मथुरा में पहली बारिश ने खोली तैयारियों की पोल, भूतेश्वर पुल के नीचे जलभराव से श्रद्धालु और राहगीर परेशान
रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज
मथुरा: मानसून की शुरुआत के साथ हुई पहली प्रभावी बारिश ने मथुरा नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलवार सुबह लगभग 20 मिनट तक हुई बारिश के बाद शहर के सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल भूतेश्वर पुल के नीचे भारी जलभराव हो गया।
देखते ही देखते सड़क पर पानी भर गया और लोगों की आवाजाही प्रभावित होने लगी। श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों, स्कूल जाने वाले बच्चों, कार्यालय कर्मचारियों और वाहन चालकों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।
भूतेश्वर क्षेत्र धार्मिक और यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां से प्रतिदिन हजारों लोग गुजरते हैं। इसके बावजूद पहली ही बारिश में सड़क पर पानी भर जाना नगर निगम की मानसून तैयारियों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
20 मिनट की बारिश में सड़क बनी तालाब
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह करीब सात बजे शुरू हुई बारिश लगभग 20 मिनट तक चली। हालांकि बारिश बहुत अधिक देर तक नहीं हुई, लेकिन उसके बाद पुल के नीचे करीब एक फुट तक पानी जमा हो गया। जलभराव के कारण सड़क तालाब जैसी दिखाई देने लगी।
सबसे अधिक परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को हुई। कई बाइक और स्कूटर पानी में बंद हो गए, जबकि पैदल चलने वाले लोगों को घुटनों तक पानी में होकर गुजरना पड़ा। इसके अलावा स्कूल, कॉलेज और कार्यालय जाने वाले लोगों की दिनचर्या भी प्रभावित हुई।
श्रद्धालुओं को भी उठानी पड़ी परेशानी
भूतेश्वर क्षेत्र से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों की ओर जाते हैं। जलभराव के कारण उन्हें भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
वृंदावन से दर्शन के लिए आईं संतोषी देवी ने बताया कि बुजुर्ग लोगों के लिए इस प्रकार के जलभराव से गुजरना बेहद कठिन होता है। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए और जलनिकासी की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक नगरी मथुरा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुगम आवागमन सुनिश्चित करना प्रशासन और नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
नगर निगम के दावों पर उठे सवाल
मानसून शुरू होने से पहले नगर निगम की ओर से नालों की सफाई, जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और जलभराव रोकने के संबंध में विभिन्न तैयारियों का दावा किया गया था। हालांकि पहली ही बारिश के बाद भूतेश्वर पुल के नीचे जलभराव की स्थिति सामने आने से इन दावों पर सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नालों की नियमित और प्रभावी सफाई होती तो इतनी कम अवधि की बारिश में सड़क पर इस स्तर का जलभराव नहीं होता।
स्थानीय व्यापारियों ने जताई नाराजगी
भूतेश्वर पुल के पास चाय की दुकान संचालित करने वाले रमेश चंद शर्मा ने बताया कि हर वर्ष मानसून के दौरान यही स्थिति देखने को मिलती है। उनके अनुसार थोड़ी देर की बारिश के बाद पूरा क्षेत्र पानी से भर जाता है, जिससे ग्राहकों और दुकानदारों दोनों को परेशानी होती है।
उन्होंने बताया कि जलभराव के कारण कई दोपहिया वाहन बंद हो गए, जिससे लोगों को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा। उनका कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान किया जाए तो ऐसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
वाहन चालकों को हुआ आर्थिक नुकसान
जलभराव का असर केवल यातायात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कई वाहन चालकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
ऑटो चालक अनिल यादव ने बताया कि वह सवारी लेने पहुंचे थे, लेकिन जलभराव और जाम के कारण काफी देर तक फंसे रहे। उनके अनुसार वाहन के इंजन में पानी चले जाने से मरम्मत का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ेगा।
इसी प्रकार कई बाइक सवारों को अपने वाहन धक्का लगाकर बाहर निकालने पड़े, जिससे उन्हें काफी असुविधा हुई।
यातायात व्यवस्था भी रही प्रभावित
भूतेश्वर पुल के नीचे पानी भरने के कारण पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। कुछ समय के लिए यातायात की गति काफी धीमी हो गई।
स्थिति को सामान्य बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस को अतिरिक्त प्रयास करने पड़े। पुलिसकर्मियों ने वाहनों को वैकल्पिक तरीके से निकालकर यातायात को धीरे-धीरे सुचारु कराया।
हालांकि कुछ समय बाद पानी का स्तर कम होने लगा, लेकिन तब तक लोगों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
हर वर्ष सामने आती है यही समस्या
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि भूतेश्वर पुल के नीचे जलभराव कोई नई समस्या नहीं है। लगभग हर मानसून में यहां इसी प्रकार की स्थिति उत्पन्न होती है।
लोगों का मानना है कि यदि जलनिकासी प्रणाली को तकनीकी रूप से मजबूत बनाया जाए और नालों की समय पर सफाई हो तो इस समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि शहरी क्षेत्रों में जलभराव रोकने के लिए केवल सफाई अभियान पर्याप्त नहीं होता, बल्कि वर्षाजल निकासी प्रणाली का नियमित निरीक्षण और रखरखाव भी आवश्यक होता है।
स्थायी समाधान की उठी मांग
स्थानीय लोगों ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि भूतेश्वर पुल तथा उसके आसपास के नालों की व्यापक सफाई कराई जाए। साथ ही जलनिकासी व्यवस्था का तकनीकी परीक्षण कर आवश्यक सुधार किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो।
नागरिकों का कहना है कि मानसून अभी प्रारंभिक चरण में है। यदि अभी से प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आगे होने वाली अधिक बारिश के दौरान समस्या और गंभीर हो सकती है।
धार्मिक नगरी की छवि पर भी असर
मथुरा देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में शहर के प्रमुख मार्गों पर जलभराव जैसी समस्याएं न केवल स्थानीय नागरिकों बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के अनुभव को भी प्रभावित करती हैं।
शहर की आधारभूत सुविधाओं को मजबूत बनाना पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए नागरिकों ने अपेक्षा जताई है कि संबंधित विभाग इस समस्या के समाधान के लिए शीघ्र आवश्यक कदम उठाएंगे।
भूतेश्वर पुल के नीचे पहली ही बारिश में हुए जलभराव ने एक बार फिर शहरी जलनिकासी व्यवस्था की चुनौतियों को सामने ला दिया है। हालांकि बारिश अधिक समय तक नहीं हुई, फिर भी सड़क पर पानी भरने से आमजन, श्रद्धालुओं और वाहन चालकों को असुविधा हुई।
अब स्थानीय लोगों की नजर नगर निगम की आगामी कार्रवाई पर है। यदि समय रहते प्रभावी और स्थायी समाधान लागू किया जाता है, तो आने वाले मानसून में ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
वहीं बेहतर जलनिकासी व्यवस्था न केवल नागरिकों की सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि मथुरा की धार्मिक और पर्यटन छवि को भी मजबूती प्रदान करेगी।

