बिजनौर के द हाराइजन स्कूल में ‘हाथों की कला’ प्रदर्शनी, बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा ने जीता सभी का दिल
रिपोर्ट – ताबिश मिर्जा
बिजनौर: शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होती, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, रचनात्मक सोच और व्यावहारिक कौशल को निखारने का भी महत्वपूर्ण माध्यम होती है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए नजीबाबाद स्थित दा हाराइजन स्कूल में ‘हाथों की कला’ प्रदर्शनी का भव्य आयोजन किया गया। इस प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने पेंटिंग, ड्रॉइंग, क्राफ्ट, हस्तशिल्प और विज्ञान आधारित रचनात्मक मॉडल प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की कल्पनाशीलता, मेहनत और नवाचार ने अभिभावकों तथा उपस्थित अतिथियों का ध्यान आकर्षित किया। विशेष रूप से विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए सोलर ऊर्जा आधारित मॉडल सभी के लिए आकर्षण का केंद्र बने।
प्रदर्शनी का उद्देश्य बच्चों की रचनात्मक क्षमता को मंच प्रदान करना, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना तथा पढ़ाई के साथ-साथ कला और नवाचार के महत्व को बढ़ावा देना था।
रचनात्मकता और नवाचार का अनूठा संगम
प्रदर्शनी में विद्यालय के विभिन्न वर्गों के विद्यार्थियों ने अपने हाथों से तैयार की गई कलाकृतियों को प्रदर्शित किया। पेंटिंग, रंगोली, पेपर क्राफ्ट, वेस्ट मटेरियल से उपयोगी वस्तुओं का निर्माण, सजावटी हस्तशिल्प और विज्ञान आधारित प्रोजेक्ट्स ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
हर कृति में विद्यार्थियों की मेहनत, कल्पनाशक्ति और सीखने की उत्सुकता स्पष्ट दिखाई दे रही थी। कई मॉडलों में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, ऊर्जा बचत और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों को भी रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
सोलर मॉडल बने आकर्षण का केंद्र
प्रदर्शनी में सबसे अधिक सराहना उन परियोजनाओं की हुई, जिन्हें विद्यार्थियों ने सौर ऊर्जा (Solar Energy) के उपयोग पर आधारित तैयार किया था। बच्चों ने ऐसे मॉडल प्रस्तुत किए जो सोलर ऊर्जा से संचालित होने वाले उपकरणों की कार्यप्रणाली को सरल तरीके से समझाते थे।
अभिभावकों और अतिथियों ने इन मॉडलों की सराहना करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में बच्चों द्वारा विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण को व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करना प्रेरणादायक है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि विद्यालय विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक शिक्षा देने पर भी विशेष ध्यान दे रहा है।
अभिभावकों ने बढ़ाया बच्चों का उत्साह
प्रदर्शनी देखने पहुंचे अभिभावकों ने विद्यार्थियों की रचनात्मकता की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्रदान करते हैं और उनके आत्मविश्वास को मजबूत बनाते हैं।
कई अभिभावकों ने अपने बच्चों की बनाई गई कलाकृतियों और मॉडलों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। उन्होंने विद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ कला, विज्ञान और नवाचार पर समान रूप से ध्यान देना समय की आवश्यकता है।
शिक्षा के साथ कला का संतुलन आवश्यक
विद्यालय की प्रिंसिपल ज्योति ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास केवल पाठ्यपुस्तकों से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विद्यालय समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता है, ताकि बच्चों की छिपी हुई प्रतिभा सामने आ सके और उनमें आत्मविश्वास विकसित हो।
उन्होंने कहा कि कला, रचनात्मक गतिविधियां और वैज्ञानिक सोच बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार कार्य करने का अवसर मिलता है, तो उनकी सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों में वृद्धि होती है।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियां राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप हैं, जिसमें अनुभवात्मक शिक्षा, रचनात्मक सोच और कौशल विकास पर विशेष बल दिया गया है।
विद्यालयों में कला, विज्ञान और नवाचार आधारित प्रदर्शनियां विद्यार्थियों को केवल परीक्षा तक सीमित नहीं रखतीं, बल्कि उन्हें वास्तविक जीवन की चुनौतियों के लिए भी तैयार करती हैं।
विद्यार्थियों में बढ़ता है आत्मविश्वास
मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब किसी विद्यार्थी को अपनी प्रतिभा सार्वजनिक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ता है। साथ ही वह नई चीजें सीखने और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होता है।
प्रदर्शनी के दौरान कई विद्यार्थियों ने स्वयं अपने प्रोजेक्ट्स और मॉडलों के बारे में जानकारी दी। इससे उनके संवाद कौशल प्रस्तुतीकरण क्षमता और नेतृत्व गुणों का भी विकास हुआ।
पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
कई विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों और मॉडलों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ ऊर्जा, जल संरक्षण और पुनर्चक्रण (Recycling) का संदेश भी दिया।
विशेष रूप से सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं ने यह संदेश दिया कि भविष्य में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना आवश्यक है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ऊर्जा बचत को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
विद्यालय प्रशासन ने भविष्य की योजनाएं बताईं
विद्यालय प्रशासन ने बताया कि आने वाले समय में भी विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के रचनात्मक, सांस्कृतिक और विज्ञान आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसके अलावा कला प्रतियोगिताएं, विज्ञान प्रदर्शनी, साहित्यिक गतिविधियां और व्यक्तित्व विकास कार्यक्रम भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।
शिक्षा में सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का महत्व
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां विद्यार्थियों के मानसिक, सामाजिक और बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को टीमवर्क, समस्या समाधान, नेतृत्व क्षमता और नवाचार जैसी महत्वपूर्ण जीवन कौशल विकसित करने में सहायता करते हैं।
इसी कारण आज अधिकांश विद्यालय शिक्षा के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों को भी पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे हैं।
नजीबाबाद के दा हाराइजन स्कूल में आयोजित ‘हाथों की कला’ प्रदर्शनी विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, वैज्ञानिक सोच और नवाचार क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आई।
पेंटिंग, हस्तशिल्प, क्राफ्ट और सोलर ऊर्जा आधारित मॉडलों ने न केवल अभिभावकों और अतिथियों को प्रभावित किया, बल्कि यह भी सिद्ध किया कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर बच्चे अपनी कल्पनाशक्ति को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। विद्यालय की यह पहल शिक्षा के साथ कला, विज्ञान और व्यक्तित्व विकास के संतुलित दृष्टिकोण को भी मजबूत करती है।

