता कार्यशाला, चित्रकला प्रतियोगिता तथा जल संरक्षण शपथ ग्रहण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम भूगर्भ जल विभाग एवं डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया (WWF-India) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भूगर्भ जल संरक्षण, सतत जल प्रबंधन और जल के जिम्मेदार एवं विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक करना था। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को बताया कि जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। इसलिए इसका संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

विद्यार्थियों को बताया गया जल संरक्षण का महत्व

कार्यक्रम की शुरुआत जल संरक्षण विषयक जागरूकता सत्र से हुई। इस दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया की विशेषज्ञ आंचल मित्तल ने विद्यार्थियों को अर्बन वाटर फुटप्रिंट अभियान के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी मात्रा में जल का उपयोग करता है। ऐसे में यह समझना आवश्यक है कि हमारा वाटर फुटप्रिंट कितना है और उसे कैसे कम किया जा सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को वाटर कैलकुलेटर के उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि इसके माध्यम से कोई भी व्यक्ति अपने दैनिक जल उपयोग का आकलन कर सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने घरेलू स्तर पर जल बचाने के कई आसान उपाय भी साझा किए। उन्होंने कहा कि यदि लोग छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करें, जैसे नल को अनावश्यक खुला न छोड़ना, वर्षा जल का संग्रह करना और पानी का आवश्यकता अनुसार उपयोग करना, तो जल संरक्षण में बड़ा योगदान दिया जा सकता है।

वर्षा जल संचयन पर दिया विशेष जोर

कार्यक्रम के अगले चरण में भूगर्भ जल विभाग की हाइड्रोलॉजिस्ट अर्चना सिंह तथा जूनियर इंजीनियर गोपाल गुप्ता ने विद्यार्थियों को भूगर्भ जल संरक्षण के वैज्ञानिक और व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि लगातार बढ़ती आबादी, शहरीकरण और जल के अत्यधिक दोहन के कारण भूजल स्तर कई क्षेत्रों में प्रभावित हो रहा है। ऐसे में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि वर्षा के जल का उचित संग्रह और पुनर्भरण किया जाए तो भूजल स्तर को बनाए रखने में काफी मदद मिल सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने घरों, विद्यालयों और आसपास के लोगों को भी वर्षा जल संचयन के लिए प्रेरित करें।

जल का विवेकपूर्ण उपयोग ही भविष्य की सुरक्षा

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि जल संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि आज बचाया गया प्रत्येक बूंद पानी भविष्य की पीढ़ियों के लिए अमूल्य संसाधन सिद्ध होगा। इसलिए जल का उपयोग आवश्यकता के अनुसार करना और अनावश्यक बर्बादी से बचना अत्यंत आवश्यक है।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि यदि वर्तमान समय में जल संरक्षण पर गंभीरता से कार्य नहीं किया गया, तो भविष्य में जल संकट जैसी चुनौतियां और अधिक गंभीर हो सकती हैं। इसलिए अभी से जागरूक होकर सकारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है।

विद्यार्थियों और शिक्षकों ने ली जल संरक्षण की शपथ

कार्यक्रम के दौरान भूगर्भ जल विभाग के अधिकारियों ने सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई।

शपथ के माध्यम से सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे जल का सदुपयोग करेंगे, अनावश्यक जल व्यर्थ नहीं बहाएंगे तथा अपने परिवार और समाज में भी जल संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का प्रयास करेंगे।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने यह भी संकल्प लिया कि वे पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे और जल बचाने के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएंगे।

123 विद्यार्थियों और शिक्षकों ने किया उत्साहपूर्वक सहभाग

कार्यक्रम में लगभग 123 विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। आयोजन के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों से जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रश्न भी पूछे और व्यावहारिक सुझाव प्राप्त किए।

इसके अतिरिक्त लगभग 100 प्रतिभागियों से वाटर कैलकुलेटर फॉर्म भरवाए गए। इस प्रक्रिया के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने दैनिक जल उपयोग का स्वयं आकलन किया और यह समझा कि किन क्षेत्रों में जल की बचत संभव है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के व्यावहारिक अभ्यास विद्यार्थियों में जल संरक्षण की आदत विकसित करने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं।

चित्रकला प्रतियोगिता में दिखी विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित जल संरक्षण विषयक चित्रकला प्रतियोगिता आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लेते हुए जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा जैसे विषयों पर सुंदर एवं प्रेरणादायक चित्र बनाए।

प्रतिभागियों की कलाकृतियों में जल बचाने का संदेश स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कई चित्रों में यह दर्शाया गया कि यदि वर्तमान पीढ़ी जल संरक्षण के प्रति सजग होगी, तभी आने वाली पीढ़ियों को पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।

इस प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी सोच व्यक्त करने का भी अवसर प्रदान किया।

जल संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने का आह्वान

कार्यक्रम के समापन अवसर पर वक्ताओं ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल विद्यालय तक ही सीमित न रहें, बल्कि अपने परिवार, मित्रों और आसपास के लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति जल बचाने की दिशा में छोटे-छोटे प्रयास करेगा, तभी बड़े स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन संभव होगा।

साथ ही यह भी बताया गया कि जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा का आधार है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को जल के जिम्मेदार उपयोग की आदत अपनानी चाहिए।

जागरूकता से ही सुरक्षित होगा भविष्य

विशेषज्ञों ने कहा कि विद्यालयों में आयोजित ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी विकसित करने का प्रभावी माध्यम हैं। कम उम्र में यदि बच्चों को जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व की जानकारी दी जाए, तो वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

भूजल सप्ताह के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जिम्मेदार जल उपयोग का संदेश विद्यार्थियों तक पहुंचाकर कार्यक्रम ने समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सार्थक कार्य किया।

अंत में सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में यह संकल्प दोहराया कि वे स्वयं जल संरक्षण के उपाय अपनाएंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ और पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध रह सकें।

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