कानपुर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में हाई डिपेंडेंसी यूनिट का शुभारंभ, गर्भवती महिलाएं 24 घंटे विशेषज्ञ की निगरानी मे रहेंगी
रिपोर्ट- हरिशंकर शर्मा
कानपुर: कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी (जी.एस.वी.एम.) मेडिकल कॉलेज ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मेडिकल कॉलेज के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में मंगलवार को नवस्थापित हाई डिपेंडेंसी यूनिट (High Dependency Unit-HDU) का विधिवत शुभारंभ किया गया।
इस नई सुविधा का उद्देश्य गंभीर स्थिति वाली गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं को समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा, निरंतर निगरानी और बेहतर उपचार उपलब्ध कराना है, ताकि जटिलताओं को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह यूनिट उन मरीजों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी, जिन्हें सामान्य वार्ड से अधिक निगरानी की आवश्यकता होती है, लेकिन जिन्हें आईसीयू (ICU) में भर्ती करने की जरूरत नहीं होती। इसके माध्यम से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद की जा रही है।
मुख्य अतिथि ने किया HDU का उद्घाटन
हाई डिपेंडेंसी यूनिट का शुभारंभ जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य एवं अधिष्ठाता डॉ. संजय काला ने किया। इस अवसर पर उप प्राचार्य डॉ. ऋचा गिरी तथा एसआईसी डॉ. सौरभ अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने की।
उद्घाटन समारोह में कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सकों, संकाय सदस्यों, रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों ने भी भाग लिया। सभी ने इस पहल को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
क्या है हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU)?
हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) अस्पताल का ऐसा विशेष विभाग होता है, जहाँ उन मरीजों को भर्ती किया जाता है जिनकी स्थिति सामान्य वार्ड से अधिक गंभीर होती है, लेकिन उन्हें आईसीयू जैसी अत्यधिक गहन चिकित्सा की आवश्यकता नहीं होती।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में स्थापित यह यूनिट विशेष रूप से उन गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं के लिए तैयार की गई है, जिन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी, नियमित जांच और विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होती है।
इस यूनिट में मरीजों की 24 घंटे निगरानी, आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम, प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता और आपातकालीन उपचार की सुविधा सुनिश्चित की गई है। इसके कारण गंभीर स्थिति विकसित होने से पहले ही आवश्यक चिकित्सकीय हस्तक्षेप संभव हो सकेगा।
डॉ. रेनू गुप्ता ने बताई HDU की आवश्यकता
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने कहा कि हाई डिपेंडेंसी यूनिट मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
उन्होंने बताया कि कई बार गर्भावस्था या प्रसव के दौरान ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं, जिनमें मरीज को लगातार चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में HDU अत्यंत प्रभावी साबित होती है।
उन्होंने कहा कि इस यूनिट के माध्यम से गंभीर गर्भवती महिलाओं की निरंतर निगरानी संभव होगी। जटिलताओं की समय रहते पहचान की जा सकेगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तत्काल उपलब्धता रहेगी। समय पर उपचार मिलने से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य बेहतर होगा। गंभीर रोगग्रस्तता (Maternal Morbidity) तथा मातृ मृत्यु दर को कम करने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से मरीजों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मेडिकल कॉलेज की प्राथमिकता है।
उत्तर प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी जरूरत
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. संजय काला ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में शामिल है जहाँ हर वर्ष सबसे अधिक प्रसव होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में राज्य में मातृ मृत्यु दर (Maternal Mortality) में उल्लेखनीय कमी आई है, जो स्वास्थ्य सेवाओं में हुए सुधार का सकारात्मक परिणाम है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी भी कई गंभीर चिकित्सकीय चुनौतियाँ बनी हुई हैं। इनमें प्रमुख रूप से । प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage), गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप संबंधी विकार (Preeclampsia एवं Eclampsia), संक्रमण (Sepsis), गंभीर एनीमिया
जैसी समस्याएँ मातृ मृत्यु एवं Maternal Near Miss के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि नई HDU इन जटिल परिस्थितियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद करेगी।
मरीजों को मिलेगा आधुनिक उपचार
नई हाई डिपेंडेंसी यूनिट के शुरू होने से अब गंभीर गर्भवती महिलाओं को अस्पताल के भीतर ही उन्नत स्तर की निगरानी उपलब्ध होगी। पहले जिन मरीजों को अतिरिक्त निगरानी के लिए अन्य विभागों या आईसीयू पर निर्भर रहना पड़ता था, अब उन्हें HDU में ही बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।
इसके अलावा, आधुनिक मॉनिटरिंग उपकरणों की सहायता से मरीजों की हृदय गति, रक्तचाप, ऑक्सीजन स्तर तथा अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों पर लगातार नजर रखी जाएगी। यदि किसी मरीज की स्थिति में अचानक परिवर्तन होता है, तो तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप संभव होगा।
मातृ एवं नवजात मृत्यु दर कम करने में मिलेगी मदद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी गर्भवती महिला की गंभीर स्थिति की समय पर पहचान और उचित उपचार से बड़ी संख्या में जटिलताओं को रोका जा सकता है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए HDU की स्थापना की गई है। इससे न केवल मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में सहायता मिलेगी, बल्कि नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य परिणामों में भी सुधार की संभावना बढ़ेगी।
इसके साथ ही अस्पताल में रेफरल मामलों के बेहतर प्रबंधन में भी यह यूनिट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज लगातार स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण पर कार्य कर रहा है। नई चिकित्सा तकनीकों, आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ सेवाओं के विस्तार के माध्यम से मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
हाई डिपेंडेंसी यूनिट की शुरुआत भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। यह सुविधा न केवल कानपुर, बल्कि आसपास के जिलों से आने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए भी लाभकारी सिद्ध होगी।
विशेषज्ञों ने जताई सकारात्मक उम्मीद
कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सकों ने कहा कि HDU के संचालन से प्रसूति विभाग की उपचार क्षमता और अधिक मजबूत होगी। गंभीर मरीजों को समय पर आवश्यक चिकित्सा सहायता मिलने से इलाज की सफलता दर में सुधार होगा।
इसके अलावा, मेडिकल छात्रों और रेजिडेंट डॉक्टरों को भी गंभीर प्रसूति मामलों के प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा, जिससे भविष्य में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
विशेष रूप से लाभकारी होगी
जी.एस.वी.एम. मेडिकल कॉलेज, कानपुर में हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) का शुभारंभ मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सुविधा उन गर्भवती एवं प्रसूता महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी, जिन्हें सामान्य वार्ड से अधिक निगरानी और विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होती है।

